MP News: ग्वालियर के इस मंदिर में 200 जवानों की सुरक्षा, 100 करोड़ के गहनों से होता है राधा कृष्ण का श्रृंगार
Janmashtami 2023: मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि जेवरात में मोतियों की जगह हीरे, पुखराज,पन्ना और माणिकनीलम लगे हैं।
Janmashtami 2023: ग्वालियर के सिंधिया राजवंश के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के दिन भगवान राधाकृष्ण 100 करोड़ के जेवरातों से सजेंगे। राधाकृष्ण मंदिर में भारी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। बेशकीमती जेवरातों से सजे भगवान राधाकृष्ण के दर्शन के लिए एक लाख से अधिक दर्शनार्थी फूलबाग स्थित गोपाल मंदिर पहुंचेंगे। मंदिर में भगवान राधाकृष्ण की प्रतिमाएं सिंधिया राजवंश के जमाने की है और मंदिर भी सिंधिया राजवंश ने ही बनवाया था।
सिंधिया रियासत के समय के इन गहनों में सोना, हीरा, नीलम, पन्ना, माणिक और पुखराज जैसे बेशकीमती रत्न जड़े हैं। इन जेवरातों की कीमत आज की तारीख में 100 करोड रुपये से ज्यादा है। जन्माष्टमी के दिन बैंक से कड़ी सुरक्षा के बीच इसे लाया जाता है। मंदिर परिसर में जूलरी के रहने तक यहां ग्वालियर पुलिस के 200 ज्यादा जवान व अफसर तैनात किए जाते हैं।

इस वर्ष भी गोपाल मंदिर को सजाने का काम शुरू हो गया है। रात 12 बजे से भगवना के दिव्य रूप का दर्शन करने दर्शनार्थी यहां पर पहुंचने लगे हैं। सुरक्षा के लिहाज से श्रद्धालुओं को गर्भ गृह तक नहीं जाने दिया जाता है। भगवान के इस रूप को देखने के लिए दर्शनार्थी पूरे 1 वर्ष तक इंतजार करते हैं। बेशकीमती गहनों की चमक को देखकर श्रद्धालुओं की नजरें नहीं हटती हैं।
ग्वालियर स्थित इस गोपाल मंदिर की स्थापना करीब 102 साल पहले सिंधिया घराने ने ही कराई थी। इसके साथ ही भगवान के श्रृंगार के लिए बेशकीमती जूलरी बनवाए थे। आजादी से पहले मंदिर सिंधिया राजघराने के पास ही था। आजादी के बाद सिंधिया परिवार ने मंदिर और इसके गहने को भारत सरकार के हवाले कर दिया। इसके बाद नगर निगम इन गहनों को बैंक के लॉकर में रखवा दिया है।
कई वर्षों तक इन ज्वेलरी के बारे में किसी कोई जानकारी नहीं थी। 2007 में नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त पवन शर्मा को इस संपत्ति के बारे में खबर मिली। इसके बाद उन्होंने इन गहनों के बारे में जानकारी इकट्ठा की। तभी से लगातार हर जन्माष्टमी पर यह गहनों से भगवान राधा-कृष्ण सजते हैं।
सोना-चांदी, राधा-कृष्ण दोनों के मुकुट में हीरे के साथ ही पदम, पन्ना जड़े हैं।माता राधा के सात लड़ी के हार में पन्ना, हीरे और माणिक जड़े हुए हैं। राधा-कृष्ण के हार में बेशकीमती नीलम, पुखराज, पन्ना, माणिक लगे हैं। कृष्ण की बांसूरी सोने की है और उस पर भी हीरे लगे हैं। पूरे गहने सोने के हैं और उनमें हीरे,माणिक, नीलम, पुखराज, मोती, पन्ना, ऐसे लगे हैं जैसे आकाश में तारे चमक रहे हों।












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