लोक आकर्षण के जीवंत केंद्र के रूप में विकसित होगा गुरु श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ: कुलपति
Gorakhpur News: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो पूनम टंडन के मार्गदर्शन में विश्विद्यालय की महायोगी गुरू श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ को के लोक आकर्षण के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य शुरू हो गया है।
इसी क्रम में गोरखपुर विश्वविद्यालय के महाराणा प्रताप परिसर में स्थित शोधपीठ में गया है। इस दिशा में उत्तर प्रदेश राज्य संग्रहालय निदेशालय के पूर्व निदेशक डाॅ. एके सिंह ने अपनी टीम के साथ शोधपीठ का निरीक्षण किया।
कुलपति प्रो पूनम टंडन का विज़न शोधपीठ को नाथपंथ के एक जीवंत केंद्र के रूप में विकसित करना है। शोधपीठ के प्रस्तावित संग्रहालय में नाथ पंथ से संबंधित समस्त पांडुलिपि, चित्र, नाथ योगियों की वेश भूषा, दुर्लभ प्राचीन वस्तुओं एवं अन्य उपलब्ध सामग्रियों का संग्रह होना है।

शोधपीठ के उप निदेशक डाॅ. कुशल नाथ मिश्रा ने बताया की डाॅ. सिंह और उनकी टीम ने ने शोधपीठ का स्थलीय निरीक्षण किया तथा आवश्यक सुझाव दिए। निरीक्षण के दौरान डॉ. मिश्रा के साथ सहायक निदेशिका डॉ सोनल सिंह, डाॅ. मनोज कुमार द्विवेदी , हर्षवर्धन सहित समस्त शोध अध्येता उपस्थित रहे।
कुलपति प्रो टंडन की मंशा है कि नाथ संप्रदाय के इतिहास और जानकारी के लिए विद्यार्थियों और आमजन को भटकना नहीं पड़े। इस दिशा में गोरक्षनाथ शोधपीठ की लाइब्रेरी को भी सुदृढ़ कर आमजन के लिए भी खोलने का प्रयास किया जा रहा है। लाइब्रेरी को सुदृढ़ करने के साथ प्रथम चरण मे 1500 किताबों को मंगवाया गया है। इसके साथ ही शोधपीठ की गैलरी को भी आकर्षक और सुंदर बनाया जाएगा। शोधपीठ में प्रवेश करते ही नाथपंथ से जुड़े धर्म गुरुओं की प्रतिमा के साथ गैलरी को श्लोगन एवं चित्र के माध्यम से सुंदर बनाया जाएगा।












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