2014 में राहुल नहीं इन युवा चेहरों का होगा बोलबाला

नयी दिल्ली। राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम विधानसभा चुनाव के नतीजों साफ कर दिया है कि अब देश पारंपरिक राजनीति से ऊब चुका है। लोग युवा और युवा शक्ति को अपनाने के लिए तैयार हो गए है। दिल्ली चुनाव में जिस तरह से लोगों ने आम आदमी पार्टी को अपना समर्थन दिया उससे देश का मूड सबके सामने आ गया है। लोगों ने युवाओं को पसंद किया और उन्हें अपना नेता चुना।

देश की राजनीति में युवाओं की धमक बढ़ रही है। कई युवा नेताओं ने अपनी मेहनत से सियासत की दुनिया में अपना खास मुकाम बनाया। राहुल गांधी, अखिलेश यादव, ज्योतिराज सिंघिया जैसे कई युवा नेता राजनीति के स्तंभ बन गए है। और ये स्तंभ 2014 के लोकसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं। सच पूछिए तो 2014 में इन्हीं का बोलबाला रहेगा।

ये वो हैं जिनका मनोबल उन्हें चुनौतियां के लिए तैयार करता है। भारत दुनिया का दूरसा ऐसा देश है जहां आधे से ज्यादा आबादी युवाओं की है। ऐसे में राजनीति में युवाओं की बढ़ती भागीदारी बदलाव का पर्याय बनती जा रही है। युवाओं में काम करने की क्षमता, सोचने- समझने की ताकत और तकनीक का ज्ञान वयोदृद्ध नेताओं की तुलना में कहीं ज्यादा होता है। ऐसे में देश युवाओं पर अपना विश्वास दिखा रहा है। जिस रफ्तार से देश में युवा बढ़ रहे है उसी रफ्तार से देश में युवा नेतृत्व। आपको देश के कुछ ऐसे युवा चेहरों से रुबरु करवाते है जिनपर अब राजनीति की साख टिकी हुई है। तो देर किस बात की है, एक-एक कर स्लाइडर पलटते जाइये और देखते जाइये कौन हैं देश के युवा चेहरे।

अरविंद केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल

दिल्ली की राजनीति से चमके अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी की सियासत की और पहली बार चुनाव लड़कर ही सबको दिखा दिया कि राजनीति विरासत में मिलने वाली चीज नहीं बल्कि ईमानदारी से अर्जित करने वाला ज्ञान है। राजनीति में फैले भ्रष्टाचार को हथियार बनाकर अरविंद केजरीवाल ने सबको चौंका दिया। 2014 में आम आदमी पार्टी को ज्यादा से ज्यादा सीटें दिलाना इनकी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

अखिलेश यादव

अखिलेश यादव

39 साल के अखिलेश यादव 2012 में चमकने वाले नेताओं की सूची में सबसे ऊपर है। अपनी युवा शक्ति और आधुनिक राजनीति की समझ-बूझ के दम पर उन्होंने यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार बना दी। यूपी विधानसभा चुनाव में सपा की जीत के बाद अखिलेश ने यूपी की कमान संभाली। 2014 में उनके सामने चुनौती है खुद को एक परिपक्व नेता के तौर पर साबित करने और सपा का चेहरा बनने की।

प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी

40 साल की प्रियंका गांधी का नाता गांधी परिवार से रहने के बावजूद भी वो कभी सीधे तौर पर राजनीति में शामिल नहीं हुई। प्रियंका सिर्फ कांग्रेस के कार्यकर्त्ता के तौर पर काम करती रहीं है। वो अपनी मां सोनिया गांधी और भाई राहुल गांधी के लिए लोगों से वोट मांगती है और पार्टी का प्रचार करती है। संकट से घिरी कांग्रेस के लिये अपने ही संसदीय क्षेत्र से वोट जुटाना इनके लिये बड़ी चुनौती होगी।

उमर अब्दुल्लाह

उमर अब्दुल्लाह

उमर अब्दुल्ला जम्मू और कश्मीर के अब तक के सबसे युवा और प्रदेश के 11 वें मुख्यमंत्री हैं। उमर ने कांग्रेस के साथ मिलकर 5 जनवरी 2009 को गठबंधन सरकार बनाई थी। लेकिन सीएम के तौर पर उमर अभी तक कुछ ऐसी कोई उपलब्धि हासिल नहीं कर पाए हैं जो उन्हें काबिल सीएम की कतार में खड़ा कर सके। 2013 में उनके सामने खुद को साबित करने की चुनौती है।

वरुण गांधी

वरुण गांधी

32 साल के वरुण गांधी उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से सांसद वरुण गांधी बीजेपी का युवा चेहरा हैं। लेकिन वरुण अभी तक अपने उग्र तेवरों की वजह विवाद में रहे हैं। उनके उग्र तेवर पार्टी और उनके दोनों के लिए मुश्किलें खड़ी करते रहे हैं। जाहिर है आने वाले वक्त में उन्हें परिपक्व नेता के तौर पर खुद को साबित करना है। यूपी में इनका बोलबाला जरूर रहेगा।

जयंत सिंह चौधरी

जयंत सिंह चौधरी

चौधरी चरण सिंह के पौत्र और अजीत सिंह के पुत्र जयंत सिंह को युवा नेताओं की फेहरिस्त में पहली पंक्ति में गिना जा सकता है। टप्पल में हुए किसान आंदोलन के बाद उनकी पहचान एक जुझारू नेता के रुप में होती है। यूपी में कांग्रेस-आरएलडी गठबंधन के शिल्पकारों में उनका नाम सबसे पहले आता है। राहुल गांधी से उनकी दोस्ती से ही इस गठबंधन के बीज पड़े थे।

ज्योतिर्रादित्य सिंधिया

ज्योतिर्रादित्य सिंधिया

मध्य प्रदेश के गुना से कांग्रेस सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के पुत्र हैं। सिंधिया राहुल की युवा ब्रिगेड के प्रमुख सदस्य हैं और वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री भी रह चुके हैं। 2014 में मध्य प्रदेश में कांग्रेस को संवारने का ठेका इन्हीं के पास है।

नवीन जिंदल

नवीन जिंदल

42 साल के नवीन जिंदल कांग्रेस सांसद होने के साथ-साथ जिंदल स्टील के मालिक है। एक साथ दो-दो जिम्मेदारी संभालने वाले जिंदल ने दोनों ही जगहों पर कामयाबी हासिल की है। वो जितने बेहतर बिजनेसमैन है उतने ही अच्छे राजनेता। हाल ही में जी-जिंदल विवाद में उनका नाम सुर्खियों में छाया हुआ था।

सचिन पायलट

सचिन पायलट

35 साल के सचिन पायलट दिवंगत नेता राजेश पायलट के बेटे है। अपने पिता की मौत के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अपनी आधुनिक राजनीतिक सोच के कारण कांग्रेस में राज्यमंत्री का औहदा तक पाया है। भविष्य में इन्हें राजनेताओं की सूची में टॉप पर देखा जा रहा है।

आस्था संगमा

आस्था संगमा

32 साल की आस्था संगमा राजनीतिक की सबसे युवा चेहरों में से एक है। 29 साल की उम्र में आस्था ने यूनियन कॉउंसिल को ज्वाइंट किया और 15वीं लोकसभा की सबसे युवा नेता बन गई। अस्था संगमा पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा की बेटी है।

सुप्रिया सूले

सुप्रिया सूले

43 साल की सुप्रिया सूले एनसीपी से सांसद है। कृषि मंत्री शरद पवार की बेटी सुप्रिया राजनीतिक के युवा चेहरों में शामिल है। क्षेत्रिय राजनीति को छोड़ अब को राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से सक्रिय हो रही है। हलांकि उनके साथ कई विवाद जुड़े रहे है।

मिलिंद देवड़ा

मिलिंद देवड़ा

36 साल के मिलिंद देवड़ा महाराष्ट्र से सांसद है। अपनी राजनीतिक सूझबूझ के कारण ही वो इतनी तेजी से चमके। यूपीए सरकार में उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। अपने पिता मूरली देवड़ा से उन्होंने सियासी दांव पेंच सीखें है।

अनुराग ठाकुर

अनुराग ठाकुर

38 साल के अनुराग ठाकुर ने बीजेपी युवा विंग की कमान संभाल रखी है। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के बेटे अनुराग क्रिकेट के शौकीन रहे है। अपने इसी शौक के चलते वो बीसीसीआई के ज्वाइंट सेक्रेटरी के पदभार को संभाल रहे है।

दीपेंदर हुड्डा

दीपेंदर हुड्डा

हरियाणा के रोहतक से सांसद दीपेंदर मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के पुत्र हैं। टीम राहुल के सदस्य दीपेंदर हर मोर्चे पर राहुल के साथ डटे दिखाई देते हैं। लेकिन उन्हें अपने पिता की वजह से जाना जाता है, उन्हें अभी अपने दम पर खुद की पहचान बनानी है।

कुमार विश्वास

कुमार विश्वास

कुमार विश्वास नेता नहीं हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी की चुनावी रणनीति बनाने में इनका अहम भूमिका रहती है। अब यही भूमिका इन्हें लोकसभा के लिये अदा करनी है।

राहुल गांधी

राहुल गांधी

42 साल के राहुल गांधी युवा राजनेताओं में पहले नबंर पर है। कांग३ेस की कमान उनके हाथों में है। उत्तर प्रदेश के अमेठी से लोकसभा सांसद राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2014 के लोकसभा चुनाव हैं। इसके अलावा मनमोहन के बाद राहुल ही कांग्रेस की ओर से पीएम पद के उम्मीदवार हैं, ऐसे में उनके लिए आगे का रास्ता और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

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