Haryana result: कांग्रेस-AAP में गठबंधन से क्या BJP को मिलता पूर्ण बहुमत? किसे होता नुकसान? चौंका देंगे आंकड़े
Haryana result 2024: हरियाणा में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद विपक्षी इंडिया ब्लॉक से इस तरह की दलीलें दी जा रही हैं कि अगर वहां कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में सीटों का तालमेज हो जाता तो नतीजे अलग हो सकते थे। लेकिन, अगर हरियाणा के मतदाताओं के जनादेश का सूक्ष्म विश्लेषण करें तो यह महज एक राजनीतिक धारणा है। असल में दोनों दलों के बीच गठबंधन होने पर भी बीजेपी अपने दम पर सरकार बना सकती थी।
लोकसभा चुनावों के बाद जिस तरह से विपक्षी इंडिया ब्लॉक उत्साहित था, हरियाणा विधानसभा चुनावों के परिणाम ने उन्हें फिर से बैकफुट पर ला दिया है। गठबंधन की सभी पार्टियां कांग्रेस पर यह कहकर निशाना साध रही हैं कि उसके 'अहंकार' ने बीजेपी की 'हार' को जीत में बदलने का काम कर दिया।

कांग्रेस-आप गठबंधन से भी बीजेपी को मिलता पूर्ण बहुमत
लेकिन, अगर हम हरियाणा विधानसभा की 90 सीटों पर पड़े वोटों का गुणा गणित करें तो कम से कम इसका अंकगणित इंडिया ब्लॉक के दावों पर पानी फेर रहा है। जी हां, आंकड़े यही बता रहे हैं कि अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी मिलकर भी चुनाव लड़ती तो भी बीजेपी अपने दम पर दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल हो जाती।
गठबंधन होने पर कांग्रेस-आप को होता सिर्फ 3 सीटों का फायदा
हरियाणा की 90 सीटों में कांग्रेस को सिर्फ 37 सीटों पर जीत मिली है। बाकी 53 सीटों पर जहां कांग्रेस-आप हारी हैं, उनमें से सिर्फ 3 ही सीटें ऐसी हैं, जहां जीतने वाली पार्टी के वोटों का मार्जिन आम आदमी पार्टी (AAP) को मिले वोटों से कम है।
हम यहां उस स्थिति को मानकर चल रहे हैं, जब आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन होने पर एक-दूसरे में अपने वोटों का सौ फीसदी ट्रांसफर करवा पाते। जबकि, चुनावी राजनीति में ऐसी आदर्श स्थिति होना दुर्लभ ही माना जाता है।
बीजेपी को 48 की जगह 47 सीटें मिलती
मतलब, हमारा विश्लेषण इस नतीजे पर पहुंचा है कि अगर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी हरियाणा में मिलकर भी चुनाव लड़ती तो इस गठबंधन को अधिकतम 40 सीटें ही मिल सकती थीं। लेकिन, इससे भी बीजेपी के बहुमत पर कोई फर्क नहीं पड़ता। क्योंकि, उसे सिर्फ 1 ही सीट का नुकसान होता और वह 48 की जगह 47 पर जीतती, जितनी उसे 2014 में मिली थी।
कांग्रेस-आप गठबंधन से दोनों सीटें हार जाती आईएनएलडी
कांग्रेस-आप गठबंधन से सबसे ज्यादा नुकसान आईएनएलडी को हो सकता था, जिसे मिली दोनों ही सीटें उसके हाथों से निकल सकती थीं। अब आप खुद आंकड़े देखिए, जिससे यह तथ्य सामने आ रहा है कि इंडिया ब्लॉक जो गठबंधन नहीं होने का रोना रो रहा है, उसका हकीकत से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।
बीजेपी को सिर्फ असंध सीट का होता नुकसान
दरअसल, कांग्रेस-आप में गठबंधन होने से सिर्फ बीजेपी को करनाल की असंध सीट का ही नुकसान हो सकता था। यहां बीजेपी के प्रत्याशी ने कांग्रेस उम्मीदवार को सिर्फ 2,306 वोटों के अंतर से हराया है और आप के उम्मीदवार को 4,290 वोट मिले हैं।
डबवाली और रनिया जीत सकता था कांग्रेस-आप गठबंधन
इनके अलावा डबवाली और रनिया में भी आप-कांग्रेस गठबंधन को जीत मिल सकती थी। लेकिन, यह दोनों ही सीटें बीजेपी को नहीं, अभय चौटाला की आईएनएलडी को मिली हैं। डबवाली में आईएनएलडी कांग्रेस से सिर्फ 610 वोटों से जीती है। जबकि यहां आप प्रत्याशी को 6,606 वोट मिले हैं।
इसी तरह से रनिया में आईएनएलडी उम्मीदवार का कांग्रेस प्रत्याशी से जीत का अंतर 4,191 रहा है और आम आदमी पार्टी को 4,697 वोट प्राप्त हुए हैं।
मतलब, आंकड़े यही गवाही दे रहे हैं कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच तालमेल हो जाने पर आदर्श स्थिति में भी इस गठबंधन को सिर्फ 3 सीटों का ही फायदा होने वाला था और भाजपा की मात्र एक सीट घट सकती थी।












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