भारत-पाकिस्तान तनाव का प्याज पर असर, गुजरात में बढ़ सकते हैं दाम

Gujarat News, गांधीनगर। पाकिस्तान के साथ बढ़े तनाव के चलते गुजरात के वेजिटेबल्स ट्रेडर्स और किसान नई चुनौती का सामना करने जा रहे हैं। यहां रबी की बुवाई के आंकड़ों से पता चला है कि राज्य में ज्वार, सौंफ, और मक्का जैसी फसलों में पिछले साल की तुलना में तेजी आई। मगर, आलू-प्याज की कमी हो गई। ऐसे में जबकि, पाकिस्तान को जाने वाले टमाटर की सप्लाई रोक दी गई तो यहां पाकिस्तानी प्याज के पहुंचने के आसार नहीं दिख रहे। पाकिस्तानी प्याज दुनिया में अपनी अच्छी किस्म और सस्ते रेट के लिए जानी जाती हैं।

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इधर गुजरात में इस बार धनिया, लहसुन, आरी, इसबगोल और प्याज, आलू और सब्जियों की बुवाई सीमित हो गई है और यह गर्मियों में कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत देता है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले वर्ष की तुलना में धनिया की बुवाई 57% कम थी; लहसुन के मामले में 49% कम है; और प्याज के मामले में 37% कम है।

कृषि विभाग के एक अधिकारी ने कहा है कि प्याज की कीमतें इस साल अगस्त तक 50 रुपये प्रति किलोग्राम को पार करने की संभावना है। राज्य में मई में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले प्याज की कीमतें बढ़ने के आसार हैं। गुजरात में पहले पाकिस्तान से प्याज आता था, लेकिन भारत ने सब्जियां पाकिस्तान के लिये बंद कर दी हैं तो पाकिस्तान ने भी प्याज का निर्यात बंद कर दिया है। गुजरात में प्याज की कमी के कारण उसके दाम बढ़ सकते हैं।

राज्य में रबी सीजन के दौरान बुवाई 31.35 लाख हेक्टेयर में होती है; लेकिन इस बार बुवाई केवल 28.37 लाख हेक्टेयर में हुई है। कृषि हितधारकों ने कहा कि बुवाई में गिरावट मुख्य रूप से खराब मानसून और सिंचाई के लिए पानी की कम उपलब्धता के कारण है। तीनों फसलें मुख्य रूप से सौराष्ट्र क्षेत्र में उगाई जाती हैं, जो कि एक गंभीर जल संकट से गुजर रहा है। अग्रणी किसानों ने कहा कि बड़े पैमाने पर फसल खराब होने और अच्छी फसल की कोई गारंटी नहीं होने के कारण, कई लोगों ने चारा बोने का विकल्प चुना है।

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एक वरिष्ठ कृषि अधिकारी ने कहा कि ज्वार, जीरा, सौंफ और चारे को छोड़कर, राज्य में 17 प्रमुख फसलों की बुवाई 100% से कम रही है। आमतौर पर, जनवरी के पहले सप्ताह तक सभी फसलों की बुवाई लगभग 100% होती है। लेकिन जनवरी 2018 में, 21 में से 13 फसलों ने 100% या अधिक बुवाई दर्ज की थी। अधिकारी ने कहा कि गर्मियों की वजह से बुवाई भी प्रभावित होने के आसार हैं। सरकार ने रबी फसलों के लिए नर्मदा के पानी को छोड़ने को तर्कसंगत बनाया था, लेकिन अब गर्मियों की वजह से सरकार नर्मदा जलाशय से फसलों के लिए पानी नहीं छोड़ेगी। सरकार नर्मदा का पानी पेयजल आपूर्ति के लिए आरक्षित रखेगी।

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