Gwalior एयरबेस पर मिलेगी नीलगायों के आतंक से मुक्ति, अफ्रीकन बोमा तकनीकी से पड़कर कूनो में किए जाएंगे शिफ्ट
Gwalior News:
Gwalior News: मध्य प्रदेश के ग्वालियर महाराजपुरा एयरबेस पर इन दिनों नीलगाय की चहलकदमी लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान परेशानी का सबब बन गई है। 200 से ज्यादा नीलगाय महाराजपुरा क्षेत्र में है। इसलिए आए दिन हादसों की आशंका बनी रहती है। महाराजपुरा एयरबेस पहाड़ी क्षेत्र है। जंगल से लगा इलाका होने के कारण यहां नीलगाय आए दिन आते रहते हैं। ये नीलगाय कभी कभार ये एयरफोर्स की बाउंड्री को पार करके भी अंदर तक आ जाती हैं। डीएफओ अंकित पांडेय के अनुसार समस्या के निराकरण के लिए वन विभाग की कोशिशें जारी हैं।
हादसों की आशंका के कारण अब वन विभाग इन्हें शिफ्ट करने के लिए प्लान तैयार किया है। इसके तहत उन्हें भविष्य में कूनो अभ्यारण्य में भी छोड़ा जा सकता है। वन विभाग इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। इसके लिए चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन से परमिशन लेने के बाद कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग इसके लिए अमेरिकन बोमा तकनीक से नीलगाय पकड़ने की रणनीति बना रहा है। इसमें एक्सपर्ट और वन विभाग के अधिकारी मिलकर कार्य करेंगे।

नीलगायों की समस्या को लेकर वन विभाग, एयरफोर्स और जिला प्रशासन के अधिकारी पूर्व में कई महत्वपूर्ण मीटिंग कर चुके हैं। इसी दौरान एक रणनीति तैयार की गई है। इसमें नीलगायों को मारने का सुझाव भी शामिल था। बैठक के बाद अब वन विभाग की ओर से यह प्रस्ताव राज्य शासन की ओर भेजा गया है। लेकिन अभी तक हरी झंडी नहीं मिली है। हाल ही में एयरफोर्स के अधिकारियों के साथ वन विभाग की फिर मीटिंग हुई। इसमें जिला प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हुए। इसके बाद नीलगायों के कारण आने वाली समस्या को लेकर एक प्लान तैयार किया गया है।
कूनो डीएफओ पीके वर्मा के अनुसार ग्वालियर कूनो में पहले से 2 से 3 हजार नीलगाय हैं। यहां और नीलगाय छोड़ी जातीं हैं तो कोई समस्या नहीं है। चीतों को नीलगाय से कोई खतरा की आशंका नहीं है।












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