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पार्थीभाई चौधरी: वो पुलिसवाला जिनके लिए आलू बने 'सोना', सालाना कमाई 3.3 करोड़, तोड़ा विश्व रिकॉर्ड

नई दिल्ली। गुजरात के बनास कांठा जिले की दांतीवाड़ा तहसील में चार हजार से अधिक आबादी का एक गांव है डांगिया। यहां के पार्थीभाई जेठाभाई चौधरी वो रिटायर पुलिसवाले हैं, जिनके लिए आलू 'सोना' बना हुआ है। यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि पार्थीभाई की मेहनत और लीक से हटकर खेती करने की सोच का नतीजा है। पार्थीभाई आलू उत्पादन के मामले में देश के बड़े किसानों में से एक हैं।

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    Parthi bhai Chaudhary: जिनके लिए आलू बने 'सोना', सालाना कमाई 3.3 करोड़ | वनइंडिया हिंदी
    पार्थीभाई चौधरी बनासकांठा का साक्षात्कार

    पार्थीभाई चौधरी बनासकांठा का साक्षात्कार

    वन इंडिया हिंदी से खास बातचीत में पार्थी भाई चौधरी ने गुजरात पुलिस में एसआई से डीएसपी तक का सफर और इसी दौरान आलू की खेती की दिशा में कदम बढ़ाने तथा वर्तमान में सालाना 3.3 करोड़ रुपए के टर्न ओवर तक पहुंचने के साथ-साथ आलू उत्पादन में विश्व रिकॉर्ड तक बना डालने की पूरी कहानी बयां की।

     कौन हैं पार्थी भाई चौधरी

    कौन हैं पार्थी भाई चौधरी

    63 वर्षीय पार्थी भाई चौधरी गुजरात के गांव डांगिया के किसान जेठाभाई चौधरी के बेटे हैं। पांच भाइयों में दूसरे नंबर के हैं। गुजरात में आलू की खेती करने वाले प्रगतिशील किसान हैं। इससे पहले वर्ष 1981 में पार्थी भाई गुजरात पुलिस में एसआई पद पर भर्ती हुए थे। वर्ष 2015 में मेहसाणा एसीबी में डीएसपी पद से रिटायर हुए हैं।

     क्यों आया आलू की खेती का विचार?

    क्यों आया आलू की खेती का विचार?

    पार्थीभाई बताते हैं कि लम्बे समय से गुजरात पुलिस में कार्यरत थे। सब कुछ ठीक चल रहा था। पिता जेठाभाई परम्परागत खेती मसलन गेहूं, बाजरा आदि की खेती किया करते थे। वर्ष 2003 में जेठाभाई ने अपने पांचों बेटे में जमीन का बंटवारा कर दिया। सब भाई अपने-अपने हिसाब से खेती करने लगे। इस दौरान पार्थीभाई के मन में लीक से हटकर खेती करने का विचार आया। प्रगतिशील किसानों के खेतों पर जाकर उनसे आधुनिक खेती के गुर सीखने लगे। फिर आलू की खेती पर आकर तलाश पूरी हुई।

     वर्ष 2004 में शुरू की आलू की खेती

    वर्ष 2004 में शुरू की आलू की खेती

    वर्ष 2004 में पार्थीभाई पुलिस की नौकरी करते रहे और शनिवार-रविवार की छुट्टियों में घर आते तो आलू की खेती पर काम करते। खुद की पांच एकड़ जमीन पर आलू की खेती करना शुरू किया। फिर आस-पास की जमीन भी खरीदते गए। वर्तमान में ये 87 एकड़ में आलू की खेती कर रहे हैं। अब तो देश के विभिन्न हिस्सों से किसान आलू की खेती की तकनीक जानने के लिए इनके खेत पर आते रहते हैं।

     आठ नलकूप से सिंचाई, 16 परिवार कर रहे मजदूरी

    आठ नलकूप से सिंचाई, 16 परिवार कर रहे मजदूरी

    पार्थीभाई कहते हैं कि पूरे खेत में आठ नलकूप खुदवा रखे हैं, जो स्प्रिंकलर सिस्टम से जुड़े हुए हैं। खेत की देखभाल और निराई, गुड़ाई व कटाई के लिए 16 परिवारों को मजदूरी पर रखा हुआ है। नवंबर की शुरुआत में आलू की बुवाई करते हैं। चार माह में पौधों के नीचे आलू पड़ जाते हैं, जिनकी 15 मार्च त​क खुदाई पूरी कर लेते हैं। अप्रेल से नवम्बर के बीच आलू के अलावा बाजरा, तरबूज व मूंगफली की फसल लेते हैं।

     बनासकांठा आलू की खेती का हब

    बनासकांठा आलू की खेती का हब

    पार्थी भाई की मानें तो गुजरात का बनासकांठा भारत में आलू की खेती का हब है। देशभर में छह फीसदी आलू का उत्पादन बनासकांठा में ही होता है। यहां करीब 1 लाख किसान आलू की खेती कर रहे हैं। खास बात है कि बनासकांठा में सिर्फ बड़े पैमाने पर आलू का उत्पादन होता है जबकि इससे जुड़ी यूनिट पड़ोसी जिलों में लगी हैं।

     बनासकांठा में 300 कोल्ड स्टोरेज

    बनासकांठा में 300 कोल्ड स्टोरेज

    पूरे बनासकांठा में आलू का बड़े पैनामे पर उत्पादन होने के कारण यहां पर तीन सौ निजी कोल्ड स्टोरेज बने हुए हैं, जिनमें आलू को स्टोर करके रखा जाता है। यहीं से मेहसाना स्थित मैक्केन फूड्स इंडिया यूनिट, हाइफन फूड यूनिट, बालाजी वेफर्स राजकोट व वापी की यूनिट में आलू जाते हैं, ​जिनके चिप्स व अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। इस तरह के आलू की क्वालिटी को प्रोसेसिंग कहा जाता है। इसके अलावा यहां सब्जी में काम आने वाले आलू की भी खेती होती है। वो टेबल क्वालिटी के नाम से जाने जाते हैं।

     आलू की खेती के 'मास्टर' कैसे बने पार्थीभाई?

    आलू की खेती के 'मास्टर' कैसे बने पार्थीभाई?

    पार्थी भाई कहते हैं कि उन्हें आलू की खेती में महारथ रातों-रात हासिल नहीं हुई। इसके पीछे मैक्केन फूड्स इंडिया प्रा. लि. के कृषि विशेषज्ञ गोपाल दास शर्मा, देवेंद्र जी की सीख का नतीजा है। आलू की खेती के शुरुआती दिनों में मार्केटिंग के सिलसिले में पार्थी भाई गोपाल दास और देवेंद्रजी के सम्पर्क में आए थे। इन्होंने आलू की बुवाई से लेकर नाइट्रोजन, पोटास व अन्य कीटनाशकों के इस्तेमाल की बारीकियां सिखाई। नतीजा यह रहा कि पार्थी भाई आलू की खेती के मास्टर बन गए।

    नीदरलैंड का रिकॉर्ड तोड़ डाला

    नीदरलैंड का रिकॉर्ड तोड़ डाला

    प्रति हैक्टेयर सर्वाधिक आलू उत्पादन का विश्व रिकॉर्ड पार्थी भाई के नाम है। इससे पहले नीदरलैंड के एक किसान ने प्रति हैक्टेयर 54 मैट्रिक टन आलू उगाकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। फिर पार्थी ने प्रति हैक्टेयर 87 मैट्रिक टन आलू का उत्पादन कर वर्ष 2011-12 में यह विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। उस वक्त बनासकांठा जिला कलेक्टर आरजे पटेल और कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर महेश्वरी की देखरेख में विश्व रिकॉर्ड के लिए कई टीमों ने पार्थी के खेत का दौरा किया था। विश्व रिकॉर्ड के बाद पार्थी भाई को फ़ोर्ब्स की सूची में भी जगह मिली थी।

    पार्थी भाई चौधरी का परिवार व कमाई

    पार्थी भाई चौधरी का परिवार व कमाई

    गुजरात के पुलिस अधिकारी से प्रगतिशील किसान बने पार्थी भाई की पत्नी मणि बेन हाउस वाइफ हैं। बड़ा बेटा कुलदीप चौधरी एमडी रेडियोलॉजिस्ट हैं। वर्तमान में पालनपुर में कार्यरत हैं। छोटा बेटा राकेश अहमदाबाद से पढ़ाई कर रहा है। प्रति एकड़ 15 से 17 टन आलू पैदा हो रहे हैं। शुरुआत में कमाई तीस लाख तक हो जाती थी। तब आलू के भाव पांच रुपए थे। वर्तमान में आलू 22 रुपए प्रति किलो के भाव से जा रहा है। उत्पादन 15 लाख किलो आलू तक पहुंच गया। ऐसे में सालाना टर्न ओवर 3.3 करोड़ तक पहुंच चुका है। इनमें से 50 से 60 लाख रुपए खर्च हो जाते हैं। शेष बचत है।

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