गुजरात में रहे रहे अफगानी छात्र बोले- दिन में कई बार वीडियो कॉल कर घरवालों की खैर खबर लेते हैं, भय और दहशत है
आणंद, 18 अगस्त: अफगानिस्तान पर तालिबानी हुकूमत के चलते लोगों की जिंदगी बदल गई है। आवाम दहशत में है और महिलाओं में भय समाया हुआ है। आतंकियों के डर से काफी लोग देश छोड़कर भाग रहे हैं। वहां का खुद राष्ट्रपति भी देश छोड़कर विदेश भाग गया। ऐसे में अफगानिस्तान से बाहर, विदेशों में रह रहे अफगानी छात्र-छात्राएं भी चिंतित हैं। उन्हें अफगानिस्तान में रह रहे अपने माता-पिता व परिवार की सलामती की फिक्र है। वहां के सैकड़ों छात्र-छात्राएं भारत में भी रह रहे हैं। यहां गुजरात के आणंद में रहकर पढ़ाई करने वाले अफगानी युवकों से हमने बात की। उन्होंने कहा कि, "हम राेज परिजनाें को काॅल कर वहां के हालात की जानकारी ले रहे हैं। दिन में कई दफा वीडियो कॉल पर बात होती है। हालात बहुत भयावह हैं। वहां लाेगाें ने घराें से निकलना बंद कर दिया है।"
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घरवालों को संकट में देख चिंतित अफगानी छात्र
आणंद जिले के वल्लभविद्यानगर में अध्ययनरत अफगानी युवक बुरहानुद्दीन सफीन ने बताया कि, मैं अफगानिस्तान के बेहसुद जिले के जलालाबाद शहर का रहने वाला हूं। अफगानिस्तान में एक कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद मैंने भारत में करियर बनाने की सोची। इसके लिए मैं भारत सरकार के इंडियन काउंसिल ऑफ कल्चरल रिलेशन योजना के अंतर्गत वल्लभविद्यानगर की सरदार पटेल यूनिवर्सिटी में सेटल हुआ। अभी यूनिवर्सिटी की डिपार्टमेंट ऑफ मैथेमेटिक्स में एमएससी के फाइनल सेमेस्टर में हूं। जिसमें पढ़ाई से लेकर रहने, खाने आदि का तमाम खर्च भारत सरकार उठाती है। यहां रहना हमारे लिए बड़ा सपना पूरा होने जैसा था। भारत में चैन की जिंदगी है, किसी का कोई खौफ नहीं है।"

वहां हर ओर कोहराम मचा हुआ है
अफगानिस्तान का जिक्र शुरू होते ही माथा सिकोड़ते हुए बुरहानुद्दीन सफीन बोले, "वहां तालिबानियों का कब्जा हो गया है। अब वहां हर ओर कोहराम मचा हुआ है। लूटपाट हो रही है। हमारे पेरेंट्स तो डर से घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे। खाने-राशन की भी चिंता है, क्योंकि स्थानीय लुटेरे घराें में घुसकर लूटपाट कर रहे हैं। खासकर, लड़कियां खौफजदा हैं। हमारे पेरेंट्स हमें कॉल कर कह रहे हैं कि, पता नहीं आगे कैसे जिएंगे। क्या होगा, समझ नहीं पा रहे।"

अब्बा बोले- तुम हिंदुस्तान में ही रहो
बुरहानुद्दीन सफीन के साथ पढ़ाई कर रहे काबुल के मोहम्मद गुफरान ने कहा, "मैं भारत में एमबीए में पढ़ाई कर रहा हूं। हम दोनों समेत फिलहाल अफगानिस्तान के कुल 6 विद्यार्थी यहां पढ़ाई कर रहे हैं। मेरी अपने घरवालों से बात हुई तो मैंने उन्हें कहा कि, डिग्री लेने के बाद वापस अफगानिस्तान लौटूंगा, तो घरवालों ने कहा कि, काबुल में हालात कतईं ठीक नहीं हैं, तुम हिंदुस्तान में ही रहो।"
वडोदरा में अपने दो बच्चों के साथ रह रहीं फातिमा बोलीं, "शौहर मोहम्मद अमीन अफगानिस्तान में हैं। वहां के हालात के बारे में सुन-सुनकर मुझे नींद नहीं आती। अल्लाह से दुआ करती हूं, मेरे अपने सलामत हों। वे जल्दी से यहीं आ जाएं।"

अमरीका दे गया अफगानियों को धोखा
सैफी उल्ला नामक छात्र ने कहा कि, "हमारे मुल्क के लोगों को अमरीका धोखा दे गया। प्रेसिंडेंट गनी भी मुल्क छोड़ भाग गए। खुद अमरीका ने 90 के दशक में हमारी सरजमीं पर आकर तालिबानियों को सपोर्ट किया था। रूस के खिलाफ रशद-हथियार सब दिया। फिर जब 2001 में न्यूयॉर्क पर हमला हुआ तो अमरीका ने तालिबानियों और अलकायदा के मुजाहिदीनों के खिलाफ जंग छेड़ दी। दो दशक तक तालिबानी अफगानिस्तान के शहरों से दूर रहे। अब अमरीका ने उनसे वार्ता की और फिर रातों-रात अमरीकी, हमारे देशवासियों को तालिबानी सत्ता का शिकार बना गए। अभी यूएन समेत बड़ी ताकतों को फौरन हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि मुल्क में अमन-चैन कायम हो सके।"












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