300 साल में पहली बार रद्द हुआ अंबाजी शक्तिपीठ का लोकमेला; फिर भी पहले दिन 6.5 लाख लोगों ने किए दर्शन
बनासकांठा। गुजरात में बनासकांठा जिला स्थित अंबाजी शक्तिपीठ पर लगने वाला भादौं पूर्णिमा लोकमेला 300 साल में पहली बार रद्द हुआ है। इसे कोरोना महामारी की वजह से रद्द करना पड़ा। फिर भी बिना भक्तों के ध्वजारोहण और यज्ञ कर लोकमेले का सांकेतिक रूप से शुभारंभ हुआ। चौंकाने वाली बात यह रही कि, पहले दिन लाखों लोगों ने दर्शन भी किए।

अंबाजी शक्तिपीठ: 6.50 लाख भक्तों ने किए दर्शन
जी हां, अंबाजी शक्तिपीठ के आयोजन का श्रद्धालु ई-दर्शन व डिजिटल दर्शन कर रहे हैं। प्रबंधन का दावा है कि, पहले दिन 6.50 लाख भक्तों ने डिजिटल ई-दर्शन किए। इस दौरान अंबाजी परिसर पर दुनिया को कोरोना से मुक्ति दिलाने के लिए परंपरागत अनुष्ठान किया गया। भक्तों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मंदिर-यज्ञ देवी आरती के लाइव प्रसारण की व्यवस्था भी की गई।

लोकमेला नहीं लगेगा, 3 सितंबर को खुलेंगे द्वार
एक पुजारी ने बताया कि, परंपरा के अनुसार सहस्त्र-चंडी यज्ञ सहित सभी पूजा-अनुष्ठान गुरुवार से शुरू कर दिया गया है। यह प्रक्रिया अगले माह यानी कि 2 सितंबर तक चलेगी और महाआरती के साथ खत्म होगी। 3 सितंबर को मंदिर के द्वार भक्तों के लिए खुलेंगे। 3 सितंबर से पहले तक शक्तिपीठ में लोकमेला चलेगा और परिसर कोरोना के कारण दो सितंबर तक बंद रहेगा।

देश के 51 शक्ति पीठ में से एक है अंबाजी
बता दें कि, अंबाजी का देवस्थान देश के 51 शक्ति पीठ में से एक है। मंदिर परिसर में अंबाजी माता की प्रतिमा के दर्शन किए जाते हैं। साल में लगने वाले मेले के दौरान यहां 25 लाख से अधिक तीर्थयात्री आते थे। परिसर की देख-रेख गुजरात तीर्थ विकास बोर्ड द्वारा भी की जाती है। एलईडी स्क्रीन को चाचर चौक में प्रदर्शित किया जाता है, ताकि यात्रीगण बाहर से भी माता के दर्शन कर सकें।

सोने से सुशोभित है मंदिर का गुंबद
अंबाजी मंदिर के गुंबद को सोने से सुशोभित किया गया है। अब गब्बर पर अंबाजी का मंदिर विकसित किया जाएगा। पदयात्रियों के लिये अंबाजी गब्बर पर जाती सीढ़ियों की मरम्मत भी की गई है। इस नवीनीकरण के लिए 15.67 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा, रेस्तरां और प्रसाद घर के लिए 26.90 करोड़ की लागत से सुविधाएं हुईं।












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