आज के दिन सौ साल पहले भारत लौटे थे बापू
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला)। आज ही के दिन सौ साल पहले महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से सौ साल पहले भारत लौटे थे। स्वदेश लौटते ही गांधी जी ने देश के चप्पे-चप्पे में जाकर घूमना शुरू कर दिया। आइये जाने उनकी यात्राओं के कुछ अनुभव। इसकी प्रासंगिकता आज इसलिये और बढ़ जाती है, क्योंकि गांधी जी एक प्रवासी भारतीय के रूप में विदेश में थे और आज ही के दिन भारत आये थे और इस वक्त देश में प्रवासी भारतीय सम्मेलन चल भी रहा है। तो क्यों न गांधी जी के उन दिनों को याद किया जाये।

1915 में क्या हुआ वाराणसी में
गांधी जी ने इस पवित्र शहर को गंदगी से अटा पाया। गलियों, सडक़ों और मंदिरों के इर्द-गिर्द हर जगह गंदगी। उन्होंने आत्मकथा में लिखा कि बनारस में मैं जहां गया, वहां गंदगी देखी। काशी विश्वनाथ मंदिर में उन्होंने दक्षिणा देने से इंकार कर दिया बल्कि पंडे के सामने खुद हाथ फैला दिए कि उसे उन्हें दान देकर गरीबों के लिए कुछ मदद करनी चाहिए। क्रुद्ध पंडे ने शाप दिया, इस अपमान के लिए वह सीधे नरक में जाएंगे।
1915 में क्या हुआ पुणे में
बापू जब वह पुणे पहुंचे और जिस कॉलोनी में ठहरे, वहां के शौचालय उन्होंने साफ करने शुरू किए तो हिन्दू नाराज हो गए। उन्हें लगा कि ये शख्स ऐसा काम क्यों कर रहा है, जो शुद्रों के लिए तय है। लिहाजा उन्हें सर्वेंट्स सोसायटी आफ इंडिया के सदस्यों ने पास तक बिठाने से मना कर दिया। वरिष्ठ लेखक और पत्रकार संजय श्रीवास्तव के अनुसार, गोखले चाहते थे कि गांधी जी को इसकी सदस्यता दी जाए लेकिन ज्यादतर सदस्यों ने इस पर वीटो कर दिया।
1915 में क्या हुआ कोलकाता में
जब उन्होंने कलकत्ता में टैगोर से शांति निकेतन में छात्रों से अपने शौचालय खुद साफ करने की बात कही तो टैगोर ने इसे खारिज कर दिया। टैगोर ने कहा-छात्र यहां पढने आए हैं, सफाई के लिए नहीं। लेकिन कुछ हद तक छात्रों को स्वच्छता की ओर प्रेरित किया गया। हालांकि कलकत्ता के अभिजात्य वर्ग ने जब गांधी की इन बातों को सुना तो काफी तीखी प्रतिक्रिया हुई।












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