गड्ढों से मिलेगी राहत, सिंधिया की पहल से चेतकपुरी-झांसी रोड के पुनर्निर्माण को मिली 3 करोड़ की सौगात

MP News Jyotiraditya Scindia: ग्वालियर के नागरिकों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। वर्षों से "गड्ढों वाली चेतकपुरी रोड" के नाम से बदनाम हो चुके मार्ग को अब नई पहचान मिलने जा रही है और इसके पीछे हैं ग्वालियर के सांसद एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, जिनकी पहल पर 3 करोड़ रुपये की सांसद निधि स्वीकृत की गई है।

यह राशि नगर निगम के खाते में ट्रांसफर हो चुकी है और निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होने की तैयारी में है।

Jyotiraditya Scindia initiative gives gift of Rs 3 crore for Chetakpuri-Jhansi road construction mp

कभी 'चेतकपुरी रोड' थी, अब 'चेतकपुरी रोमांच' बन चुकी थी

जो लोग चेतकपुरी-झांसी रोड से गुजरते हैं, उन्हें हर कुछ मीटर पर ऐसा लगता था जैसे सड़क नहीं, कोई ऑफ-रोडिंग ट्रैक है। कभी बाइक की चेन निकलती थी, तो कभी कार का साइलेंसर टूटता था। बारिश के मौसम में तो यह मार्ग "गड्ढों में सड़क या सड़क में गड्ढे?" वाली पहेली बन जाता था। इस मार्ग की जर्जर हालत से ग्वालियर के नागरिक लंबे समय से त्रस्त थे। और अब जाकर उन्हें मिली है राहत की सांस।

Jyotiraditya Scindia: केंद्रीय मंत्री सिंधिया की सीधी पहल, कोई फ़ाइल दौड़ नहीं

सिंधिया को जब इस सड़क की हालत की जानकारी मिली, तब वो नागर विमानन मंत्री थे। लेकिन उन्होंने यह नहीं देखा कि यह मामला उनके मंत्रालय का है या नहीं - उन्होंने सीधे ग्वालियर के कलेक्टर को पत्र लिखा, और MP-LAD (सांसद निधि) के तहत इस मार्ग को दुरुस्त कराने की सिफारिश की।

फिर क्या था, प्रशासन की मशीनरी भी गति में आई। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को पत्र भेजा गया और 3 करोड़ की राशि स्वीकृत कर नगर निगम के खाते में भेज दी गई। अब नगर निगम ने आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है - ठेकेदार को भुगतान होते ही निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।

कैसी है ये सड़क और क्यों है ये अहम?

यह सड़क कुलदीप नर्सरी से शुरू होकर चेतकपुरी, झांसी रोड, और लक्ष्मीबाई प्रतिमा तक जाती है, और स्वर्ण रेखा नदी मार्ग से जुड़ती है। यह क्षेत्र:

  • ग्वालियर के शैक्षणिक और आवासीय हब में आता है
  • रोज़ाना हज़ारों वाहन इसी मार्ग से गुजरते हैं
  • स्कूली बच्चों, बुज़ुर्गों और ऑफिस जाने वालों के लिए यह सड़क जीवन रेखा है

Jyotiraditya Scindia: सिर्फ सड़क नहीं, यह है भरोसे की मरम्मत

ग्वालियर के लोगों ने सोशल मीडिया से लेकर जनप्रतिनिधियों तक बार-बार गुहार लगाई थी कि "गड्ढे तो भरवा दीजिए।" लेकिन यह एक अस्थायी इलाज होता। सिंधिया ने इसे स्थायी समाधान की दिशा में बदला। इस कदम ने ना सिर्फ एक सड़क को नया जीवन दिया, बल्कि सांसद निधि के उपयोग की सार्थकता भी दिखा दी। अक्सर लोग सवाल करते हैं कि सांसद निधि कहां जाती है - इस बार जवाब है: "आपके मोहल्ले की सड़क पर!"

जनता की जुबानी: अब झटके नहीं, शुक्रिया चाहिए

स्थानीय निवासी रीना सक्सेना, जो रोज़ इसी मार्ग से अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने जाती हैं, बताती हैं: "अब तक तो लगता था जैसे स्कूल से पहले बच्चे रेसिंग ट्रैक पर भेजे जा रहे हैं। लेकिन सिंधिया जी की पहल से हमें उम्मीद है कि अब बच्चों की सेहत और हमारी गाड़ियों की जेब दोनों सुरक्षित रहेंगी।"

वहीं ऑटो चालक रामेश्वर यादव कहते हैं:

"सड़क में इतने गड्ढे थे कि लगता था ऑटो खुद गड्ढे मांग रहा है। अब अगर सड़क बन जाए तो पेट्रोल बचेगा और सवारी भी खुश रहेगी।"

सिंधिया की विकास यात्रा में एक और पड़ाव

ग्वालियर-चंबल अंचल के समग्र विकास के लिए सिंधिया की लगातार सक्रियता कोई नई बात नहीं है। हाल के वर्षों में एयरपोर्ट, रेलवे, मेडिकल कॉलेज और शहर की सड़कों तक सिंधिया ने 'गति और गरिमा' दोनों दी हैं। इस सड़क निर्माण की पहल एक और उदाहरण है कि कैसे सांसद निधि का उपयोग जनता के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने के लिए किया जा सकता है।

अंत में सवाल नहीं, सिर्फ उम्मीद

अब जबकि पैसा आ चुका है, टेंडर और भुगतान प्रक्रिया चालू है, तो नागरिकों को कुछ दिन का इंतजार करना होगा। लेकिन इस बार ये इंतजार 'उम्मीद की आवाजाही' का है, गड्ढों की मार का नहीं। क्योंकि जब नेता पहल करे, पैसा समय पर आए, और काम ईमानदारी से हो - तो जनता की सड़क सीधी और सियासत पारदर्शी होती है।

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