कुलपति की जान बचाने जज की कार ले जाने वाले ABVP के छात्र नेता सात दिन बाद जेल से हुए रिहा, समर्थकों में जश्न

संवाद सूत्र- पंकज श्रीमाली

Gwalior News: बीमार बुजुर्ग को रेलवे स्टेशन से जज की कार छीनकर ले जाने के कारण डकैती के केस में गिरफ्तार करने के बहुचर्चित केस में जेल भेजे गए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दो छात्रों को बीती रात जेल से रिहा किया गया।

इस घटना के खिलाफ ABVP ने पूरे प्रदेश में आंदोलन किया था जबकि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने मामले की जांच सीआईडी को सौंपने के आदेश दिए थे और हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद छात्रों की सेंट्रल जेल से रिहाई हुई है।

ABVP student leader who took judge car released from jail after seven days, supporters celebrate

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दो छात्रों हिमांशु श्रोत्रिय और सुकृत शर्मा को पड़ाव थाना पुलिस ने हाईकोर्ट जज की गाड़ी छीनने के आरोप में दर्ज किए गए डकैती के केस में पड़ाव थाना पुलिस ने बीते 12 दिसम्बर को गिरफ्तार करके जेल भेजा था। इसके बाद जिला न्यायालय द्वारा उनकी जमानत निरस्त करने के बाद से वे ग्वालियर की सेंट्रल जेल में बन्द थे। इनको हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से 18 दिसंबर को मानवीय आधार पर जमानत मिल गयी लेकिन औपचारिकताओं के चलते इनकी रिहाई देर रात को हो सकी।

सेंट्रल जेल के बाहर ही कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दोनों छात्रों की रिहाई पर सेंट्रल जेल के बाहर ही कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाया.देर रात हुई रिहाई के वक्त सेंट्रल जेल के बाहर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जेल परिसर के बाहर जुट गए थे। जैसे ही हिमांशु और सुकृत बाहर निकले उनके साथियों ने नारे लगाते हुए उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और फिर फूल मालाओं से लाद दिया । इसके बाद नारेवाजी करते हुए उन्हें उनके घर तक लेकर गए.

यह था पूरा मामला

दस दिसम्बर को दिल्ली अधिवेशन से परिषद के नेता दक्षिण एक्सप्रेस से ग्वालियर लौट रहे थे तभी ट्रैन में यात्रा कर रहे एक बुजुर्ग की तबियत बिगड़ने लगी। छात्रों ने धौलपुर रेलवे स्टेशन पर उनके लिए चिकित्सकीय मदद मांगी लेकिन वहां नही मिली लेकिन आश्वासन दिया गया कि ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर सूचना भेजी है। वहां एम्बुलेंस मिल जाएगी। छात्रों का कहना है कि ग्वालियर पहुंचने तक बीमार की हालत और बिगड़ चुकी थी। स्टेशन पर उन्होंने उतार लिया और रेलवे अधिकारियों और जीआरपी से मदद मांगी लेकिन जब काफी देर तक एम्बुलेंस नही आई तो छात्र बीमार को लेकर स्टेशन के बाहर आ गए। बीमार को पोर्च में खड़ी कार में लिटा दिया लेकिन कार के चालक ने चलने से इंकार कर दिया तो छात्रों ने उसे हटाकर खुद गाड़ी चलाते हुए पेशेंट को असप्ताल पहुंचाया लेकिन बीमार को बचाया नही जा सका . मृतक की पहचान पीके विवि शिवपुरी के कुलपति रणजीत सिंह यादव के रूप में हुई।

पुलिस ने दर्ज किया डकैती का केस

स्टेशन से छात्र जिस कार को लेकर गए थे, वह एक हाईकोर्ट जज की थी। इस कार को जबरन छीनकर ले जाने की सूचना से पुलिस में हड़कंप मच गया। चालक की रिपोर्ट पर अज्ञात लोगों के खिलाफ डकैती का केस दर्ज कर लिया गया। सर्चिंग में कार जेएएच हॉस्पीटल कैम्पस में खड़ी मिल गई। मौके से पुलिस ने विद्यार्थी परिषद के हिमांशु और सुकृत नामक दो पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया और इन्हें जेल भेज दिया। इसके बाद परिषद ने आंदोलन शुरू कर दिया कि मानव सेवा और किसी की जान बचाने के प्रयास के बदले छात्रों को डकैत बना दिया।

घटना विद्यार्थी परिषद से जुड़ी होने के कारण पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर छात्रों की मदद की गुहार लगाई फिर मध्यप्रदेश के नव नियुक्त मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस घटना की जांच सीआईडी को सौंपने के आदेश जारी किए। डॉ यादव खुद भी विद्यार्थी परिषद के माध्यम से ही बीजेपी में आए हैं।

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