नक्सली हमले में शहीद हुए खुर्शीद अहमद का पार्थिव शरीर पहुंचा पैतृक गांव, नम आंखों से ग्रामीणों ने दी अंतिम विदाई

नूंह। असम के नक्सल प्रभावित इलाके में पेट्रोलिंग के दौरान शहीद हुए बीएसएफ हवलदार खुर्शीद अहमद का पार्थिव शरीर मंगलवार को देर शाम उनके पैतृक गांव रायपुर पहुंचा। जहां बीएसएफ के जवानों ने सलामी दी और पूरे राजकीय सम्मान के साथ शहीद को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस दौरान डीएसपी अशोक कुमार अपने पुलिस जवानों के साथ गांव में मौजूद रहे।

bsf martyr jawan Khurshid Ahmed funeral in his Raipur village

जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर बीएसएफ के जवानों द्वारा रायपुर गांव में लाया गया, तो पूरी गांव में शोक की लहर दौड़ गई। शहीद का शव पहुंचने की खबर जैसे ही ग्रामीणों व इलाके के लोगों को लगी तो रायपुर गांव में भारी भीड़ जुट गई। शहीद का शव पहुंचा तो शुरुआत में वे कुछ बातों को लेकर नाराज दिखे और शहादत पर ही उन्होंने सवाल खड़े कर दिए। हालांकि कुछ पूर्व सैनिकों वे गणमान्य लोगों के समझाने के बाद मामला शांत हो गया और शहीद को अंतिम विदाई देने की प्रक्रिया शुरू हो गई।

जानकारी के मुताबिक यह घटना असम जिले के सिलचर इलाके के आसपास गत 14 अक्टूबर को उस समय घटी जब बीएसएफ के 3 जवान एनआरसी ड्यूटी के लिए पेट्रोलिंग कर रहे थे। उसी दौरान नक्सलियों की गोली ने खुर्शीद अहमद की जान ले ली। परिजनों को जैसे ही बीएसएफ के जवानों ने घटना की जानकारी दी तो उनके पैरों तले की जमीन निकल गई।

बीएसएफ के एएसआई मंगल मशीह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि 14 अक्टूबर को पेट्रोलिंग के दौरान खुर्शीद अहमद की शहादत हुई, जब दुश्मन की गोली ने उन्हें लहूलुहान कर दिया। उन्होंने बताया कि शहीद खुर्शीद अहमद के पार्थिव शरीर को पहले सिलचर लाया गया। उसके बाद कोलकाता लाया गया, फिर हवाई जहाज से दिल्ली एयरपोर्ट पर लाया गया। जहां फ्लाइट कई घंटे देरी से पहुंची और जैसे ही शहीद का शव एयरपोर्ट पर आया तो बीएसएफ के जवानों ने उसे सलामी देते हुए उनके पैतृक गांव रायपुर का रुख कर लिया।

बीएसएफ और पुलिस के अधिकारियों का काफिला जब खुर्शीद अहमद के पार्थिव शरीर को लेकर रायपुर गांव पहुंचा तो लोगों की आंखों से आंसू गिरने लगे। गांव के लोग ही नहीं बल्कि उनके साथ करीब 2 साल तक नौकरी करने वाले पूर्व सैनिक भी उन्हें याद कर गमगीन हो उठे। आपको बता दें की नूह जिले के पुनहाना खंड के गांव रायपुर में जन्मे खुर्शीद अहमद 1989 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे। तीन भाइयों में खुर्शीद अहमद अकेले सरकारी सेवा में कार्यरत है खुर्शीद अहमद दो बच्चों के पिता थे और अपने परिवार के साथ कई सालों से दिल्ली में रह रहे थे। खुर्शीद अहमद कि जिस तरह से शहादत हुई उस पर पूरे गांव के लोगों को गर्व है।

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