हिमाचल: केजरीवाल मॉडल के प्रचार के लिए आप ने भेजे 1360 वॉलंटियर, चुनाव से पहले संगठन ढांचा खड़ा करने की तैयारी

शिमला, 16 मई। हिमाचल प्रदेश की राजनिति में कांग्रेस हो या सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी दोनों ही दलों के पास व्यापक संगठन व समर्पित कार्यकर्ता हैं। लेकिन इस सबके बावजूद प्रदेश में हाल ही में उभरी तीसरी राजनैतिक शक्ति आम आदमी पार्टी दोनों ही पांरपरिक दलों पर भारी पड़ रही हे। यही वजह है कि चुनावी महौल में भाजपा कांग्रेस नहीं बल्कि आप की ज्यादा चर्चा हो रही है। दरअसल, हिमाचल आम आदमी पार्टी के पास इस समय कोई संगठन नहीं है। जो था, उसे भाजपा ने अपने खेमे में मिला लिया। एक के बाद एक आम आदमी पार्टी के नेताओं के दलबदल कर भाजपा में शामिल हो जाने के बाद से हिमाचल प्रदेश में अपने संगठनात्मक आधार के पुनर्निर्माण के लिए संघर्ष कर रही है। लेकिन आप इस बार नये फार्मूले के तहत अपनी पहचान प्रदेश में बनाने में जुटी है। पार्टी ने करीब 1360 वॉलंटियर के एक समूह को हिमाचल भेजा है जो गांव-गांव जा कर पार्टी की पहचान बनाने में जुटा है। यह लोग आम आदमी पार्टी के आउटरीच कार्यक्रम के तहत एक महीना प्रदेश में प्रचार करेंगे। इनके अभियान के बाद ही प्रदेश में पार्टी अपने संगठन का ढांचा खड़ा करेगी। यही नहीं दिल्ली के विधायक अजय दत्त भी मैदान में डटे हैं। व शिमला और धर्मशाला में पार्टी अपना मीडिया सेल मजबूत किया है। जो रोजाना प्रदेश के मुद्दों को उठा रहा है।

AAP sent volunteers in Himachal to tell people about Kejriwal model

आम आदमी पार्टी को पंजाब में मिले प्रचंड बहुमत के बाद पार्टी की नज़र अब हिमाचल प्रदेश व गुजरात के विधानसभा चुनावों पर है। यहां नवंबर-दिसंबर में चुनाव होने की संभावना है. आप की योजना हिमाचल की सभी 68 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की है और पार्टी ने अपनी पैठ बनाना शुरू कर दी है। आप के एक नेता ने बताया कि पार्टी की ओर से चलाये जा रहे आउटरीच कार्यक्रम में ने पार्टी वॉलंटियर को तीन प्राथमिक कार्य सौंपे गए हैं। जिनमें सबसे पहले उन्हें आप के उस शासन मॉडल से लोगों को अवगत कराना है जिसमें स्कूलों, स्वास्थ्य सुविधाओं, जलापूर्ति और कल्याणकारी योजनाओं में सुधार पर ध्यान दिया गया है। 'दूसरा, उन्हें लोगों से मिली प्रतिक्रिया को रिकॉर्ड करना है और पार्टी के आंतरिक सर्वे में मदद करनी है। और अपने तीसरे काम के रूप में वे राज्य में ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्वयंसेवकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के रूप में आप में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने वाले हैं।

AAP sent volunteers in Himachal to tell people about Kejriwal model

9 अप्रैल को आप की हिमाचल प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अनूप केसरी, संगठनात्मक महासचिव सतीश ठाकुर और ऊना इकाई के अध्यक्ष इकबाल सिंह, सत्ताधारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गए थे। जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर, दोनों इसी राज्य से है। इससे महज तीन दिन पहले आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के सीएम भगवंत मान के साथ हिमाचल प्रदेश के मंडी में रोड शो में हिस्सा लिया था। केसरी ने भाजपा में शामिल होने के दौरान कहा कि उन्हें लगता है कि आप के शीर्ष नेतृत्व ने विशेष रूप से मंडी रोड शो के दौरान उनकी अनदेखी की। केसरी के भाजपा में शामिल होने के तुरंत बाद आप नेता और दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने जानकारी दी कि पार्टी ने केसरी के खिलाफ महिला विरोधी टिप्पणी करने की शिकायतों पर उनकी सदस्यता समाप्त करने का मन बना लिया है।

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11 अप्रैल को हिमाचल में आप के पांच और वरिष्ठ पदाधिकारी अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। इसके बाद पार्टी को राज्य में अपनी सभी परिचालन इकाइयों को भंग करने और अपने संगठनात्मक ढांचे के पुनर्निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हिमाचल प्रदेश में आप के प्रभारी दुर्गेश पाठक का मानना है कि ये दलबदल राज्य में पार्टी की संभावनाओं पर ज्यादा असर नहीं डाल पाएगा। पाठक को केजरीवाल के करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता है। उन्होंने बताया, 'हमारी पार्टी विकास की राजनीति में विश्वास करती है। हम अपने संगठनात्मक आधार को फिर से खड़ा करने और अक्षम नेताओं के बिना भी चुनाव जीतने में बेहद सक्षम हैं। पाठक बताते हैं, कि इस स्तर पर हमारा उद्देश्य राज्य के कस्बों और गांवों में अपनी पहुंच बनाना, जिलों के इन क्षेत्रों में आप के शासन मॉडल का संदेश फैलाना और कस्बों व गांवों में ज्यादा से ज्यादा लोगों को कार्यकर्ता, स्वयंसेवक और समर्थकों के रूप में आप में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करना है. उसके लिए हिमाचल प्रदेश में सैकड़ों वॉलंटियर दिन-रात काम कर रहे हैं।

आउटरीच कार्यक्रम के लिए चुने गए एक हजार से ज्यादा आप स्वयंसेवक हाल ही में हिमाचल प्रदेश पहुंच चुके हैं। इन सभी ने महीने भर के लिए राज्य में डेरा डाला है। आप के वरिष्ठ नेता ने बताया, कि उन्हें छोटे-छोटे समूह में हिमाचल प्रदेश के सभी 12 जिलों के कस्बों और गांवों में घर-घर जाने का काम सौंपा गया है। आप के एक वॉलंटियर लक्ष्मीनारायण प्रसाद 21 अन्य लोगों की एक टीम के साथ किन्नौर जिले के लिए रवाना हुए थे। उन्होंने बताया कि एक महीने में बहुत काम किया जाना है. अगर आप फिलहाल की स्थिति को देखें, तो हम शुरू से शुरुआत कर रहे हैं. यह एक संकट है लेकिन हमें यकीन है कि हम इससे उबर जाएंगे। नाम न जाहिर करने की शर्त पर दिल्ली के एक वरिष्ठ आप पदाधिकारी ने कहा कि राज्य में पुराने नेताओं का जाना, हिमाचल प्रदेश में विस्तार के लिए अपने पैर फैलाने में लगी पार्टी के आठ साल के प्रयासों को एक बड़ा झटका है।

इस मोड़ पर दलबदल के बाद पार्टी को अंतिम समय में रणनीति बनाना जरूरी हो गया है। इतने कम समय में 1360 वॉलंटियर को राज्य में भेजने का निर्णय इसी रणनीति का एक हिस्सा है। आने वाले दिनों में स्वयंसेवकों का एक और जत्था इस पहाड़ी राज्य में भेजा जाएगा। आप के राष्ट्रीय विस्तार अभियान का हिस्सा रहे वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा कि दिल्ली में आप के 49 नगर पार्षदों को भी समूह में हिमाचल प्रदेश जाकर, अगले दो महीने वहां बिताने के लिए कहा गया है ताकि राज्य इकाई के पुनर्निर्माण में मदद मिल सके। यही नहीं पंजाब के विधायक गोल्डी कंबोज की डयूटी भी हिमाचल में लगी है। उन्हें कांगड़ा व उना जिला का प्रभारी बनाया गया है। मंगलवार को दिल्ली के शिक्षा मंत्री शिमला में हिमाचल की शिक्षा व्यवस्था पर लोगों से संवाद करेंगे।

प्रदेश प्रवक्ता गौरव शर्मा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है जहां मात्र तीन छात्रों पर चार चार शिक्षक नियुक्त किए गए हैं जबकि प्रदेश के 2683 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जो एक एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। ऐसा हाल प्रदेश में पहली बार देखने को मिला है जहां प्रदेश की राजधानी शिमला के साथ सटे गवाही मिडल स्कूल में मात्र तीन छात्र हैं जबकि उन्हें पढ़ाने के लिए सरकार ने चार शिक्षक नियुक्त किए हैं। यह खेल तब खेला जा रहा है जहां प्रदेश में 11083 शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों के साथ-साथ स्कूल में बच्चों की कमी भी देखने को मिल रही है। भाजपा के शासन काल में शिक्षा का स्तर इतना गिर चुका है कि यहां न तो बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ने आ रहे हैं और न ही बच्चों के अभिभावक स्कूल पढ़ने के लिए भेज रहे हैं क्योंकिं सरकार मौज मस्ती में व्यस्त है उसे प्रदेश के बच्चों के भविष्य की चिंता नहीं है।

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