Gujarat Election 2017: 'विकास पागल हो गया' के बाद 'गब्बर सिंह टैक्स', राहुल गांधी के जुमले क्यों छाए सोशल मीडिया पर?
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नई दिल्लीः 'विकास पागल हो गया है', ये नारा गुजरात से उछला और पूरे देश में सोशल मीडिया पर छा गया। इसके बाद दूसरा जुमला आया कि 'पागल विकास की आखिरी दिवाली'। और अब 'जीएसटी यानि गब्बर सिंह टैक्स'। ये जुमले अचानक कहां से आ रहे हैं और कैसे छा रहे हैं। आखिर विकास पागल कैसे हो गया और अब सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड कर रहा है गब्बर सिंह टैक्स। ये सोशल मीडिया की जंग कौन लड़ रहा है, कैसे लड़ रहा है और किस तरह ये सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जानना जरूरी है।


सोशल मीडिया एक ताकत बनकर उभरी है
पिछले लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया एक ताकत बनकर उभरी। जिस तरह नरेंद्र मोदी की थ्री डी चुनावी सभाएं हुईं, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश भर में लोगों ने चाय पर चर्चा सुनी। ‘अब की बार, मोदी सरकार' जैसे नारे छाए, सभी को मालूम है। इसके बाद बारी आई बिहार विधानसभा चुनाव की, और यहां भी सभी दलों को एहसास हुआ कि चुनावी जंग में डिजिटल वॉर ने अहम् भूमिका निभाई। एक तरफ लालू केंद्र पर हमले बोल रहे थे और मोदी को निशाने पर लेकर चुनाव अभियान छेड़ रहे थे तो दूसरी तरफ नीतीश कुमार बिहार पर ध्यान फोकस किए हुए थे। यदि याद हो तो उस वक्त गौ मांस की कई घटनाएं मुद्दा बनीं और चुनाव का रुख दूसरी ओर मुड़ गया। वोट का ध्रुवीकरण हुआ, आखिरकार राजनीतिक विशेषज्ञ भी नहीं समझ पाए कि बेमेल लालू-नीतीश का मिलन कैसे बिहार में सरकार बना ले गया जबकि बीजेपी को अति आत्मविश्वास ले डूबा।

समाजवादी पार्टी ने लगा दी थी पूरी ताकत
इसके बाद यूपी का चुनाव हुआ। इसमें भी डिजिटल वॉर की जंग पर जिस तरह बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच छिड़ी, उसमें सोशल मीडिया की ताकत के बलवूते पर ऐसी हवा बनी कि मतगणना के दिन तक किसी को एहसास नहीं था कि बीजेपी प्रचंड बहुमत से सरकार बना ले जाएगी क्योंकि जो धारणा बन रही थी उसमें हर कोई दोनों के बीच बराबरी का अंदाजा लगा रहा था और चंद सीट की हार जीत से सरकार बनने का अनुमान बना हुआ था। यूपी के विधानसभा चुनाव को डिजिटल मीडिया के जरिए देखा, सारे घटनाक्रम पर नजर रखी और उसमें साफ पता चल रहा था कि बीजेपी बढ़त ले रही थी। सीधा सादा अनुमान था कि उस वक्त बीजेपी से जुड़ी हर खबर लोग ज्यादा पढ़ रहे थे, खास तौर से मोदी और अमित शाह की खबर।

मुलायम परिवार का झगड़ा सरेआम हो रहा था
हो सकता है आपको जानकर ताज्जुब हो कि जिस दिन मुलायम परिवार का झगड़ा सरेआम हो रहा था, शिवपाल और अखिलेश के बीच जुबानी जंग चल रही थी, उस वक्त सारी मीडिया पल पल की कवरेज में लगी थी। मैं खुद हर मिनट के अपडेट से वाकिफ था लेकिन उस वक्त बीजेपी अपने चुनावी रथ रवाना करने में जुटी थी और ये कोई बड़ी खबर नहीं थी, फिर भी इस खबर को ज्यादा लोग पढ़ रहे थे। ऐसे कई वाक्ये हुए जब सुर्खियों से हटकर लोग दूसरी खबरों को तवज्जो दे रहे थे और उनमें योगी आदित्यनाथ थे। यूपी के पूरे चुनाव में मेरा अनुभव ये रहा कि प्रदेश के बीजेपी नेताओं में सबसे ज्यादा लोकप्रिय योगी आदित्यनाथ रहे।

सोशल मीडिया से दूर रहीं मायावती
इस दौरान मीडिया जगत के लोगों से आपसी चर्चा के दौरान मैं इस बात पर अडिग था कि यूपी की जनता बीजेपी को बारीकी से देख रही है और उसे बढ़त मिलती नजर आ रही है। हालांकि तमाम लोग इससे इत्तफाक नहीं रख रहे थे। सबसे पीछे मायावती थीं और उसकी वजह थी कि वो डिजिटल मीडिया वॉर में थीं ही नहीं। बीएसपी ने सोशल मीडिया को इग्नोर किया और नतीजा ये निकला कि वो चुनावी लड़ाई में हर वक्त पिछड़ती नजर आई।

राहुल गांधी फिर से चर्चा में हैं
तो आप समझ गए होंगे कि गुजरात चुनाव में डिजिटल वॉर की भूमिका कितनी अहम रहने वाली है और इस पर कांग्रेस कितना फोकस कर रही है। पहली बार कांग्रेस ने इसे गंभीरता से लिया है। ये कांग्रेस की न्यू मीडिया टीम ही है जिसने राहुल गांधी को फिर से चर्चाओं में ला दिया है और जिस सोशल मीडिया पर उनका भयंकर मजाक उड़ता था, उसमें विकास पागल हो गया है से लेकर गब्बर सिंह टैक्स छाने लगा है। ये जुमले कहां से आ रहे हैं, कैसे इन जुमलों पर बीजेपी और कांग्रेस समर्थक सोशल मीडिया में भिड़ रहे हैं और जाने-अनजाने उन्हें विरोध या समर्थन के चक्कर में वायरल कर रहे हैं। आप देख ही रहे हैं। साफ है कि चुनाव में डिजिटल वॉर का घमासान शुरू हो चुका है, इसमें जो आगे रहेगा, उसे चुनाव में फायदा मिलना तय है।












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