वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में घुसा 8 फीट लंबा मगरमच्छ, रेस्क्यू करने में वनकर्मियों के छूटे पसीने
वडोदरा। गुजरात में वडोदरा के लक्ष्मी विलास पैलेस में एक विशालकाय मगरमच्छ घुस आया। उसे देखकर लोगों में अफरा-तफरी मच गई। इसकी सूचना वन विभाग को दी गई। वन विभाग की टीम मगरमच्छ को वहां से निकालने पहुंची। कल वन विभाग की टीम द्वारा लक्ष्मी विलास पैलेस परिसर से 8 फीट लंबे मगरमच्छ का रेस्क्यू किया गया। हालांकि, टीम मेंबर्स को काफी मशक्कत भी करनी पड़ी। वह मगरमच्छ पैलेस के अंदर इधर-उधर घूमता रहा। जब वह पकड़ में आया तो टीम उसे पानी से भरे इलाके में ले गई।
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वडोदरा में पानी से बाहर घूम रहे मगरमच्छ
हाल ही में एक मगरमच्छ वडोदरा-मुंबई रेलवे लाइन पर भी देखा गया था। वो 8 फीट लंबा मगरमच्छ ट्रेन की चपेट में आ गया था। उसे पटरी पर सुबह के समय दर्द से तड़पते देखा गया। उस मगरमच्छ को देखकर चालक ने सुपरफास्ट राजधानी एक्सप्रेस रोक दी थी। राजधानी एक्सप्रेस पटरी पर ही करीब 25 मिनट तक रुकी रही, ताकि वाइल्डलाइफ बचावकर्मियों को मौके पर पहुंचने में मदद मिल सके। इस दौरान अन्य ट्रेनें भी करीब 45 मिनट तक देरी से चलीं, जब तक कि मगरमच्छ को पटरी से नहीं उतार दिया गया। हालांकि, रेस्क्यू के कुछ मिनटों बाद उसने दम तोड़ दिया।

पटरी पर दर्द से कराह रहा था मगरमच्छ
पटरी पर ट्रेन की चपेट में आए मगरमच्छ का जिक्र करते हुए वाइल्डलाइफ रेस्क्यू वर्कर हेमंत वाधवाना ने बताया कि, हमें कर्जन रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक से रात करीब 3:15 बजे फोन आया था कि रेलवे ट्रैक पर एक मगरमच्छ पड़ा है। इस पर मैंने लोकेशन पता करने की कोशिश की। वो मगरमच्छ रेलवे ट्रैक पर ऐसी जगह पर था कि वहां जल्दी पहुंचना संभव नहीं था। फिर भी हमने सोचा कि उधर चलते हैं।"

ट्रेन से उसके सिर में चोट लग गई थी
हेमंत वाधवाना ने कहा, "हमारे वाहन के कर्जन रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद, हमें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि रेलवे अधिकारियों ने राजधानी एक्सप्रेस को लगभग 20 मिनट तक रोक दिया था, ताकि हम उस पर सवार हो सकें और ठीक उसी स्थान पर पहुंच सकें जहां ट्रेन और पांच मिनट रुकी थी।"

बचाने के लिए उसे पटरी से हटवाया
हेमंत वाधवाना ने बताया, "हमने वडोदरा जिले में तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आए उस मगरमच्छ को बचाने के लिए उसे पटरी से हटवाया। देखा कि ट्रेन की चपेट में आने से मगरमच्छ के सिर में चोट लग गई थी।

नहीं बचा, कुछ ही मिनटों में मर गया
एक अन्य वाइल्डलाइफ रेस्क्यू वर्कर नेहा पटेल ने कहा कि, मगरमच्छ अपना जबड़ा हिला रहा था और उसके सिर पर चोट लगी थी। शायद ट्रेन उसके सिर से गुजरी थी। नेहा पटेल ने कहा, "रेस्क्यू किए जाने के कुछ ही मिनटों बाद वो मगरमच्छ मर गया।"
हालांकि, अच्छी बात यह रही कि रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों के सुगम मार्ग की अनुमति देने के लिए मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया था। जानकारों का कहना है कि, मगरमच्छ गुजरात के वडोदरा जिले में काफी संख्या में रहते हैं। यहां बारिश के मौसम में ये सड़क और रेल पटरियों पर दिख जाते हैं। हो सकता है कि, उक्त मगरमच्छ भी इसी तरह पटरी पर आ गया होगा।












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