Haryana Election: क्या सच में हरियाणा में फंस गई भाजपा, आखिर क्यों शहरी वोटर्स रहे दूर?

Haryana Assembly Election 2024: हरियाणा में विधानसभा चुनाव के बाद जिस तरह से तमाम एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आए हैं, वो निसंदेह कांग्रेस के लिए हौसला बढ़ाने वाला है। एग्जिट पोल्स की मानें तो हरियाणा में एक दशक की भाजपा सरकार का अंत होने जा रहा है। कांग्रेस यहां भाजपा की जीत की हैट्रिक को रोकती नजर आ रही है।

सी-वोटर एग्जिट पोल के आंकड़े पर नजर डालें तो कांग्रेस को हरियाणा की 90 में से 50-58 सीटों पर जीत मिलती नजर आ रही है जबकि भाजपा सिर्फ 20-28 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।

haryana election

आखिर हरियाणा में ऐसा क्या हुआ जिसके चलते भाजपा को इतना भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और लोगों की नाराजगी देखनी पड़ रही है, यह सवाल हर किसी के मन में है।

10 साल से सत्ता में भाजपा

सबसे अहम बात यह है कि भाजपा की प्रदेश में पिछले 10 वर्षों से सरकार है, लिहाजा सरकार के खिलाफ कुछ हदतक लोगों में एंटी-इन्केंबेंसी यानि सरकार के खिलाफ अंसतोष एक बड़ी वजह है।

यही वजह है कि भाजपा ने मार्च माह में प्रदेश में बदलाव करते हुए मुख्यमंत्री को बदल दिया और मनोहर लाल खट्टर की जगह नायब सिंह सैनी को कमान सौंप दी गई।

बेरोजगारी का मुद्दा

प्रदेश में चुनाव के दौरान एक बड़ा मुद्दा बेरोजगारी का रहा है। हरियाणा में 2021-22 में बेरोजगारी दर तकरीबन 9 फीसदी रही है, जोकि राष्ट्रीय औसत 4.1 से दोगुने से भी अधिक है। प्रदेश सरकार ने दो लाख नौकरियां देने का अपने मैनिफेस्टो में वादा किया, लेकिन इसके बावजूद सिर्फ 1.84 लाख लोगों को ही रोजगार दे सकी।

हालांकि भाजपा ने दावा किया है कि भर्ती की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और योग्यता के आधार पर है, लेकिन कांग्रेस ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया है।

हरियाणा पब्लिक सर्विस कमीशन के ऑफिस से तीन करोड़ रुपए बरामद किए गए थे, जिसकी वजह से 47 प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द कराना पड़ा था, जिसकी वजह से भाजपा की छवि को काफी नुकसान पहुंचा था।

शहरी वोटर्स ने बनाई दूरी

इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में भी पार्टी को नुकसान होता दिख रहा है। सामान्य तौर पर भाजपा शहरी क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करती है। लेकिन इस बार बड़ी संख्या में शहरी मतदाताओं ने वोटिंग से दूरी बनाई। तकरीबन 2 करोड़ शहरी वोटर् में से सिर्फ एक करोड़ वोटर्स ही इस बार मतदान केंद्र पहुंचे।

मनोहर लाल खट्टर ई-गवर्नेंस सुधार की लगातार वकालत करते रहे, जिसका लक्ष्य भ्रष्टाचार को कम करना और सेवाओं को निर्बाध लोगों तक पहुंचाना था, लेकिन बड़ी संख्या में यह लोगों की मदद करने में विफल रही।

कई ऑनलाइन पोर्टल, जैसे परिवार पहचान पत्र, मेरी फसल-मेरा ब्योरा की शुरुआत हुई, लेकिन लोगों को इसका इस्तेमाल करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जिसके चलते लोग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले सके।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+