अहमदाबाद: सबसे बड़े हॉस्पिटल में भी ऑक्सीजन न मिली, मरीज के रिश्तेदार को सिलेंडर 3 दिन हाथ में टांगना पड़ा
अहमदाबाद। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने चारों ओर तबाही मचा दी है। संक्रमण के मामलों में अचानक वृद्धि के चलते देशभर के अस्पताल बेड की कमी से जूझ रहे हैं और ऑक्सीजन व अन्य जीवन रक्षक दवाओं की किल्लत मची हुई है। गुजरात में अहमदाबाद और सूरत शहर... महामारी से सर्वाधिक प्रभावित हैं। अहमदाबाद स्थित एशिया का सबसे बड़ा सिविल हॉस्पिटल, जहां 1200 बेड हैं... वहां भी कोरोना मरीज को बेड नहीं मिला। हाल ही वहां से भयावह घटना सामने आई है।
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50 वर्षीय हरेश परमार, जो कि सिविल अस्पताल में एंट्री लेने पहुंचे थे। उनके रिश्तेदार साथ थे और ऑक्सीजन की तत्काल जरूरत थी। हरेश का एक रिश्तेदार ऑक्सीजन सिलेंडर पकड़े था और दूसरा उसके हाथ में ड्रिप की बोतल पकड़े हुए था। वे बुधवार को कोरोना के उपचार के लिए 1200 बेड वाले सिविल अस्पताल में भर्ती होने की उम्मीद के साथ आए थे। मगर, जगह नहीं मिली। उनके भतीजे ने कहा, "हम पिछले तीन दिनों से उसे ऐसे ही लिए घूमते फिर रहे हैं।"
उन्होंने कहा कि, छह दिन पहले लक्षणों के नजर आने के बाद हरेश का ऑक्सीजन स्तर 80 प्रतिशत से नीचे चला गया। स्वास्थ्य सेवा का बुनियादी ढांचा जर्जर हो चुका था और उन्होंने हर बड़े सरकारी और निजी अस्पताल में अस्पताल के बेड के बारे में जानकारी ली थी। हालांकि, वे रोगी के लिए एक बेड पाने में भी असमर्थ रहे।
मरीज के गांव (लोधिदा गाँव) से रिश्तेदारों ने अहमदाबाद पहुंचने के लिए रात भर सफर किया। किसी भी तरह के ऑक्सीजन बेड न मिलने पर सिविल अस्पताल में जगह पाने पहुंचे। वहां तक पहुंचने के लिए मरीज के भतीजे ने दो ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ, सफर की रात काटी। घंटों तक इंतजार करने के बाद, वे अस्पताल में एक बेड पाने के भागीदार हुए।
परिजनों ने कहा कि, हालांकि उन्होंने डॉक्टरों से सलाह ली थी और उन्हें उचित दवा दे रहे थे, लेकिन उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड की सख्त जरूरत थी, क्योंकि घर पर उन्हें संभालना आसान नहीं था। उनके रिश्तेदार ने कहा, "हम सिर्फ इस उम्मीद के धागे से लटके हुए थे कि जल्द व्यवस्था हो जाएगी।"
सिविल अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि, कोरोना मामलों की संख्या में तेजी से वृद्धि के बीच, वे अन्य शहरों और जिलों से अधिक से अधिक रोगियों को स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में व्यस्त हैं। बढ़ती भीड़ के कारण महत्वपूर्ण संसाधन सीमित हैं और मरीज तेज दर से बढ़ रहे हैं।












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