Gurugram की सोसाइटी में लिफ्ट से निकलते ही बवाल, 7 मिनट की देरी पर ऑपरेटर को पीटा, आंख गंवाई? AIIMS रेफर

Gurugram News, Lift Operator Assault: हरियाणा के गुरुग्राम से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक आवासीय सोसाइटी में लिफ्ट खराब होने के बाद विवाद इतना बढ़ गया कि लिफ्ट ऑपरेटर को गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। आरोप है कि कुछ युवकों ने लिफ्ट में कुछ मिनट फंसे रहने के बाद गुस्से में आकर ऑपरेटर पर डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में ऑपरेटर की आंख बुरी तरह घायल हो गई और उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

घटना ने न केवल सोसाइटी के निवासियों को झकझोर दिया है, बल्कि यह भी सवाल खड़े कर दिए हैं कि छोटी तकनीकी समस्या कैसे हिंसक झड़प में बदल गई। मामले में पुलिस जांच कर रही है, जबकि पीड़ित के सहयोगियों ने आरोप लगाया है कि शिकायत दिए जाने के बावजूद अब तक औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। आइए विस्तार से समझें...

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क्या है पूरा मामला?

यह घटना गुरुग्राम के सेक्टर-93 स्थित सिग्नेचर ऑर्चर्ड सोसाइटी की है। जानकारी के अनुसार 9 जून को सोसाइटी के एल टावर की एक लिफ्ट में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। उस समय चार युवक लिफ्ट के अंदर मौजूद थे।

लिफ्ट रुक जाने के कारण चारों युवक कुछ समय के लिए अंदर फंस गए। पुलिस के मुताबिक वे करीब सात मिनट तक लिफ्ट के भीतर रहे। हालांकि यह समय बहुत लंबा नहीं था, लेकिन बंद जगह में फंसने के कारण युवकों में घबराहट और नाराजगी बढ़ गई।

सोसाइटी में मौजूद लोगों के अनुसार लिफ्ट रुकने के बाद कंट्रोल रूम को सूचना दी गई और तकनीकी टीम को अलर्ट किया गया। इसी दौरान लिफ्ट ऑपरेटर गौरव को भी मौके पर बुलाया गया।

ऑपरेटर के पहुंचने से पहले ही चलने लगी लिफ्ट

पुलिस के अनुसार जैसे ही लिफ्ट ऑपरेटर गौरव समस्या को ठीक करने के लिए वहां पहुंच रहे थे, उसी दौरान लिफ्ट स्वतः सामान्य हो गई। कुछ ही क्षण बाद लिफ्ट ग्राउंड फ्लोर पर पहुंची और उसके दरवाजे खुल गए।

लिफ्ट से बाहर निकलने के बाद अंदर मौजूद युवक बेहद नाराज बताए गए। आरोप है कि उन्होंने बाहर आते ही लिफ्ट ऑपरेटर को अपशब्द कहने शुरू कर दिए और अपनी नाराजगी जाहिर की।

स्थिति बिगड़ती देख गौरव वहां से हटकर सुरक्षित स्थान की ओर चले गए। लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ।

दो और लोगों को बुलाने का आरोप

पुलिस के मुताबिक लिफ्ट से बाहर निकले युवकों ने बाद में अपने दो अन्य साथियों को भी बुला लिया। इसके बाद कुल छह लोगों का समूह कथित रूप से गौरव की तलाश में पहुंचा।

आरोप है कि उन्होंने गौरव को रोककर पहले बहस की और फिर डंडों तथा अन्य वस्तुओं से हमला कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमला काफी आक्रामक था और गौरव को बचने का ज्यादा मौका नहीं मिला।

घटना के दौरान आसपास मौजूद कुछ लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक गौरव गंभीर रूप से घायल हो चुके थे।

हमले में गंभीर चोटें आईं

पुलिस और स्थानीय लोगों के अनुसार हमले में गौरव को सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें लगीं। सबसे ज्यादा चोट उनकी आंख के पास आई, जिससे काफी खून बहने लगा।

घटना के बाद सोसाइटी के निवासियों और कर्मचारियों ने उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रेफर कर दिया। फिलहाल उनका इलाज जारी है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

आंख की रोशनी जाने का दावा

सोसाइटी की मेंटेनेंस एजेंसी से जुड़े कर्मचारी चंदन सिंह ने दावा किया है कि हमले में गौरव की एक आंख की रोशनी स्थायी रूप से प्रभावित हुई है।

हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। डॉक्टरों की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आंख को कितना नुकसान पहुंचा है और उसकी स्थिति क्या है।

फिर भी, सहयोगियों और कर्मचारियों का कहना है कि चोट बेहद गंभीर है और इससे गौरव को लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

हमले के बाद आरोपी फरार

घटना के बाद कथित आरोपी सोसाइटी परिसर छोड़कर चले गए। पुलिस का कहना है कि उनकी पहचान की जा रही है और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है।

सोसाइटी के निवासियों का कहना है कि ऐसी घटनाएं आवासीय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं। लोगों का मानना है कि किसी तकनीकी खराबी के लिए सीधे कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहराकर हिंसा करना बेहद चिंताजनक है। कर्मचारियों में भी घटना के बाद डर का माहौल बताया जा रहा है।

एफआईआर को लेकर उठे सवाल

मेंटेनेंस एजेंसी के कर्मचारी चंदन सिंह का कहना है कि घटना के दिन ही पुलिस चौकी में लिखित शिकायत दी गई थी। उनका आरोप है कि शिकायत के बावजूद अब तक औपचारिक मामला दर्ज नहीं किया गया।

इस दावे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच जारी है और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस अधिकारियों का पक्ष

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि घायल व्यक्ति की हालत अभी पूरी तरह सामान्य नहीं है। उनके अनुसार पीड़ित अभी विस्तृत बयान देने की स्थिति में नहीं है।

अधिकारी ने बताया कि पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जैसे ही आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होगी, कानून के अनुसार उचित कदम उठाए जाएंगे।

क्या कहते हैं ऐसे मामलों के विशेषज्ञ?

सुरक्षा और आवासीय प्रबंधन से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि लिफ्ट में फंसना निश्चित रूप से तनावपूर्ण अनुभव हो सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में संयम बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि आधुनिक लिफ्टों में कई सुरक्षा तंत्र होते हैं और अधिकांश तकनीकी खराबियां कुछ मिनटों के भीतर दूर कर ली जाती हैं। ऐसे में कर्मचारियों या तकनीकी स्टाफ पर हमला करना न केवल गैरकानूनी है बल्कि इससे समस्या का समाधान भी नहीं होता।

उनका कहना है कि सोसाइटी प्रबंधन को भी समय-समय पर लिफ्टों की तकनीकी जांच और निवासियों को सुरक्षा संबंधी जागरूकता देने पर ध्यान देना चाहिए।

घटना ने उठाए कई सवाल

गुरुग्राम की यह घटना केवल एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह समाज में बढ़ती असहिष्णुता और गुस्से की प्रवृत्ति को भी उजागर करती है। कुछ मिनट की तकनीकी परेशानी के बाद हिंसक प्रतिक्रिया देना इस बात की ओर संकेत करता है कि विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की संस्कृति कमजोर पड़ रही है।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और मेडिकल रिपोर्ट पर है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में कार्रवाई हो सकती है। वहीं पीड़ित के स्वास्थ्य को लेकर भी लोगों में चिंता बनी हुई है।

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