Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Chunav Parinam Analysis: नरेंद्र मोदी का स्ट्राइक रेट इंदिरा गांधी से भी बेहतर

गुजरात चुनाव में जहां भाजपा ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ कर बड़ी जीत दर्ज की है, तो हिमाचल प्रदेश चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है।

Gujarat and himachal elections results 2022 bjp narendra Modi strike rate better than congress Indira Gandhi

Chunav Parinam Analysis: भाजपा ने गुजरात में रिकॉर्डतोड़ जीत हासिल की। हिमाचल प्रदेश का चुनाव हार गयी। एमसीडी का चुनाव हार गयी। लेकिन बिहार के कुढ़नी और उत्तर प्रदेश के रामपुर उपचुनाव में भाजपा ने विरोधी दलों से सीटें छीन लीं। मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव हार गयी। इन चुनाव परिणामों का क्या अर्थ निकाला जाय ? अगर समग्र रूप से देखें तो भाजपा का चुनावी प्रदर्शन ज्यादा प्रभावकारी है। वह कैसे ? राजनीतिक पंडितों का कहना है कि नरेन्द्र मोदी की जीत का स्ट्राइक रेट इंदिरा गांधी से भी अधिक है। इंदिरा गांधी ने कांग्रेस को जितने चुनाव जिताये उससे अधिक नरेन्द्र मोदी ने भाजपा को जिताये। निम्नलिखित तथ्यों के साथ समझा जा सकता है कि भाजपा ने चुनाव में कैसे प्रभावकारी प्रदर्शन किया।

जीत हो या हार, भाजपा एक राजनीतिक शक्ति

जीत हो या हार, भाजपा एक राजनीतिक शक्ति

भाजपा ने हिमाचल प्रदेश और एमसीडी की सत्ता गंवायी लेकिन वह दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनने में कामयाब हुई। उसने चुनाव को एकतरफा नहीं होने दिया। उसकी ताकत अभी भी बरकरार है। हिमाचल में कांग्रेस जरूर जीती लेकिन वोट शेयर में दोनों के बीच मामूली फासला ही है। कांग्रेस को 43.9 फीसदी तो भाजपा को 43 फीसदी वोट मिले हैं। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में सपा के स्तंभ आजम खान की सीट छीन कर एक बड़ा उलटफेर किया। इसी तरह बिहार में लालू यादव और नीतीश कुमार के एक होने के बाद भी भाजपा ने कुढ़नी उपचुनाव जीत कर एक बड़ा कारनामा किया। भाजपा ने उस मिथक को तोड़ दिया कि अगर लालू यादव और नीतीश कुमार मिल जाएं तो हार नहीं सकते। मैनपुरी लोकसभा का उपचुनाव कई मायनों में अलग है। स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव समाजवादी धारा के एक प्रमुख स्तंभ थे। समाज के सभी वर्गों में उनका सम्मान था। उनके निधन से उपजी सहानुभूति ने डिम्पल यादव का बेड़ा पार लगा दिया। भाजपा की इस सीट पर हार एक स्वभावित परिणाम है। हां, समाजवादी पार्टी का रामपुर विधानसभा का उपचुनाव हारना उत्तर प्रदेश की एक बड़ी घटना है। इस मुस्लिम बहुल सीट पर भाजपा की जीत एक बड़ी सफलता है।

प्रचंड जीत के कई कारण, आप फैक्टर से आंशिक लाभ

प्रचंड जीत के कई कारण, आप फैक्टर से आंशिक लाभ

गुजरात चुनाव में भाजपा की जीत ऐतिहासिक है। वह 99 से 156 पर पहुंच गयी और उसका वोट शेयर बढ़ कर 52.5 फीसदी हो गया। भाजपा की इस विशाल जीत के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि। दूसरा कारण है राज्य में विकास का मुद्दा। तीसरा कारण है भाजपा के सशक्त विकल्प का अभाव। आमतौर पर कहा जा रहा है कि आप के चुनाव लड़ने के कारण ही भाजपा को बड़ा फायदा हुआ। लेकिन आंकड़ों के विश्लेषण से यह पता चलता है कि आप के कारण भाजपा को आंशिक लाभ ही मिला है। आप को आशा के अनुरूप जनता का समर्थन नहीं मिला। उसके 128 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी। अरविंद केजरीवाल ने जिन तीन उम्मीदवारों की जीत का दावा किया था। वे भी चुनाव हार गये। इसलिए ये कहना कि भाजपा को आप की वजह से ही इतनी बड़ी जीत मिली, तथ्यसंगत नहीं है। इस जीत के कई कारण हैं जिसमें आप भी एक है।

मोदी के अथक मेहनत ने किया कमाल

मोदी के अथक मेहनत ने किया कमाल

गुजरात चुनाव नरेन्द्र मोद के लिए भी प्रतिष्ठा का प्रश्न था। उनके 2024 का भविष्य इसी चुनाव पर टिका था। इसलिए उन्होंने अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए पूरी ताकत झोंक दी। नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में तकरीबन 40 -42 सभाएं कीं थीं। वे तीन हफ्ते तक राज्य के विभिन्न इलाकों में रुके। सभा के अलावा लोगों से जनसंवाद भी किया। इस चुनाव को गुजरात अस्मिता से जोड़ कर उन्होंने आम लोगों को संवेदना जगा दी थी। उन्होंने 52 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार किया था जिसमें से 46 में भाजपा को जीत मिली। ऐसा नहीं कि ये सब अचानक हुआ। नरेन्द्र मोदी पिछले छह महीने से अपने गृह राज्य का लगातार दौरा कर रहे थे। उनकी इस मेहनत ने कमाल कर दिया। सौराष्ट्र को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। लेकिन मोदी के प्रभाव से भाजपा ने यहां 48 में 40 सीटें जीत लीं। जो पार्टी 27 साल से गुजरात में शासन कर रही है अगर वह एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर से बेअसर है, तो इसे चुनावी इतिहास का चमत्कार ही कहा जाएगा। जानकारों का कहना है कि नरेन्द्र मोदी का सक्सेस रेट इंदिरा गांधी से भी अधिक है। इंदिरा गांधी ने 83 चुनाव में से 44 जीते थे जब कि नरेन्द्र मोदी ने 57 में से 32 चुनाव जीते।

हिमाचल में भाजपा क्यों हारी ?

हिमाचल में भाजपा क्यों हारी ?

हिमाचल प्रदेश में भाजपा के चुनाव हारने से भाजपा और नरेन्द्र मोदी को बड़ा धक्का लगा है। नरेन्द्र मोदी ने जो करिश्मा गुजरात में किया वो हिमाचल प्रदेश में नहीं दोहरा सके। हिमाचल में भाजपा को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। जयराम ठाकुर सरकार के 10 में 8 मंत्री चुनाव हार गये। आम लोग सरकार के मंत्रियों के काम से नाराज थे लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को विशाल बहुमत से जीत दिलायी। जयराम ठाकुर ने सिराज सीट से करीब 38 हजार वोट से जीत हासिल की। वैसे भी हिमाचल में हर पांच साल बाद सरकार बदलने की परम्परा रही है। लेकिन इसके बावजूद भाजपा ने कांग्रेस को जोरदार टक्कर दी। 68 में से 15 सीटों पर जीत-हार का अंतर 2 हजार वोटों से कम रहा। हिमाचल में गुजरात की तरह एकतरफा नतीजा नहीं रहा। गुजरात में कांग्रेस की ऐसी हार हुई कि वह मुख्य विपक्षी दल की मान्यता भी खो बैठी जब कि हिमाचल में भाजपा ने 25 सीटें जीत कर कम से कम एक मजबूत विपक्ष की हैसियत हासिल कर ली।

यह भी पढ़ें: Himachal Assembly Elections: हिमाचल में बागियों ने किया भाजपा का बंटाढार

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+