Khichdi Mela: पूरी दुनिया में मशहूर है गोरखपुर का खिचड़ी मेला,यह चीज बनाती है खास

नाथ संप्रदाय के विश्व प्रसिद्ध मंदिर गोरखनाथ की अपनी खास विशेषता है। हिंदू धर्म के मानने वालों के लिए आस्था का केंद्र होने के साथ यह कई अन्य धर्म के लोगों के लिए भी समरसता का प्रतीक है। मुस्लिम समुदाय के लोगों का भी इस प

Gorakhnath Mandir Khichdi Mela 2023: नाथ संप्रदाय के विश्व प्रसिद्ध मंदिर गोरखनाथ की अपनी खास विशेषता है। हिंदू धर्म के मानने वालों के लिए आस्था का केंद्र होने के साथ यह कई अन्य धर्म के लोगों के लिए भी समरसता का प्रतीक है। मुस्लिम समुदाय के लोगों का भी इस पीठ से खासा लगाव है।मकर संक्रांति के अवसर पर लगने वाला खिचड़ी मेला देश ही नहीं दुनिया के लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है। आज हम गोरखनाथ मंदिर में लगने वाले इस मेले के इतिहास, महत्व और विशेषताओं के बारे में विस्तार से चर्चा कर रहे हैं।

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ऐसे शुरु हुई खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा
गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा बहुत ही पुरानी है। इसके साथ एक रोचक मान्यता जुड़ी हुई है।
ऐसी मान्यता है कि खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुग से शुरु हुई है। यह वह समय था जब गुरु गोरक्षनाथ भिक्षाटन कर जीवन यापन करते थे । हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के ज्वाला मंदिर की देवी ने गोरखनाथ को भोजन के लिए आमंत्रित किया था। वहां तामसी भोजन होने पर गोरक्षनाथ ने कहा मुझे सिर्फ भिक्षा में मिले चावल व दाल ही पसंद हैं और मैं इसी का भोजन करता हूं। देवी ने कहा कि मैं पकाने के लिए पानी गर्म करती हूं। आप भिक्षाटन कर चावल दाल लाइए। इसी के बाद गुरु गोरक्षनाथ भिक्षाटन करते गोरखपुर पहुंचे।

भिक्षा नहीं भरा पात्र
गोरखपुर पहुंच उन्होंने राप्ती व रोहिन नदी के संगम स्थली पर तपस्या में लीन हो गए। काफी दिनों तक वह तपस्या में लीन रहे। उन्हें तपस्या करते देख लोगों ने उनके पात्र में चावल,दाल सहित अन्य भिक्षा की वस्तुएं देनी शुरु कर दी। लगातार भिक्षा देने के बाद भी जब पात्र नहीं भरा तब लोगों के लिए यह आकर्षण के बन गया। लोग इसे चमत्कार मानते हुए तपस्वी की पूजा करने लगे और भगवान का दर्जा दिया। तभी से यहां खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा शुरु हो गयी।

एक माह तक चलता है मेला
गोरखनाथ मंदिर में लगने वाला खिचड़ी मेला एक माह तक या उससे अधिक समय तक रहता है। हजारों की संख्या में तरह-तरह की दुकाने मेले को आकर्षक रुप देती हैं। सर्कस, जादू सहित कई तरह के करतब बच्चों के साथ सभी का मनोरंजन करते हैं। मेले का रंग मकर संक्रांति से पहले ही दिखने लगता है। देश व विदेश से लोग भारी संख्या में यहां आते हैं।

नेपाल से है खासा संबंध
मकर संक्रांति के अवसर पर पहली खिचड़ी नेपाल राज परिवार से चढ़ती है। नाथ संप्रदाय भारत व नेपाल के अच्छे संबंधो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। नेपाल में नाथ संप्रदाय के कई मंदिर हैं जो गोरखनाथ मंदिर में गहरी आस्था रखते हैं।

प्रशासन ने शुरु की तैयारी
विश्व प्रसिद्ध खिचड़ी मेला की तैयारी प्रशासन ने शुरु कर दी है। इसके लिए गोरखपुर जोन के कमिश्नर रवि कुमार एनजी अधिकारियों के साथ बैठक की थी। उन्होने खिचड़ी मेला को लेकर तत्काल सभी तैयारियों शुरु करने का निर्देश दिया था।

सुरक्षा के कड़े इंतजाम
खिचड़ी मेला को लेकर प्रशासन सतर्क रहता है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। सीसीटीवी कैमरे व द्रोण कैमरे से पूरे परिसर की निगरानी की जाती है। हजारों की संख्या में सुरक्षाकर्मी मौजूद रहते हैं।


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