80 पार हुईं संतोष दादी, भाला फेंककर जीतीं गोल्ड, बोलीं- रोज 10 बादाम, देसी घी का चूरमा खाती हूं
भिवानी। ये हैं संतोष देवी। उम्र 80 साल के पार। मगर, शरीर में स्फूर्ति नव-युवाओं जैसी। हाल में इन्होंने नेशनल मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 2 गोल्ड और 1 सिल्वर मेडल जीता। उम्रदराज होने पर भी इस हद तक कामयाब हुईं, इससे इलाके में इनका मान-सम्मान और बढ़ गया है।

युवा भी शर्मा जाएं, ऐसी हैं ये दादी
बता दें कि, संतोष देवी हरियाणा के पानीपत में इसराना के पास गांव कारद की रहने वाली हैं। फिलहाल वह अपने बेटे तहसीलदार रविंद्र मलिक के साथ भिवानी में रहती हैं। यहां लोग जब इनके बारे में ये सुनते हैं कि दादी ने 80 वर्ष से ज्यादा के आयुवर्ग में खेलते हुए 100 मीटर दौड़ में गोल्ड, 200 मीटर दौड़ में गोल्ड और जेवलिन थ्रो में सिल्वर मेडल जीता है, तो कई लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं।

हमें देसी घी का खाना पसंद है
संतोष देवी कहती हैं कि, हमारे जमाने में लोग घी-दूध, दलिया, दाल-चूरमा ही खाते थे। जीने-खाने को जो नए-नए उत्पाद अब मिलते हैं, तब नहीं होते थे। मुझे आज भी चूरमा सबसे ज्यादा पसंद है। हमने खाने में तेल-रिफांइड कभी नहीं डाला। हम तो देसी घी से बना खाना ही खाते हैं। यहां तक कि, मैं फल भी घर के पेड़ों से ही खाती हूं।

रोज 2-2 घंटे अभ्यास करती हैं
संतोष देवी के पोते ने बताया कि, दादी रूटीन प्रैक्टिस करती हैं। वह सुबह-शाम 2-2 घंटे प्रैक्टिस करती हैं। उन्हें भाला फेंकना अच्छा लगता है। उन्हें अपने सभी काम खुद करना पसंद है।












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