Himachal Election 2017: BJP का मिशन 50+ पड़ने लगा है कमजोर, खुद पार्टी में दिख रही है वीकनेस

हिमाचल प्रदेश में तेरहवीं विधानसभा के गठन की तैयारियों के बीच प्रदेश में जो माहौल उभर रहा है वो भाजपा के लिए उतना माकूल नहीं, जितना सोचा जा रहा था।

शिमला। हिमाचल प्रदेश में तेरहवीं विधानसभा के गठन की तैयारियों के बीच प्रदेश में जो माहौल उभर रहा है वो भाजपा के लिए उतना माकूल नहीं, जितना सोचा जा रहा था। अब खुद भाजपा नेता ही मिशन फिफटी की बात नहीं बल्कि बहुमत के लिए जरूरी सीटें ही आने की बात कर रहे हैं। यानि दावा वही कि सरकार भाजपा ही बना रही है। दरअसल भाजपा चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा ही नहीं उठा पाई, जिससे कांग्रेस को घेरा जा सके। भाजपा भ्रष्टाचार के मामले में खुद ही बैकफुट पर आती दिखी, तो व्यापारी वर्ग ने जीएसटी को लेकर अपनी नाराजगी के चलते भाजपा के साथ चलने से परहेज किया। हालांकि ये भाजपा का वोट बैंक रहा है। यही नहीं कोटखाई गैंगरेप मर्डर मामले में सरकार के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने वाली भाजपा चुनाव के समय इस मुद्दे को अपर शिमला में इसलिए नहीं भुना पाई कि सीबीआई लंबी जांच के बाद भी खाली हाथ है। इसी तरह मंडी के फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह के मामले का है। मंडी में इसका भी कोई असर नहीं दिखा। आलम ये है कि जीएसटी को लेकर व्यापारी भाजपा से मुंह फुलाए बैठा है, तो मंहगाई को लेकर भी भाजपा की हालत पतली हो रही है।

पार्टी की साख को गहरा धक्का!

पार्टी की साख को गहरा धक्का!

Himachal Election 2017 - लिहाजा, तय है कि भारतीय जनता पार्टी की मेहनत अगर पूरी तरह सफल नहीं हुई तो पार्टी की साख को गहरा धक्का पहुंचेगा, जिसका दूरगामी परिणाम पार्टी की कारगुजारी पर पड़ सकता है। साथ ही भाजपा के मोदी ब्रांड की प्रासंगिकता पर भी सवाल उठेंगे। जिसका असर गुजरात में भी पड़ेगा। भाजपा ने पहली बार केंद्रीय नेताओं की भारी-भरकम फौज हिमाचल में प्रचार के लिए झोंकी। प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह की जोड़ी खुद इन चुनावों की देख-रेख के लिए प्रदेश में कई दिनों तक प्रवास पर रही। इसके अलावा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, स्मृति ईरानी, थावरचंद गहलोत, उतराखंड और उतरप्रदेश के मुख्यमंत्री भाजपा के चुनाव प्रचार में आकर्षण का केंद्र रहे। भाजपा ने इन विधानसभा चुनावों में अपनी जितनी ताकत झोंकी, उसे देखकर लगता है कि काफी हद तक पार्टी मजबूत स्थिति में लग रही है लेकिन मतदाता खामोश हैं। कई चुनाव क्षेत्रों में भाजपा के बागी दनदना रहे हैं। जिससे भाजपा में बेचैनी का महौल है।

कांग्रेस ने ली है चुटकी

कांग्रेस ने ली है चुटकी

भाजपा की ओर से किए जा रहे प्रचार पर कांग्रेस के कद्दावर नेता आनंद शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी से इस भारी-भरकम प्रचार के लिए खर्च होने वाले धन के स्रोत की जानकारी मांगी है। दरअसल सोशल मीडिया सहित जितने भी सूचना प्रसार के साधन हैं, उनमे प्रदेश में भाजपा के बहुमत की घोषणा की जा रही है। प्रदेश के पिछले चुनावों के परिणाम अगर देखे जाएं तो प्रदेश में हर बार सत्ता परिवर्तन होता रहा है। एक चुनाव में यदि कांग्रेस पार्टी बहुमत में आती है तो दूसरी बार भारतीय जनता पार्टी। इस तरह से इस क्रम में वैसे भी अब भाजपा की बारी है।

बीजेपी को हो रही है हताशा

बीजेपी को हो रही है हताशा

Himachal Election 2017 - एक ही संशय भाजपा को हताश कर रहा है यदि कहीं सारे ओपिनियन, सर्वे और आकलन भाजपा के आशा अनुरूप नहीं निकले तो क्या होगा? हिमाचल प्रदेश के राजनीतिक इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ है जब भारतीय जनता पार्टी के प्रचार की कमान सीधे प्रधानमंत्री और केंद्रीय पार्टी अध्यक्ष ने संभाली हो। वास्तव में हिमाचल में मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर भाजपा ने जोखिम भी उठाया है। पार्टी की इस घोषणा को हिमाचल प्रदेश के मतदाता कैसे लेंगे ये रहस्य चुनाव परिणाम तक बना रहेगा। फिलहाल प्रदेश का ब्राह्मण वोट नड्डा को सीएम की दौड़ से हटने के बाद भाजपा से छिटक कर कांग्रेस के खेमे में चला गया है। ब्राह्मण संगठनों की लगातार बैठकें हो रही हैं। प्रदेश में करीब 20 फीसदी ब्राह्मण मतदाता हैं जो सरकार बनाने में अहम रोल अदा करते आए हैं।

बीजेपी ने लगाया तो है जोर...

बीजेपी ने लगाया तो है जोर...

हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की जीत को सुनिश्चित करने के लिए आरएसएस वर्कर और भारतीय जनता पार्टी की अन्य सहयोगी संस्थाएं प्रदेश में पूरे जोरों पर कार्य करती रहीं। प्रदेश के 7,521 मतदान केंद्रों के प्रबंधन का जिम्मा भाजपा के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को सौंपा गया है। इन मतदान केंद्रों में से 598 शहरी और 6,923 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। स्थिति का सही आकलन तो 18 दिसंबर को परिणाम घोषित होने पर ही किया जा सकेगा। इतना तय है की भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी कांगड़ा और चंबा में अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आशावान हैं जबकि शिमला, सोलन, सिरमौर में कांग्रेस के प्रत्याशियों की बांछें खिली हुई हैं।

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