UP: जानिए साइलेंट खातों से 76 लाख रुपये गबन करने की पूरी कहानी, इस छोटे से सुराग से दोषियों तक पहुंची पुलिस

गोरखपुर डाकघर विभाग में 76 लाख रुपये गबन का मामला सामने आया है। जिसमें 33 लोग दोषी पाए गए हैं।

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Gorakhpur News: लोगों अपनी मेहनत की कमाई का एक- एक रुपया जोड़कर डाकघर के बचत खाते में जमा किया था। उन्हें क्या पता था कि जिन कर्मचारियों पर विश्वास कर पैसे जमा कर रहे हैं वही एक दिन यह रकम गबन कर लेगें। वह भी पूरे 76 लाख रुपये। इस बात पर किसी को जल्दी यकीन नहीं होगा लेकिन एक साल तक चले जांच के बाद जो रिपोर्ट आई है वह चौकाने वाली है। जानिए कैसे हुआ इतना बड़ा गबन।

जिले के प्रधान डाकघर समेत जिले के चार उप डाकघरों में लोगों के खातों से 76 लाख रुपये का गबन करने का मामला सामने आया है। इस मामले में 33 कर्मचारियों को दोषी पाया गया है। इसमें डाक सहायक पद पर तैनात आठ कर्मचारियों को विभाग ने मुख्य दोषी माना है। जबकि, पांच को सहदोषी और 20 कर्मचारियों को सहायक दोषी मानते हुए सभी के खिलाफ चार्जशीट जारी की गई है और अगली कार्रवाई की संस्तुति की गई है।

ऐसे हुई गबन की जानकारी गोरखपुर के पहले पोस्ट मास्टर को इस काले कारनामे की जानकारी एक अनजान चिठ्ठी मिलने के बाद हुई। इस पत्र में बताया गया था कि यहां कार्यरत एक कर्मचारी निष्क्रिय खाते को फर्जी तरीके से चालू करवा कर रूपये निकाल रहा है। शिकायत को संज्ञान में लेते हुए पोस्ट मास्टर जनरल ने जांच बैठा दी।

इस जांच में पता चला कि प्रधान डाकघर में कार्यरत कर्मचारी के पिता का निधन वर्ष 2018 में हो गया था। बाद में उसकी मां का भी निधन हो गया। मां ही नामिनी थी। ऐसे में मां की मौत की जानकारी छिपाकर उसने पिता के पेंशन खाता संख्या 3473656309 को 12 मई 2020 को प्रधान डाकघर में स्थानांतरित करा लिया। तत्कालीन पोस्टमास्टर व सिस्टम मैनेजर के सहयोग से खाते को सक्रिय कराकर उसमें अपना नाम भी जुड़वा लिया। इतना ही नहीं खाते पर एटीएम कार्ड जारी करा लिया। डाककर्मी हर महीने विड्राल फार्म व एटीएम कार्ड के माध्यम से पेंशन निकालता रहा।

आगे जांच में पता चला कि महानगर के तीन उप डाकघरों में सैकड़ों निष्क्रिय खातों से 92 लाख रुपये गायब हुए थे। इसकी जांच भी चल रही थी। इसी बीच आरोग्य मंदिर उप डाकघर से पेंशन खाते से आठ लाख रुपये गायब करने का मामला भी सामने आ गया। इन सभी मामलों में एसएसपी, डाक ने चार लिपिकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करते हुए कैंट थाने में मुकदमा दर्ज करवा दिया।

प्रवर डाक अधीक्षक मनीष कुमार ने कहा कि गबन के कुछ मामलों में विभागीय जांच चल रही थी। रिपोर्ट के आधार पर 33 लोगों को अलग-अलग वर्ग का दोषी पाया गया है। शैलेष सिंह, अमरजीत, पीसी पांडेय, प्रभात त्रिपाठी, गया प्रसाद, गितेश पांडेय, एमपी तिवारी मुख्य दोषी हैं।

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