• search
गांधीनगर न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

गुजरात का चुनावी चक्रव्यूह: कांग्रेस के 'खाम' के जवाब में भाजपा का 'ओपा', दोनों को जानिए यहां

|

Gujarat News in Hindi, गांधीनगर। लोकसभा चुनाव (indian general election 2019) से पहले गुजरात में 'खाम' और 'ओपा' सिद्धांत पर नजर डाली जाए तो ऐसा लग रहा है कि गुजरात में जातिवाद की राजनीति बदल गई है। 'खाम' सिद्धांत को कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री माधवसिंह सोलंकी ने अपनाया था। जिसके बाद भाजपा ने 'ओपा' सिद्धांत पर काम करना शुरू कर दिया। जीत के लिहाज से भाजपा के लिये पिछले चुनावों में ये सिद्धांत फायदेमंद रहा है। गुजरात में खाम यानि क्षत्रिय, हरिजन, आदिवासी और मुस्लिम और ओपा मतलब ओबीसी, पाटीदार और आदिवासी होते हैं।

'खाम' की वजह से कांग्रेस ने खोया पाटीदार बहुमत

'खाम' की वजह से कांग्रेस ने खोया पाटीदार बहुमत

राज्य में चुनाव जीतने के लिए माधवसिंह सोलंकी ने 'खाम' को जब चुनावी हथियार बनाया, तब पाटीदार समुदाय कांग्रेस से नाराज होकर नये विकल्प की खोज में था। कांग्रेस के 'खाम' सिद्धांत के बाद पाटीदार भाजपा की ओर झुकने लगे थे। 1995 के विधानसभा चुनाव में पाटीदारों के सहारे भाजपा ने पूर्ण बहुमत से सरकार की रचना की थी।

गुजरात में ओबीसी समुदाय की जनसंख्या 43%

गुजरात में ओबीसी समुदाय की जनसंख्या 43%

गुजरात में ओबीसी समुदाय की जनसंख्या 43% है, जो सबसे अधिक है। फिर 16% आदिवासी आबादी और 12.6% पाटीदार समुदाय हैं। राज्य में मुसलमानों की संख्या 10 प्रतिशत है। SC की जनसंख्या 8% है और क्षत्रियों की संख्या 6% है। इसके अलावा दो प्रतिशत ब्राह्मण, दो प्रतिशत वनिया, एक प्रतिशत जैन, 0.52 प्रतिशत ईसाई, 0.05 प्रतिशत बौद्ध और अन्य समुदायों के 1.83 प्रतिशत हैं।

8 वीं तक पढ़े हैं भाजपा के कुंडारिया, बीवी के नाम पर खुद से भी ज्यादा प्रॉपर्टी; ये ऐसे उम्मीदवार जिन पर कोई केस दर्ज नहीं

मोदी की चाल से टूट गई थी कांग्रेस की वोटबैंक

मोदी की चाल से टूट गई थी कांग्रेस की वोटबैंक

बदलते समय में ओबीसी आबादी और मतदाता किसी भी चुनाव में प्रभावी हो गए हैं। 26 लोकसभा सीटों पर ओबीसी और पाटीदारों की आबादी हर जगह पाई जाती है। जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब उन्होंने भाजपा की पाटीदारों की पार्टी की परिभाषा बदल दी थी, क्योंकि केवल वह पाटीदारों से सत्ता हासिल नहीं कर सकते थे। गुजरात में ओबीसी की संख्या बढ़ रही थी। मोदी ने अन्य समुदायों के नेताओं को भाजपा में शामिल कराया तो कांग्रेस की वोटबैंक टूट गई थी।

मोदी की कूटनीतिक चाल से भाजपा राज्य में पिछले तीन विधानसभा चुनावों में सफल रही। मोदी ने चुनावी माहौल बनाने के लिये ओबीसी, पाटीदार औऱ आदिवासी को अपनी पार्टी में ज्यादा महत्व दिया था। अब 2019 के लोकसभा चूनाव में भी भाजपा ये तीन समुदाय को साथ लेकर चल रहा है। यह संयोजन भाजपा द्वारा घोषित उम्मीदवारों में देखा जाता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता माधवसिंह के खाम सिद्धांत का गुजरात में कोई वजूद नहीं रह पाया है।

गुजरात में 25 सालों से भाजपा की सरकार, कांग्रेस की हार

गुजरात में 25 सालों से भाजपा की सरकार, कांग्रेस की हार

गुजरात में पिछले 25 सालों से भाजपा की सरकार है। कांग्रेस हर चुनाव हार जाती है, जिसका मुख्य कारण ओबीसी, पाटीदार और आदिवासी समाज है। पहले यह समाज कांग्रेस के साथ था लेकिन मोदी के आने के बाद वह समाज भाजपा को समर्थन करता हैं। हालाँकि, राज्य में पिछले विधानसभा चुनाव में यह देखा गया है कि आदिवासी समाज कांग्रेस के पक्ष में वापस आ रहा है।

पढ़ें: 6 बार MP रहे इस नेता की हाईट इतनी ज्यादा कि जब संसद में फोटो खिंचते थे तो सबसे पीछे खड़ा होने के लिए कह दिया जाता था

मोदी औऱ शाह की जनसभायें आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा

हालांकि, अब भाजपा को चिंता सताई जा रही है कि आदिवासी समुदाय यदि कांग्रेस के उम्मीदवार को वोट देता है, तो वह भाजपा के लिये मुश्किलें बढ़ा देगा। इसलिये भाजपा के चुनावी अभियान में मोदी औऱ अमित शाह की जनसभायें आदिवासी क्षेत्रों में ज्यादा तय की गई हैं।

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Gujarat: BJP's OPA against congress's KHAM at lok sabha election 2019
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more