युवा देश के कर्णधार, 75% उपस्थिति होगी अनिवार्य : कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल

DDU University Gorakhpur Dikshant Samaroh Anandiben Patel News Uttar Pradesh: दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का 44वां दीक्षांत समारोह आज दोपहर बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित हुआ। समारोह की अध्यक्षता कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की। मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. आशुतोष शर्मा, इंस्टिट्यूट चेयर प्रोफेसर, आईआईटी कानपुर ने दीक्षांत व्याख्यान दिया और उन्हें मानद डी.एससी. की उपाधि प्रदान की गई। उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि रहे।

कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवा देश के कर्णधार हैं और उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी राष्ट्र को आगे बढ़ाना है। उन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि जिन्हें पदक नहीं मिला है, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने कहा कि हर विद्यार्थी के भीतर कोई न कोई विशेष प्रतिभा होती है, जिसे उजागर करने में शिक्षक, परिवार और मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षण को सेवा बताते हुए उन्होंने कहा कि जब भी वे भ्रमण पर जाती हैं, तो छात्राएँ उन्हें अपनी 'शिक्षिका' के रूप में पहचानती हैं-यही एक शिक्षक का सबसे बड़ा गौरव है।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि आपकी उपस्थिति लैब, लेक्चर और लाइब्रेरी में अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी युवा आबादी वाला प्रदेश है, इसलिए विश्वविद्यालयों को और अधिक जिम्मेदारी से कार्य करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 75% उपस्थिति अनिवार्य होगी, अन्यथा विद्यार्थी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। साथ ही, महाविद्यालयों को समय पर प्रैक्टिकल और परीक्षाएँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

शोध पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि शोध के निष्कर्ष केवल प्रकाशित ही न हों, बल्कि नगर निगम, जिलाधिकारी और सरकार तक पहुँचें तथा उनका व्यावहारिक उपयोग भी हो। अयोध्या में प्रदूषण पर किए गए शोध का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं, बल्कि उस पर आगे की कार्रवाई आवश्यक है।
उन्होंने विश्वविद्यालय को सुझाव दिया कि एमओयू के बाद वास्तविक गतिविधियाँ-जैसे लेक्चर एक्सचेंज, उद्योगों से सहयोग और अंतरराष्ट्रीय शोध साझेदारी-सुनिश्चित की जानी चाहिए। नेपाल और अन्य पड़ोसी देशों के विश्वविद्यालयों से अकादमिक सहयोग बढ़ाने की भी आवश्यकता है।

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उन्होंने कहा कि पेटेंट का व्यावसायीकरण होना चाहिए और उद्योगों को इस दिशा में जोड़ना चाहिए। राज्यपाल ने समर्थ पोर्टल के माध्यम से लगभग 200 करोड़ रुपये की बचत पर विश्वविद्यालय की सराहना की। साथ ही, 34 अंतरराष्ट्रीय छात्रों के नामांकन पर बधाई देते हुए कहा कि यह नैक ए++ ग्रेड और एनआईआरएफ रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन का परिणाम है।
कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा - "आप सबके भीतर हजारों मोदी हैं। अपने अंदर की क्षमता को पहचानो और जिम्मेदारी उठाओ।"

अंत में उन्होंने स्वर्ण पदक विजेताओं से कहा - "सोना मत माँगिए। जिंदगी मांगने से नहीं, बल्कि मेहनत से पूरी होती है।"
उन्होंने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में केवल पैसे को महत्व न दें, बल्कि संस्कार और मूल्यों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लें।

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