OPINION: औपचारिक शिक्षा से वंचित दिव्यांग बच्चों की संरक्षक बनी हरियाणा सरकार
हरियाणा सरकार की जितनी भी समाज कल्याण योजनाएं चल रही हैं, उसमें स्कूल जाने में असमर्थ दिव्यांग बच्चों की वित्तीय सहायता भी शामिल है। प्रदेश में करीब 11 हजार ऐसे बच्चे अभी इसका लाभ उठा रहे हैं।
हरियाणा सरकार प्रदेश की जनता की सामाजिक सुरक्षा के लिए हर संभव सहायता के लिए तत्पर रही है। समाज का कोई भी वर्ग ऐसा नहीं है, जिसके कल्याण पर मनोहर लाल खट्टर सरकार की नजर नहीं है। मंदबुद्धि और दिव्यांगता की वजह से अनेकों बच्चे औपचारिक शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। लेकिन, हरियाणा सरकार ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा है।
हरियाणा सरकार 18 साल तक के वैसे मंदबुद्धि और दिव्यांग बच्चों की अभिभावक बनकर खड़ी हुई है, जिनके लिए औपचारिक शिक्षा ले पाना बहुत ही मुश्किल है। ऐसे बच्चे पूरी तरह से माता-पिता और परिजनों पर आश्रित हो जाते हैं। लेकिन, कई बार आर्थिक तंगी की वजह से ऐसे परिवारों के सामने बहुत कठीन चुनौती खड़ी हो जाती है।

हरियाणा में ऐसे बच्चों को मिलती है मासिक सहायता
हरियाणा सरकार ने प्रण कर रखा है कि इन मुश्किल हालातों में न तो ऐसे मंदबुद्धि और दिव्यांग बच्चों को उनके हाल पर छोड़ेगी और न ही ऐसे माता-पिता को अपनी संतान की परवरिश के लिए अकेला छोड़ेगी। ऐसे बच्चों की सहायता के लिए हरियाणा सरकार वित्तीय सहायता देती है, जिसे 1 अप्रैल, 2023 से और बढ़ा दिया गया है।

मासिक सहायता की रकम 2150 रुपए की गई
स्कूल न जाने वाले दिव्यांग बच्चों को वित्तीय सहायता योजना के तहत पहले 1900 रुपए मासिक वित्तीय मदद दिए जाने की व्यवस्था थी। लेकिन, मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर सरकार ने अब उसे बढ़ाकर 2150 रुपए कर दिया है। चालू वित्त वर्ष में इस योजना के लिए हरियाणा सरकार ने 25 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है, जो कि पिछले वित्त वर्ष से 3 करोड़ रुपए अधिक है।

लाभार्थियों की संख्या 10,855 के पार
हरियाणा सरकार की वेबसाइट के मुताबिक 11 जून,2023 की सुबह 8 बजे तक इस योजना के लाभार्थियों की संख्या 10,855 हो चुकी है। यह सहायता परिवार के औपचारिक शिक्षा से वंचित प्रत्येक मंदबुद्धि और दिव्यांग बच्चों को दी जाती है।

किसे मिलता है योजना का लाभ
इस योजना का लाभ उनको मिलता है, जो हरियाणा के डोमिसाइल हों। मंदबुद्धि के मामले में संबंधित बच्चे की आईक्यू 50 से कम या 70% दिव्यांगता या अधिक होनी चाहिए।
अन्य दिव्यांगता में 70% या अधिक की अक्षमता, सेरेब्रल पाल्सी और ऑटिज्म को शामिल किया गया है: या 100% की ऑर्थोपीडिक दिव्यांगता हो। इनके अलावा हरियाणा सरकार ने रोहतक में एक ऐसी संस्था की स्थापना की है, जहां ऐसे अशक्त बच्चों को डे-केयर की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है और साथ ही साथ होस्टल की तरह रहने का भी इंतजाम है।
यहां इन बच्चचों को शैक्षणिक प्रशिक्षण के साथ-साथ खाने-पीने और सवास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध करवाई जाती हैं। (कुछ तस्वीरें-सांकेतिक)












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