गुजरात: कोरोना से 13 साल की लड़की की मौत के बाद कोई छूने को तैयार नहीं हुआ, 22 घंटे बाद हो सकी अंत्येष्टि
वडोदरा। गुजरात के वडोरदा में कोरोना वायरस से संक्रमित एक 13 साल की किशोरी की मौत हो गई। किशोरी का टेस्ट जब पॉजिटिव आया तो उसके कुछ ही समय बाद उसकी जान चली गई। बीते रोज 5 बजे उसने दम तोड़ा, लेकिन उसका 22 घंटे तक दाह संस्कार नहीं हो सका। कोई उसकी लाश के पास नहीं फटका। काफी समय बाद पुलिस-प्रशासन ने उसका अंतिम संस्कार कराया।

कोई भी लाश के पास नहीं आया, अंतिम संस्कार तो दूर की बात
संवादाता के अनुसार, सरकारी गाइडलाइन है कि कोरोना से मौत के मामले में किसी मरीज का तत्काल अंतिम संस्कार होना चाहिए। मगर, इस बच्ची के शव को कोई छूने को तैयार नहीं था। ऐसे में उसका आज 3 बजे यानी कि, 22 घंटे बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया। बता दें कि, वह किशोरी प्रतापनगर की रहने वाली थी। कल दोपहर उसकी कोरोना की वजह से मौत हुई थी।

..आखिर में 22 घंटे बाद ले गए उसे श्मशान
उसके बाद कॉर्पोरेशन द्वारा भी उसे श्मशान ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। ना ही कोई कर्मचारी इस काम के लिए आगे आए। इसी कारण सुबह तक लाश अस्पताल के कोल्डरूम में पड़ी रही। इतना ही नहीं वाहन एवं लोग मिलने के बाद पुलिस और अस्पताल की कार्रवाई में जरूरत से काफी ज्यादा समय बर्बाद हुआ। सुबह मृतका के परिजनों और कॉर्पोरेशन के कर्मचारियों में विवाद हुआ। आखिरकार दोपहर को फायर विभाग की एंबुलेंस का ड्राइवर और एटेंडेन्ट मृतदेह को श्मशान ले गए।

परिजन नहीं देख सके बच्ची का मुंह
वहां काम करने वाले लोगों का भी लाश ले जाने को लेकर एंबुलेंस कर्मचारियों से विवाद हुआ। बाद में एम्ब्युलेंस और श्मशान के दो-दो कर्मीयो द्वारा मृतदेह को चिता तक पहुंचाया गया और करीब 22 घंटे बाद अग्नि दी गई। मृतका के चाचा ने बताया कि, अंतिम विधि में देरी होने का कारण प्रशासन की लापरवाही ही है। क्योंकि अस्पताल में कोई मासूम के मृतदेह को छूने तैयार नहीं था। श्मशान जाने के लिए कोई वाहन भी तंत्र नहीं ला सका और जब यह सब उपलब्ध हुआ तो कागजी कार्रवाई में भी कई घंटे बर्बाद किए गए थे। बहरहाल, मृतका के माता-पिता समेत परिजन क्वांरटाइन होने के कारण आखिरी समय मासूम का चेहरा तक नहीं देख सके थे।












Click it and Unblock the Notifications