HSKM के नेता ने कहा- लाठीजार्ज में हुई सुशील की मौत, हरियाणा सरकार दे आर्थिक सहायता राशि
HSKM के नेताओं ने वन इंडिया हिंदी से बात की उन्होंने सामूहिक तौर पर हरियाणा सरकार से शहीद किसान के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की मांग की।किसान सुशील कुमार काजल के परिजनों को 50 लाख रुपए सहायता राशि के रूप में दी जाए।
चंडीगढ़, अगस्त 30, 2021। हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा ने हरियाणा सरकार पर आरोप लगाया है कि करनाल में हुए लाठीजार्ज में सुशील काजल की मौत हुई है। हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने हरियाणा सरकार से सुशील काजल शहीद किसान के परिजनों को 50 लाख रुपए सहायता राशि देने की मांग की है।

आर्थिक सहायता राशि देने की मांग
HSKM के नेताओं ने वन इंडिया हिंदी से बात की उन्होंने सामूहिक तौर पर हरियाणा सरकार से शहीद किसान के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि बसताड़ा टोलप्लाजा पर पुलिस की बर्बरता के शिकार हुए शहीद किसान सुशील कुमार काजल के परिजनों को 50 लाख रुपए सहायता राशि के रूप में दी जाए। वहीं परिवारिक सदस्य को एक सरकारी नौकरी भी दी जाए इसके साथ गंभीर रूप से घायल किसानों के लिए सरकार की तरफ से इलाज की व्यवस्था की जाए और लाठीचार्ज में अंग भंग हुए किसानों को भी 20- 20 लाख रुपए सहायता राशि के तौर पर दिया जाए।
लाठीचार्ज के लिए हरियाणा सरकार ज़िम्मेदार
किसान नेता जगबीर घसौला ने कहा कि शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे किसानों पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज के लिए सीधे तौर पर हरियाणा सरकार ज़िम्मेदार है।
पुलिस द्वारा जो लाठीचार्ज किया गया है उसमें हरियाणा सरकार पूरी तरह से दोषी है। पुलिस प्रशासन द्वारा करवाए गए लाठीचार्ज में हताहत हुए किसानो और शहीद हुए किसान की आर्थिक मदद की ज़िम्मेदारी हरियाणा सरकार की है।
वहीं जगबीर घसौला ने हरियाणा सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अन्नदाता पर इस तरह से ज़्यादती करने से सरकरा बाज आ जाए। अगर सरकार बसताड़ा टोल प्लाजा के पीड़ित किसानों को समय पर सहायता राशि नहीं देती है तो हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में देश के अन्य संगठनों के नेताओं को एकत्रित करके किसान एक बड़ी रणनीति बनाने पर मजबूर होंगे।
HSKM के नेता भी करें सहायता
वहीं किसान नेता विकल पचार ने कहा
बसताड़ा टोलप्लाजा के पीड़ित किसानों और उनके परिजनों को हरियाणा सरकार के साथ-साथ संयुक्त किसान मोर्चा को भी अपनी तरफ से 20-20 लाख रुपए सहायता राशि के रूप में देना चाहिए।
क्योंकि हरियाणा प्रदेश और पूरे देश के किसानों और आम जनता ने चंदे के रूप में संयुक्त किसान मोर्चा को करोड़ों रुपए की राशि दान की है। इसके साथ ही विदेशों से भी किसानों की सहायता के लिए मोटे तौर पर फंडिंग की गई है। लेकिन संयुक्त किसान मोर्चा के नेता किसान आंदोलन में शहीद हुए किसान के परिवारों और हताहत हुए किसानों की मदद नहीं कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के ज्यादातर बड़े लीडर चंदे का इस्तेमाल अपने निजी कार्यों पर कर रहे हैं। पांच सितारा होटलों में ठहरने और हवाई यात्राओं के सफ़र में चंदे के पैसे का दुरुपयोग हुआ है। ये दुर्भाग्य की बात है कि आम किसानों को उस चंदे में से एक रुपये की भी मदद नहीं की गई है।
खट्टर सरकार की नाकामी
किसान नेता प्रदीप धनखड़ ने कहा
बसताड़ा टोलप्लाजा पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज के लिए सीधे तौर पर हरियाणा सरकार और ड्यूटी मजिस्ट्रेट ज़िम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने किसानों पर सीधा लाठीचार्ज करने के आदेश दिए थे। वो वीडियो भी वायरल हुई है। वीडियो के आधार पर हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से उन्होंने मांग की है कि ड्यूटी मजिस्ट्रेट को तुरंत प्रभाव से वीडियो रिकॉर्डिंग को मूल आधार मानते हुए बर्खास्त किया जाना चाहिए। ड्यूटी मजिस्ट्रेट को बर्खास्त नहीं करना खट्टर सरकार की एक बड़ी नाकामी है। जब सरकार के पास सबूत पहुंच गया है तो जांच का कोई विषय ही नहीं बनता है।
BJP और JJP का विरोध
किसान नेता डॉ शमशेर सिंह ने कहा कि हरियाणा प्रदेश में करीब 37650 किसानों पर मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और आए दिन पुलिस और किसानों के बीच तकरार होना एक आम बात बन गई है। उन्होंने कहा
हरियाणा के किसान BJP और JJP नेताओं का पुरजोर विरोध करते थे, करते हैं और करते रहेंगे।
हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से उन्होंने संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं से मांग भी की। उन्होंने कहा कि हरियाणा में जितने भी मुख्यमंत्री, मंत्री या नेता के विरोध प्रदर्शन होते हैं तो उन प्रदर्शनों का प्रतिनिधित्व संयुक्त किसान मोर्चा के 9 मेंबर कमेटी के 5 सदस्यों करें ताकि हरियाणा में किसानों पर दर्ज हो रहे अनाप-शनाप मुकदमो पर कंट्रोल किया जा सके। संयुक्त किसान मोर्चा के किसान नेताओं के प्रतिनिधित्व में अगर विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे तो आम किसान पुलिस की प्रताड़ना का शिकार नहीं हो पाएंगे। किसान और पुलिस प्रशासन के बीच में टकराव की स्थिति भी पैदा नहीं होगी।












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