राष्ट्रपति चुनाव में विधायक अनिल शर्मा के वोट को लेकर पशोपेश में भाजपा, पार्टी को क्रॉस वोटिंग का डर
शिमला, 11 जुलाई। 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भाजपा एक-एक वोट के लिये कड़ी मशक्कत कर रही है और एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू अपने लिए समर्थन जुटाने के लिये देशभर में दौरा कर रही है। लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के गृह प्रदेश हिमाचल प्रदेश में भाजपा के एक विधायक ने इन दिनों पार्टी को पशोपेश में डाल दिया है कि वह अपना वोट कहां डालेंगे। इस एक वोट को लेकर प्रदेश में सियासत तेज हो गई है और दिल्ली दरबार भी इसी वोट पर नजर गड़ाये है।

दरअसल, भाजपा नेतृत्व को लगता है कि हिमाचल के मंडी सदर के विधायक पूर्व मंत्री अनिल शर्मा राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। अनिल शर्मा को लेकर शंका उस समय पैदा हुई, जब राष्ट्रपति चुनाव की रणनीति पर चर्चा के लिए चंडीगढ़ में बुलाई गई। अनिल शर्मा हिमाचल भाजपा विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं हुए थे और उसके बाद एनडीए की राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू हिमाचल भाजपा विधायकों से मिलने बद्दी पहुंचीं तो भी अनिल शर्मा वहां नहीं दिखाई दिये। उसके बाद पार्टी में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि सभी विधायकों को समय रहते दोनों ही कार्यक्रमों के बारे में बाकायदा सूचना भेजी गई थी। सारे मामले की भनक पार्टी आलाकमान को लगी तो इस बारे में प्रदेश नेतृत्व से पूछताछ की गई। ऐसी अटकलें हैं कि मंडी सदर से भाजपा विधायक अनिल शर्मा राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोट कर सकते हैं या फिर इससे नदारद रह सकते हैं। दोनों ही सूरत में सीएम जय राम ठाकुर के लिये माहौल सुखद नहीं हो सकता। यही वजह है कि इन दिनों भाजपा नेताओं की नजर अनिल शर्मा की ओर हैं जिससे चुनाव रोचक हो गया है।

अनिल शर्मा के अपनी पार्टी के खिलाफ यह बगावती तेवर तब से देखने को मिल रहे हैं जबसे उन्हें हिमाचल सरकार के काबीना मंत्री के तौर पर अपना इस्तीफा देना पड़ा था। उन्होंने तीन साल पहले इस्तीफा दिया था और कई मौकों पर अपनी उपेक्षा का आरोप अनिल शर्मा लगाते रहे हैं। भाजपा ने उनसे किनारा कर लिया था और पार्टी कार्यक्रमों में उनकी शिरकत भी कम हो गई थी। पूर्व दूरसंचार मंत्री सुखराम शर्मा के बेटे अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा ने 2019 में मंडी से लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस का दामन थाम लिया था, इसकी वजह से उन्हें कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने शिकायत की थी कि उन्हें सरकार और पार्टी के कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं किया गया। हालांकि, जय राम ठाकुर कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद से पूर्व मंत्री काफी अलग-थलग रहने लगे और उन्होंने अब तक अपने पत्ते छुपाकर रखे हैं।

कई बार ऐसा हुआ है जब भाजपा विधायक ने सरकार पर अपने मंडी सदर चुनाव क्षेत्र के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। अनिल शर्मा के बेटे आश्रय शर्मा ने 2019 में कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा और हार गए। प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह और उनके विधायक बेटे विक्रमादित्य सिंह के साथ मतभेदों के बावजूद वह अब भी कांग्रेस में ही हैं। यह बात सभी को पता है कि कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता वीरभद्र और सुख राम अपनी राजनीतिक पारी के दौरान प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। ऐसी अटकलें हैं कि अनिल शर्मा भी कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं जिससे पिता-पुत्र की जोड़ी जिसे राजनीतिक पार्टियों ने अलग कर दिया है वो एक हो जाएं।
वहीं मंडी जिले के एक भाजपा विधायक ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, 'इस बात की पूरी संभावना है कि चुनाव नजदीक आने के साथ ही अनिल कांग्रेस में लौट आएंगे। बता दें कि अनिल शर्मा 1993 से लेकर 2012 तक कांग्रेस के विधायक रहे हैं। 2017 में उन्होंने बीजेपी ज्वाइन की थी। उधर, कांग्रेस भी पूरे महौल पर नजर गड़ाये है। कांग्रेस नेताओं का प्रयास है कि किसी तरह अनिल शर्मा चुनाव में अनुपस्थित रहें। इस बीच, पूर्व कैबिनेट मंत्री अनिल शर्मा का कहना है कि वह पार्टी के निर्देश के अनुसार अपना वोट डालेंगे। उनका दावा है कि वह बैठक में शामिल नहीं हो सके क्योंकि उन्हें इसके बारे में एक रात पहले ही सूचित किया गया था।












Click it and Unblock the Notifications