गुजरात: लंपी वायरस से हजारों गायों की मौत, यहां अब लोग रख रहे उपवास, 3 दिन पानी भी ना पिएंगे

सोमनाथ। गुजरात-राजस्‍थान और पंजाब राज्‍यों समेत देश के कई हिस्‍सों में जानलेवा लम्पी वायरस फैल चुका है। इससे दुधारू पशुओं खासकर गायों की जान जा रही है। बीते महीनेभर में लाखों गायें अकाल मौत मर चुकी हैं। अकेले गुजरात में ही हजारों गायें गांठदार त्‍वचा रोग ने तड़पा-तड़पाकर मार डालीं। सरकार कहीं वैक्‍सीन लगवा भी रही है, हालांकि, अधिकतर स्‍थानों पर पशुपालक सरकारी प्रयासों को नाकाफी बता रहे हैं। कई जिलों में तो नगर निगम की टीमें बस मारे गए पशुओं की लाशें उठवाने ही पहुंची।

लंपी वायरस का प्रकोप, पशुपालकों में बेबसी

लंपी वायरस का प्रकोप, पशुपालकों में बेबसी

गौवंश के इस कदर दम तोड़ने की घटनाओं से पशुपालकों का दिल दहल उठा है। पशुपालकों में कोहराम मचा हुआ है। कुछ जगहों पर असहाय पशुपालक अब सिर्फ भगवान भरोसे हैं। वे दुआ मांग रहे हैं अपनी गायों को बचाने की। इसी क्रम में सोमनाथ के तीर्थस्थल पर लोग बड़ी संख्‍या में जुटे और उन्‍होंने गौ सेवा के लिए लोगों ने गौरी रात्रि उपवास किया। सोमनाथ में सोमपुरा ब्रह्म समाज की एक महिला ने कहा, 'लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप इस कदर फैल रहा है कि सभी पशुपालक बेबस हैं। सरकार से उन्‍हें वो मदद नहीं मिली, जो मिलनी चाहिए थी। अब गौ-भक्त अपने-अपने तरीके से रोग से निपटने में जुटे हैं।'

17 दंपतियों ने गौत्री रात्रि का व्रत किया

17 दंपतियों ने गौत्री रात्रि का व्रत किया

सोमनाथ में मंदिर के एक पुजारी ने कहा कि, भक्‍तजन अब उपवास कर रहे हैं। यहां प्राचीन काल से गौत्रीरात्रि व्रत आयोजित होता रहा है...अब इस वर्ष गौ वंश की रक्षा के लिए भक्‍तों ने यह व्रत फिर से शुरू किया है। मवेशियों को लम्पी वायरस से बचाने के लिए 17 दंपतियों ने गौत्री रात्रि का व्रत किया। सत्यनारायण कथा और सुंदरकांड के पाठ का भी आयोजन किया गया। वे तीन दिनों तक पानी भी नहीं पिए।'
पुजारी ने कहा कि, यह उपवास एक तपस्‍या की तरह है..इसलिए इसका फल मिलता है। इस व्रत को करने वाले तीन दिन तक पानी भी नहीं पी सकते। पारंपरिक गौरी व्रत तीर्थ पुरोहित समाज द्वारा सोमनाथ में किया जाता है, जो भादरवा सूद तेरस से पूनम तक किया जाता है।'

पानी पीना भी मना है इस उपवास में

पानी पीना भी मना है इस उपवास में

पुजारी ने कहा, ''इस व्रत को करने वाले को फलहार भी खाने-पीने की मनाही होती है। यहां तक ​​कि पानी पीना भी मना है। इन तीन दिनों में बछड़े के साथ गौ माता की सेवा की जाती है। गौ माता को जौ खिलाया जाता है और जब जौ गोबर में निकल आता है तो जौ को जल से धोकर उसका पानी पीकर व्रत का पारणा करते हैं।'
वहीं एक महिला जो उपवास रख रही थी, उसने कहा कि यह सच है कि इस व्रत को करने वाले को लगातार तीन दिनों तक बछड़े के साथ गाय की पूजा करनी होती है। यह व्रत पूरे राज्य में केवल प्रभास पाटन सोमनाथ में ही किया जाता है।'

बछड़े के साथ करते हैं गाय की पूजा

बछड़े के साथ करते हैं गाय की पूजा

मान्यता है कि इस व्रत को करने से निःसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत को करने वाले व्यक्ति के पारिवारिक सुख, धन और इच्छाओं की पूर्ति करने वाला माना जाता है। इसमें बछड़े के साथ गाय की पूजा करनी होती है और उन्हें घास, पानी, हरा चारा आदि खिलाया जाता है। अब गौवंश को रोग से बचाने के लिए भी उपवास रखा जा रहा है।

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