Haryana: 2024 से पहले भाजपा-कांग्रेस में ब्राह्मणों को लुभाने की होड़, जानिए क्या है वजह?

Haryana Brahmin politics: हरियाणा में 2024 लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस-बीजेपी ब्राह्मणों को लुभाने की कोशिशों में जुटा हुआ है। दोनों की दलों में ब्राह्मण वोटों को रिझाने के लिए मुकाबला चल रहा है। बीजेपी जहां अपनी रणनीति के जरिए तीसरी बार सत्ता हासिल करने की कोशिश में में है तो दूसरी तरह कांग्रेस सरकार में वापसी की जुगत में लग रही है।

ऐसे में जिस राज्य हरियाणा में जहां अब तक जाटों के इर्द-गिर्द राजनीति होती थी, वहां अब यह मुड़कर ब्राह्मणों की तरफ जाने लगी है। जिसके लिए दोनों ही दल ब्राह्मण वोटर को लुभाने में जुट गए हैं।

 Haryana News

हरियणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने सोमवार को कैथल में एक मेडिकल कॉलेज का नाम ब्राह्मण प्रतीक परशुराम के नाम पर रखा और 11 दिसंबर को अपने गृह क्षेत्र करनाल में दूसरे ब्राह्मण महाकुंभ के आयोजन की घोषणा की। यह आयोजन पहली बार पिछले साल इसी दिन करनाल में आयोजित किया गया था।

इस साल अप्रैल में सीएम ने परशुराम के नाम पर एक डाक टिकट जारी किया था और राज्य में परशुराम जयंती पर राजपत्रित अवकाश घोषित किया था।

इधर, पिछले हफ्ते रोहतक में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विपक्ष के नेता, दो बार के सीएम और जाट दिग्गज नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने वादा किया कि अगर कांग्रेस 2024 में सत्ता में आती है तो चार डिप्टी सीएम में से एक ब्राह्मण समाज से होगा।

जानिए क्यों है खास?

दरअसल, जाट बहुल हरियाणा में ब्राह्मण राज्य की आबादी का लगभग 12 प्रतिशत हैं। इस समाज के वोटर करीब 12 विधानसभा सीटों के नतीजे प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। यही नहीं तीन लोकसभा सीटों पर भी इनका दबदबा है।

इतना ही नहीं 2014 के विधानसभा चुनावों में जब बीजेपी ने 90 सीटों में से 47 जीतकर पहली बार बहुमत का आंकड़े पाया तो पार्टी के स्टेट चीफ राम बिलास शर्मा एक ब्राह्मण नेता के तौर पर सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे थे। हालांकि, बीजेपी हाईकमान ने सभी को चौंकाते हुए पंजाबी नेता खट्टर को सीएम पद के चुना। इसके बाद 2019 के चुनाव में राम बिलास अपनी सीट हार गए।

हरियाणा के पहले सीएम कांग्रेस के भगवत दयाल शर्मा एक ब्राह्मण थे और 1 नवंबर, 1966 को हरियाणा के गठन के बाद से समुदाय से सीएम बनने वाले एकमात्र व्यक्ति थे। हालांकि कुछ ही महीनों के बाद उनकी जगह राव बीरेंद्र सिंह ने ले ली।

वरिष्ठ भाजपा नेता ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि बीजेपी ने कभी भी जाति की राजनीति नहीं की है, लेकिन परंपरागत रूप से जाट हरियाणा में बीजेपी को वोट नहीं देते रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य में हरियाणा में शीर्ष जाट नेताओं के तीन गुट हैं कांग्रेस के भूपेंदर सिंह हुड्डा, आईएनएलडी के ओम प्रकाश चौटाला और अभय चौटाला और जेजेपी के दुष्यंत चौटाला। एक नजरिया है कि जाट वोट तीन पार्टियों के तीन जाट गुटों में बंटने की संभावना है। यही एक कारण है कि भाजपा बनिया और पंजाबी समुदायों के अलावा ब्राह्मण मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रही है।

बीजेपी के इस कदम से बीजेपी के अंदर ब्राह्मण नेताओं की आकांक्षाएं भी बढ़ गई हैं। पिछले साल मई में एक रैली में भाजपा के रोहतक सांसद अरविंद शर्मा ने ब्राह्मण सीएम की जोरदार वकालत की थी। इधर,
भाजपा के राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ब्राह्मण महाकुंभ के लिए बड़े पैमाने पर लामबंदी के लिए हरियाणा का दौरा कर रहे हैं। जिसके लिए वह अब तक करनाल, पानीपत, काइंड, कैथल, चरखी दादरी, झज्जर, भिवानी, अंबाला और गुड़गांव का दौरा कर चुके हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+