राज्यपाल ने दी स्वीकृति, अब इन कामों को मिलेगी रफ्तार, कुलपति ने बताया पूरा प्लान
DDU University Gorakhpur: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अकादमिक एवं प्रशासनिक आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय से संबंधित परिनियम में संशोधन प्रस्ताव को मा कुलाधिपति द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है। यह संशोधन विश्वविद्यालय की विद्या परिषद और कार्य परिषद की संस्तुतियों के आधार पर शासन को प्रेषित किया गया था। संशोधित परिनियम के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में व्यापक परिवर्तन कर इसे बहु-विषयी और आधुनिक स्वरूप प्रदान किया है। पहले इस संकाय में केवल चार विभाग - मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग तथा एप्लाइड साइंसेज - संचालित थे। अब इसे दो संस्थानों के रूप में पुनर्गठित किया गया है: पहला, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (IET) और दूसरा, इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी, जो पहली बार इस संकाय का अभिन्न अंग बना है।
इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के अंतर्गत होंगे सात विभाग इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के अंतर्गत अब सात विभाग होंगे - मैकेनिकल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, एप्लाइड साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग तथा इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी। वहीं, इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में पाँच विभाग होंगे - फार्मास्यूटिक्स, फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री एंड एनालिसिस, फार्माकोलॉजी, फार्माकॉग्नोसी तथा फार्मेसी प्रैक्टिस। इस प्रकार कुल विभागों की संख्या चार से बढ़कर बारह हो गई है। यह परिवर्तन न केवल आधुनिक विषयों को सम्मिलित करता है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के बहु-विषयी दृष्टिकोण को भी मूर्त रूप देता है। फार्मेसी को इंस्टीट्यूट स्तर पर संरचित कर इसे PCI (Pharmacy Council of India) के मानकों के अनुरूप रूपांतरित किया गया है।

बोर्ड ऑफ फैकल्टी की संरचना में भी व्यापक बदलाव
इसके साथ ही बोर्ड ऑफ फैकल्टी की संरचना में भी व्यापक बदलाव किए गए हैं। पूर्व संरचना सीमित थी, जिसमें केवल डीन, विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर सम्मिलित थे। नई संरचना में अब डीन, इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी तथा इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी के निदेशक, दोनों संस्थानों के सभी प्रोफेसर, विश्वविद्यालय के विभिन्न विज्ञान, प्रौद्योगिकी और मानविकी विभागों के विभागाध्यक्ष, प्रत्येक विभाग से एक एसोसिएट प्रोफेसर और एक असिस्टेंट प्रोफेसर (सीनियरिटी के आधार पर रोटेशन), मानविकी के दो शिक्षक तथा इंजीनियरिंग और फार्मेसी विषयों से संबंधित बाहरी विशेषज्ञ शामिल होंगे।
यह नई संरचना आंतरिक, बाहरी और बहु-विषयी विशेषज्ञता पर आधारित है तथा NEP 2020, AICTE और PCI के मानकों के अनुरूप है। इन संशोधनों का उद्देश्य शिक्षा को भविष्य उन्मुख, नवाचार और औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना, बहु-विषयी शिक्षण को प्रोत्साहित करना और तकनीकी तथा व्यावसायिक शिक्षा को सशक्त बनाना है। इसके माध्यम से उच्च स्तरीय शिक्षकों, विशेषज्ञों और बाहरी विचारों को विश्वविद्यालय की निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय रूप से सम्मिलित किया जा सकेगा।
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने इस ऐतिहासिक निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि "यह संशोधन विश्वविद्यालय के तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा तंत्र को 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा। नए विभागों और समावेशी बोर्ड ऑफ फैकल्टी संरचना के माध्यम से शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध, उद्योग सहयोग तथा रोजगारपरक शिक्षण को अभूतपूर्व गति मिलेगी। यह कदम विश्वविद्यालय को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी संस्थान के रूप में स्थापित करेगा।" संशोधन के बाद विश्वविद्यालय अब नए पाठ्यक्रमों के विकास, बोर्ड ऑफ स्टडीज के गठन, उद्योग साझेदारी और शोध विस्तार की दिशा में कार्य करेगा। इन परिवर्तनों के माध्यम से विश्वविद्यालय राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक सशक्त शैक्षणिक ढांचा तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।












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