'भारत के सिवाय किसी और देश में होता तो कोरोना मुक्त नहीं हुआ होता, खुद CM देते थे मुझे दिलासा'

वडोदरा। कोरोना वायरस को मात देकर हॉस्पिटल से लौटे वडोदरा के मरीज चिराग पंडित ने कहा है कि, मैं भारत के सिवाय किसी और देश में होता तो कोरोना मुक्त नहीं हुआ होता। हमारे देश में डॉक्टरों ने जिस तरह मुझे बचाया, मैंने स्वस्थ होकर घर लौटने की कल्पना भी नहीं की थी। मैं स्वस्थ हुआ, इसका श्रेय डॉक्टर्स को दूंगा। डॉक्टर्स ने ही मुझे नया जीवन दिया। खुद मुख्यमंत्री विजय रूपाणी दिलासा देते थे। वीडियो कॉल कर उन्होंने मुझे कहा कि, घबराना नहीं। सब ठीक हो जाएगा।

स्पेन से चिराग पंडित कोरोना संक्रमित होकर लौटे थे

स्पेन से चिराग पंडित कोरोना संक्रमित होकर लौटे थे

बता दें कि, चिराग पंडित स्पेन गए थे। वहीं उन्हें कोरोना वायरस ने जकड़ा। जब वह भारत लौटे तो उन्हें अचानक 17 मार्च को सरदर्द शुरू हो गया। बुखार भी बढ़ने लगा। वह कुछ देर बाद ही डॉक्टर से मिले। जहां चेकिंग हुई। फिर मुझे पता चला कि रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मैं बहुत घबरा गया। क्योंकि, ये ही जानता था कि रोग नया है और इलाज के रास्ते सीमित हैं। हॉस्पिटल में डॉक्टर्स नियमित रूप से इंजेक्शन लगाते थे। कितने इंजेक्शन लगे, ये भी नहीं जानता। डॉक्टर्स अपना काम कर रहे थे। मुझे बहुत ज्यादा सर्दी-खांसी नहीं थी। पर बुखार चैन नहीं लेने देता था। डॉक्टरों की कोशिश से धीरे-धीरे बुखार कम होने लगा।''

बचाने के लिए डॉक्टर-नर्सेां ने पूरी ताकत झोंकी

बचाने के लिए डॉक्टर-नर्सेां ने पूरी ताकत झोंकी

''अस्पताल का स्टाफ पूरी तरह से सजग होकर तैनात था। कई दिनों तक लगातार इलाज के बाद डॉक्टर्स ने एक दिन कहा कि, सीएम विजय रूपाणी आपसे बात करना चाहते हैं। मैंने देखा कि, मुख्यमंत्री साहब वीडियो कॉलिंग में मेरे सामने थे। उन्होंने कहा- चिराग भाई, घबराना मत, तुम्हारे साथ पूरी सरकार है। डॉक्टर्स इलाज में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे। सीएम के इन शब्दों ने मुझ पर जादू कर दिया। मन ही मन तय कर लिया कि अब तो कोरोना को हराना ही है।''

खुद मुख्यमंत्री ने दी थी दिलासा कि कुछ नहीं होगा

खुद मुख्यमंत्री ने दी थी दिलासा कि कुछ नहीं होगा

चिराग ने कहा, ''शुरुआत में दो-तीन दिन घर के लोगों से, फिर सोसायटी में पड़ोसियों से बात की थी। उसके पहले स्पेन में पत्नी और बच्चों से भी बात की थी। उन्होंने भी मुझे हिम्मत बंधाई। इधर, हॉस्पिटल में केवल डॉक्टर्स-नर्स ही नहीं, बल्कि सफाईकर्मी भी पूरी तरह से लैस होकर मास्क में ही मेरे सामने आते। उनकी इन कोशिशों को देखकर मैं भीतर से मजबूत होने लगा। पहला टेस्ट निगेटिव आया, तब आशा बंधी। तब तक शरीर से बुखार अलविदा कह चुका था।''

दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई, तब मेरी जान में जान आई

दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आई, तब मेरी जान में जान आई

''इधर, धीरे-धीरे इंजेक्शन-दवाओं का डोज कम होता गया। दूसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आई। मानसिक रूप से पहले से मजबूत हो गया। एक दिन जिला कलेक्टर ने मुझसे वीडियो कालिंग से बात की। फिर दोस्तों से बात की। मैं स्वस्थ हो गया, इसका श्रेय पहले तो डॉक्टर्स-नर्स और सरकार को जाता है। मुझे नहीं लगता कि भारत के अलावा और किसी देश में इस तरह से समर्पण के साथ इलाज होता होगा।''

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