हरियाणा: वे अस्पताल जो सरकार के S-3 पोर्टल पर नहीं, उन्हें कोरोना मरीजों के इलाज की परमिशन नहीं होगी
चंडीगढ़। कोरोना मरीजों के लिए अस्पताल एवं अन्य जरूरी इंतजामों के लिए मचे कोहराम के बीच हरियाणा सरकार का बयान आया है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि, अब ऐसा कोई भी अस्पताल, जिसे एस-3 पोर्टल पर सूचीबद्ध नहीं किया गया है, को कोरोना मरीजों का उपचार करने की अनुमति नहीं होगी। यदि ऐसे किसी अस्पताल में कोरोना मरीज पाए जाते हैं.. तो उल्लंघन करने पर अस्पताल के मालिकों के खिलाफ महामारी रोग अधिनियम-1897 के तहत आईपीसी की धारा 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

अस्पतालों के लिए जरूरी नियम
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि, अस्पतालों में पूर्व स्वीकृति के बिना कोरोना मरीजों को उपचार के लिए भर्ती करने की मनाही है। सरकार की ओर से कहा गया है कि, कानूनी ताकत का प्रयोग करते हुए पुलिस-प्रशासन द्वारा जिम्मेदारों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा-188 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्री बोले- बाहरी हैं ज्यादातर मरीज
इधर, प्रदेश के स्वास्थ्य एवं गृह मंत्री अनिल विज ने दावा किया है कि, हरियाणा में जो कोरोना मरीज बढ़ रहे हैं उनमें 70% से ज्यादा दिल्ली और पड़ोसी राज्यों से हैं। विज ने कहा कि, मैंने हरियाणा के सभी पोस्ट ग्रेजुएट और MBBS के सीनियर क्लास के छात्रों को आदेश जारी किए हैं कि वे इसमें हमारी मदद करें। मंत्री ने कहा- "हरियाणा में अभी लॉकडाउन लगाने की योजना नहीं है। हम केवल सख्ती से इस पर नियंत्रण कर रहे हैं।"

स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी कहा कि कोरोना मरीजों के इलाज के लिए हिसार व पानीपत में संचालित किए जाने वाले अस्पतालों के लिए प्रदेश के ईएसआई अस्पतालों व डिस्पेंसरियों में कार्यरत चिकित्सों व पैरा-मेडिकल स्टाफ की सेवाएं ली जाएं। इसके अलावा, संकट की इस घड़ी में आईएमए की सेवाएं लेने पर भी विचार किया जाए। इसके लिए सरकार की ओर से उन्हें मानदेय और बीमा सुरक्षा भी मुहैया करवाई जा सकती है।












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