Gorakhpur News: DDU University ने मिशन शक्ति के तहत की यह खास पहल, शिक्षा को लेकर कही यह बात
Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. पूनम टंडन के संरक्षण में उत्तर प्रदेश सरकार के पहल पर मिशन शक्ति फेज 5 के अंतर्गत स्त्री धर्म विषय पर दर्शनशास्त्र विभाग में एकदिवसीय जागरूकता समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एक विशिष्ट व्याख्यान का भी आयोजन किया गया। इस व्याख्यान के मुख्य अतिथि प्रो. अनुभूति दुबे, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण एवं आचार्य, मनोविज्ञान विभाग, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर रहीं। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि प्रो. अनुभूति दुबे, नोडल अधिकारी प्रो. विनीता पाठक, दर्शन विभाग के अध्यक्ष एवं अधिष्ठाता, कला संकाय प्रो. राजवंत राव एवं डॉ. कुशल नाथ मिश्र के द्वारा दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। इसके बाद दर्शनशास्त्र विभाग के समन्वयक डॉ. संजय कुमार राम के द्वारा अतिथियों का स्वागत एवं विषय प्रवर्तन किया गया।

मिशन शक्ति के नोडल अधिकारी प्रो. विनीता पाठक ने महिलाओं के शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर बल देते हुए कहा कि अतिनारीवाद के आघातों से बचते हुए स्त्रियोचित गुणों को अपनाना चाहिये। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि महिलाओं में निर्णय लेने की क्षमता ही समाज को आगे ले जाने में कारगर होती है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. अनुभूति दुबे ने स्त्री धर्म पर प्राचीन एवं आधुनिक ग्रंथों की बातों पर चर्चा करते हुए कहा कि स्वतंत्रता एवं समानता स्त्रियों के लिए परम आवश्यक है। उन्होंने कहा कि समाज में पुरुषों और स्त्रियों के मध्य सह अस्तित्व की भावना का विशेष महत्त्व है। आज के समय में समाज के उत्थान के लिए स्त्री और पुरुष का सह अस्तित्व अति आवश्यक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष प्रो. राजवंत राव ने कहा कि महिलायें संस्कृति की वाहक एवं प्रसूता है। भारत में संवाद धर्म का एक अपरिहार्य हिस्सा रहा है। आज के संदर्भ में भी स्त्री धर्म के प्रश्न पर संवाद कायम रहना चाहिए।
इस कार्यक्रम में दर्शनशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. रमेश चंद के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। कार्यक्रम का संचालन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. संजय कुमार तिवारी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकगण डॉ. आमोद कुमार राय, डॉ. कुलदीपक शुक्ल, रिसर्च एसोसिएट डॉ. सुनील कुमार एवं शोध-छात्र, स्नातकोत्तर तथा स्नातक के विद्यार्थी भारी संख्या में उपस्थित रहे।












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