Gorakhpur News: डीडीयू विश्वविद्यालय गोरखपुर ने नई आईपीआर नीति को दी मंजूरी
Gorakhpur News: विश्वविद्यालय के शिक्षकों तथा विद्यार्थियों द्वारा पेटेंट और अन्य आईपीआर दाखिले को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालय की आईपीआर नीति को संशोधित करने के साथ-साथ वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। इस प्रस्ताव को कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय की कार्य परिषद ने अपनी सहमति प्रदान कर दी है।
कुलपति प्रो पूनम टंडन ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा पेटेंट या अन्य आईपीआर के दाखिल के लिए वित्तीय सहायता की जाएगी। विश्वविद्यालय पेटेंट या अन्य आईपीआर के दाखिल पर होने वाले खर्च को पूरी तरह वहन करेगा। पहले यह खर्च पेटेंट दाखिल करने वाले को देना पड़ता था।साथ ही पेटेंट और अन्य प्रकार के आईपीआर दाखिल करने में सहायता के लिए विश्वविद्यालय द्वारा सक्षम आईपीआर विशेषज्ञ से सलाह ली जायेगी।

इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी राईट (आईपीआर) एक कानूनी शब्द है जो वाणिज्यिक मूल्यों वाले नवाचारों, नए विचारों, और सूचनाओं को शामिल करता है और आविष्कारकों को इसे दूसरों द्वारा उपयोग किए जाने से बचाने का अधिकार देता है। इसमें सूचना से लेकर आविष्कार तक की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है। इसमें आम तौर पर पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क शामिल होते हैं जो विचारों, विचारों की अभिव्यक्ति और चिह्नों की रक्षा के लिए कानूनी अधिकार प्रदान करते हैं।
इन उद्देश्यों को पूरा करेगी आईपीआर नीति
यह आइपीआर नीति मानविकी, कानून, विज्ञान, वाणिज्य आदि से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचारों को प्रोत्साहित करने के साथ ही शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा किए गए नवाचारों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश तैयार करने में मदद करेगी। यह आइपीआर नीति एक उपयुक्त संगठनात्मक संरचना और तंत्र विकसित करेगी जिसके माध्यम से शिक्षकों और विद्यार्थियों के आविष्कारों और नवाचारों को संरक्षित किया जा सके। साथ ही इस नीति द्वारा गोरखपुर और आस-पास के क्षेत्रों में अद्वितीय वस्तुओं के जीआई पंजीकरण की सुविधा प्रदान की जायेगी ताकि उचित मान्यता और लाभ प्राप्त किया जा सके। यह संशोधित आईपीआर नीति विश्वविद्यालय में कार्यशाला, प्रशिक्षण, सेमिनार, सम्मेलन और वार्ता आयोजित कर आईपीआर मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाएगी।












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