कैनेडी की बरसी- याद रखेगी दुनिया चमत्कारी प्रेसिडेंट को
नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) आज जॉन एफ कैनेडी की मौत को 51 साल पूरे हो रहे हैं। आज भी उस बेहद खूबसूरत और चमत्कारी राष्ट्रपति को अमेरिका भूला नहीं है। वे भारत के भी मित्र थे।

कैनेडी का पूरा अमेरिका स्मरण करता है। कायदे से देखा जाए तो पूरी दुनिया उन्हें भूली नहीं है। उनकी शख्सियत ही कुछ इस तरह की थी। वे वास्तव में स्टैट्स्मन थे। 22 नवंबर 1963 को डलास, टेक्सास में केनडी की हत्या कर दी गई थी।
इस जुर्म के लिए ली हार्वी ऑस्वाल्ड पर आरोप लगाया गया था परन्तु इससे पहले की उस पर मुकदमा चलाया जा सके, आरोप लगने के दो दिन बाद ही जैक रूबी ने उसकी गोली मार कर हत्या कर दी।
सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपति
कैनेडी अमेरिका के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपतियों में से एक थे। उन्होंने ही कहा था कि ‘यह मत पूछो कि देश ने तुम्हें क्या दिया बल्कि ये पूछो कि तुमने देश को क्या दिया'। शीत युद्ध में अमेरिका की भूमिका के संबंध में दिए गए 14 मिनट के भाषण में कैनेडी ने अमेरिकियों का आह्वान किया था, ‘‘यह मत पूछो कि तुम्हारा देश तुम्हारे लिए क्या कर सकता है , यह पूछो कि तुम देश के लिए क्या कर सकते हो ।'' उनके इस वक्तव्य को सुनकर कोई भी समझ सकता है कि वे कितनी बड़ी शख्सियत के धनी थे।
भारत के मित्र
कैनेडी भारत को चाहते थे। वे भारत के समाज, संस्कृति और गौरवमयी इतिहास से प्रभावित थे। कहने वाले तो कहते हैं कि अगर उनकी अकाल मौत न होती तो भारत-अमेरिका रिश्ते अलग तरह से विकसित होते।
भारत ने 1962 के युद्ध में मिली हार के बाद चीन की सीमा पर नजर रखने के लिए अमरीका के 'यू-2'जासूसी विमानों को अपने हवाई ठिकाने के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। कैनेडी से इस बाबत नेहरु ने बात की थी। भारतीय प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 11नवंबर 1962 को चीन से लगी सीमा पर नजर रखने के लिए यू-2 मिशन को भारतीय क्षेत्र में उड़ान भरने की इजाजत दी थी।












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