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Naroda Gam massacre case: जानें क्‍या था नरोदा दंगा केस, जिसमें पूर्व भाजपा मंत्री समेत सभी आरोपी हुए बरी

Naroda Gam massacre case में गुजरात की कोर्ट ने सभ आरोपियों को बरी कर दिया है। आइए जानते हैं क्‍या था ये 2002 का ये केस, जिसका जजमेंट आने में बीस साल से अधिक समय लग गया

Naroda Gam massacre case, 2002 Naroda Gam massacre case

अहमदाबाद की एक विशेष अदालत ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 2002 के नदौरा गाम नरसंहार केस के सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। कोर्ट ने इस संप्रदायिक दंगे की आरोपी भाजपा की पूर्व मंत्री माया कोडनानी और बजरंग दल के के पूर्व नेता बाबू बजरंगी और विश्व हिंदू परिषद के नेता जयदीप पटेल सहित सभी 69 आरोपियों को बरी कर दिया है। याद रहे 86 लोगों पर ये केस चल रहा था और इतने सालों में इनमें से 18 की मौत भी हो चुकी है।

gujrat case

विशेष न्यायाधीश शुभदा बक्शी ने गुजारा कोर्ट में गुरुवार को जब ये फैसला सुनाया तो कोर्ट के बाहर खड़े आरोपियों के रिश्तेदारों ने "जय श्री राम" और "भारत माता की जय" के नारों के साथ उनका स्वागत किया। आइए जातने हैं क्‍या था ये केस?

गोधरा कांड के एक दिन बाद जानें नरोदा में क्‍या हुआ था?

27 फरवरी, 2002 को गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगने के बाद गुजरात में हुए नौ बड़े दंगों में नरोदा गाम केस भी एक था। 28 फरवरी 2002 को गुजरात के अहमदाबाद के नारोदा गाम क्षेत्र में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। अहमदाबाद के नरोदा गाम क्षेत्र में मुस्लिम महोल्ला, कुंभार वास नाम के क्षेत्र में भीड़ द्वारा उनके घरों में आग लगाने के बाद 11 मुसलमानों को जलाकर मार डाला गया था। नरोदा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी।

गोधरा नरसंहार के बाद हुआ था ये नारोदा कांड

ये घटना गोधरा कांड के एक दिन बाद हुई थी याद रहे गोधरा में ट्रेन में आग लगाए जाने की घटना जिसमे 58 हिंदुओं की हत्‍या कर दी गई थी उसके एक दिन बाद विरोध में अहमदाबाद में किए गए बंद के दौरान ये सांप्रदायिक हिंसा हुई थी।

फैसला आने में लग गया 20 साल

इस घटना के बाद इस केस में कई आदेश हुए। ट्रायल कई अदालतों को दिए गए थेऔर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निगरानी की जा रही थी इसके बावजूद नरोदा गाम मामले को फैसले तक पहुंचने में सालों लग गए।

69 अभियुक्त जमानत पर बाहर थे

2002 के गुजरात दंगा मामलों के फॉस्‍ट ट्रायल के लिए गठित विशेष रूप से नामित अदालत ने 5 अप्रैल को कार्यवाही समाप्त कर दी थी। मामले के 86 अभियुक्तों में से 18 की मौत मुकदमे के दौरान हो गई। जिससे 69 अभियुक्तों के खिलाफ ये केस चला। सभी आरोपी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। मामले में करीब 182 गवाहों का परीक्षण कराया गया जिसके बाद ये फैसला सुनाया गया।

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