Hathras Stampede: बाबा की धूल बनी जीवन की भूल, निगल गई 121 जानें, पढ़ें अबतक के बड़े अपडेट
Hathras Stampede: उत्तर प्रदेश के हाथरस में सत्संग के दौरान हुई भगदड़ में 121 लोगों की दर्दनाक मौत हुई है। मौतों का आंकड़ा कल से लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार को जब यह खबर सामने आई तो कहा जा रहा था कि तकरीबन 20 लोगों की मौत हुई है।
लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ रही है। बड़ी संख्या में घायल हुए लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जिसमे से कई की हालत गंभीर है। यह घटना हाथरस के फुलराई गांव में हुई है, जहां कथित भोले बाबा के सतसंग में हिस्सा लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।

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हालांकि इस दर्दनाक हादसे की असल वजह क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगी, लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि बहुत ज्यादा उमस की वजह से यह घटना हुई है तो कुछ का कहना है कि बाबा के पैर छूने के चक्कर में भगदड़ मची थी।
बाबा की धूल ने ले ली जान
मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह का कहना है कि प्रथम दृष्टया लगता है कि भगदड़ उस वक्त मची जब श्रद्धालु नारायण शंकर विश्व हरि यानि भोले बाबा के पैर छूकर आशीर्वाद ले रहे थे। यह एक तरह की प्रथा है, जहां बाबा का मानने वाले सतसंग के बाद पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं, इसे बाबा की धूल परंपरा कहा जाता है।
मुख्य सचिव ने संभाली कमान
मुख्य सचिव ने बताया कि बड़ी संख्या में पुलिस बल को यहां तैनात किया गया था, लेकिन लोग अचानक से भोले बाबा के पैर छूकर मिट्टी लेने की कोशिश करने लगे, जिसकी वजह से भगदड़ मच गई और पास के नाले में लोग गिर गए। हम मौके का मुआयना कर रहे हैं, जहां पर यह हादसा हुआ है।
इजाजत से अधिक लोग पहुंचे
मुख्य सचिव का कहना है कि जितने लोगों को कार्यक्रम में आने की इजाजत दी गई थी, उससे कहीं अधिक लोग यहां पर पहुंचे थे। कुछ चश्मदीदों का कहा है कि सत्संग खत्म होने के बाद श्रद्धालु बाबा की ओर भागे, ताकि वह उसे देख सके, उसके पैर छू सके, लेकिन बाबा अपनी कार से वहां से चले गए।
बारिश ने हालात किए मुश्किल
लोग उनके दर्शन करना चाहते थे, सड़क से मिट्टी उठाना चाहते थे। सतसंग खत्म होने के बाद लोग ग्रुप में वहां से जाने लगे क्योंकि वहां बारिश हो रही थी, कई लोग फिसलकर वहां गिर गए। जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है।
परिजनों को शव का इंतजार
मृतकों के शव को मंगलवार से ही अस्पताल में बर्फ की सिल्लियों पर रखा गया है। बारिश के बीच मृतकों के परिजन अस्पताल के बाहर शव लेने के लिए इंतजार करते रहे। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अबतक 116 लोगों की मौत हुई है जिसमे से 10 महिलाएं हैं, 7 बच्चे हैं।
भगदड़ ने ले ली जान
बता दें कि भगदड़ की घटना मंगलवार दोपहर 3.30 बजे की है। लोगों के शव को जिला अस्पताल में रखा गया है, कुछ को घटनास्थल के करीब ट्रामा सेंटर में रखा गया है, जबकि कुछ को एटा जिला अस्पताल भेज दिया गया।
चश्मदीदों का कहना है कि जब लोग सत्संग स्थल से बाहर जा रहे थे, उसी दौरान भगदड़ मच गई। सतसंग स्थल के बाहर सड़क बनी थी जोकि ऊंचाई पर थी और नीचे पानी था, यही वजह है कि लोग एक दूसरे के ऊपर गिर गए।
पैर छूने के चक्कर में हादसा
दूसरे चश्मदीद सोनू कुमार ने बताया कि कार्यक्रम स्थल पर तकरीबन 10 हजार लोग थे, जब बाबा वहां से जा रहे थे तो अचानक से लोग उनके पैर छूने के लिए भागे। वापस लौटते समय लोग फिसलकर एक दूसरे के ऊपर गिर गए और पास में भरे पानी के गड्ढे की वजह स्थिति विकट हो गई।












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