गुजरात में बस स्टैंड पर दलित युवक को उच्च जाति के लोगों ने पीटा, कपड़े फाड़े, छोड़नी पड़ी नौकरी
साणंद (गुजरात)। गुजरात के साणंद क्षेत्र में एक दलित युवक को कथित ऊंची जाति जैसा सरनेम रखने की वजह से पीटा गया। बस स्टैंड पर 5-6 लड़कों ने उसे रात के 10:30 बजे निशाना बनाया। उसे इतने थप्पड़ मारे कि पीटने कपड़े तक फट गए। उसके बाद जैसे-तैसे वह बस में सवार हुआ तो ड्राइवर ने उसे साणंद पुलिस स्टेशन तक की टिकट देते हुए शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। साणंद पुलिस स्टेशन पहुंचने पर पुलिस वालों ने कहा कि घटना साणंद जीआईडीसी की है, इसलिए वहा जाकर ही शिकायत दर्ज करानी चाहिए। तब देर उसने साणंद जीआईडीसी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, घटना के 24 घंटे बाद तक पुलिस ने मामले में कोई गिरफ़्तारी नहीं की।

पीड़ित युवक का नाम भरत है, जिसकी उम्र करीब 21 साल है। उसने बताया कि, "मैं गुजरात के गिर सोमनाथ ज़िले के वेरावल तालुक़ा के भेटड़ी गांव का रहने वाला हूं। 10वीं पास करने के बाद मैकेनिकल इंजीनियरिंग का कोर्स कर रखा है। परिवार की आर्थिक मदद के लिए पिछले कुछ महीनों से वह अहमदाबाद के नज़दीक साणंद जीआईडीसी स्थित कारख़ाने में काम कर रहा हूं। 1 दिसंबर की बात है, जब मैं कंपनी के गेट पर पहुँचा तो मुझे हर्षद नामक व्यक्ति ने रोका और कहने लगा तुम्हारी शर्ट के बटन क्यों खुले हैं? क्या तुम किसी लोकल गैंग के नेता हो? फिर पूछा- कौन जात हो?"
भरत के मुताबिक, "मैंने कहा कि वेरावल से हूं और नीची जाति से ताल्लुक़ रखता हूं। इस पर वो भर्रा उठे और बोले कि सिर्फ दरबार सरनेम होने का मतलब ये नहीं है कि तुम मुझे भाई कह दो। और कैसे तुमने दरबार सरनेम रखने की हिम्मत की?" यह कहते हुए मुझे थप्पड़ मारा। उससे भी मन नहीं भरा, फिर जब रात को कारखाने की छुट्टी हुई तो रास्ते में कई लड़कों से पिटवाया। फिर जब मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई तो धमकियां दी जाने लगीं। मुझे नहीं पता था कि मेरा सरनेम और शर्ट के बटन खोलकर रखने की आदत की वजह से मैं ऐसी मुसीबत में फंस जाउंगा और मुझे अपनी नौकरी छोड़नी पड़ेगी।"
भरत का कहना है कि, इस मामले में पुलिस ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया। वहीं, साणंद जीआईडीसी पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर धीरुभा जडेजा बाले कि, जांच-पड़ताल चल रही है। उचित कार्रवाई होगी।''












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