एमपी: सिंधिया ने निकाली तलवार और टूट पड़े सरदार, मच गई लूट
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किया शमी पूजन, तलवार निकाल कर शमी के वृक्ष को किया स्पर्श, मराठा सरदारों ने लूटीं शमी की पत्तियां, 200 साल पुरानी है शमी पूजन की परंपरा
ग्वालियर, 5 अक्टूबर। शाही पोशाक पहने हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जैसे ही अपनी म्यान से तलवार निकाली तो वहां मौजूद मराठा सरदार अलर्ट हो गए। जैसे ही सिंधिया ने अपनी तलवार से शमी के पत्तों के स्पर्श किया तो मराठा सरदार शमी की पत्तियां लूटने के लिए टूट पड़े। मराठा सरदारों के बीच शमी की पत्तियां लूटने के लिए भगदड़ मच गई। यह पूरा नजारा सिंधिया घराने की उस 200 साल पुरानी परंपरा का है जिसे आज भी उतने ही महत्व के साथ निभाया जाता है।

सिंधिया घराने द्वारा किया जाता है शमी पूजन
सिंधिया घराने द्वारा हर साल दशहरे के दिन शमी पूजन किया जाता है। यह शमी पूजन माढ़रे की माता मंदिर के सामने स्थित मैदान में किया जाता है। यहां पर सिंधिया घराने के मुखिया द्वारा शमी के वृक्ष की पूजा की जाती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए दशहरे के दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया शमी पूजन के लिए मांढरे की माता मंदिर पर पहुंचे।
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बेटे महाआर्यमन के साथ मिलकर की शमी पूजा
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी शाही पोशाक पहने हुए माढ़रे की माता मंदिर पर पहुंचे। उनके साथ उनके बेटे महाआर्यमन सिंधिया भी शाही पोशाक में अपने पिता के साथ चल रहे थे। माढ़रे की माता के मंदिर के सामने स्थित मैदान में पहुंचकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शमी के वृक्ष की पूजा की। सिंधिया घराने के राजपुरोहित ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को पूरे विधि विधान के साथ शमी पूजन करवाया।

सिंधिया ने निकाली म्यान से तलवार और शमी की पत्तियों को किया स्पर्श
शमी पूजन करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खड़े होकर अपने म्यान से तलवार निकाल ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के आसपास मौजूद मराठा सरदार अलर्ट हो गए। सिंधिया ने अपनी तलवार म्यान से बाहर निकाली और जैसे ही शमी की पत्तियों को स्पर्श किया, वैसे ही मराठा सरदार और उनके वंशज पत्तियों को लूटने के लिए टूट पड़े।

भगदड़ के बीच एक दूसरे को देते रहे टक्कर
पत्तियां लूटने के लिए मराठा सरदारों में भगदड़ मच गई। भगदड़ के बीच शमी की पत्तियां लूट रहे मराठा सरदार एक दूसरे को धकेलते हुए भी नजर आए। हर मराठा सरदार ज्यादा से ज्यादा शमी की पत्तियां लूटना का प्रयास करता हुआ नजर आया। दो सौ साल से सिंधिया राजवंश के मुखिया द्वारा यह पूजा की जाती रही है।

शमी की पत्तियों को कहा जाता है सोने की पत्तियां
पुरानी परंपरा के अनुसार शमी की पत्तियों को सोने की पत्तियां कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि सिंधिया घराने के मुखिया द्वारा शमी की पत्तियां को तलवार लगाने के बाद जो भी इन शमी की पत्तियों को लूट लेता है उसके घर धन की कभी कमी नहीं रहती है। यही वजह है कि मराठा सरदार और सिंधिया घराने के करीबी माने जाने वाले लोग इन सोने की पत्तियों को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं।












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