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Tax Free Budget: क्या होता है टैक्स फ्री बजट, जानें किन राज्यों ने पेश किया ऐसा बजट

Tax Free Budget: त्रिपुरा के वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय ने 7 जुलाई 2023 को चालू वित्त वर्ष के लिए ₹27,654 करोड़ के घाटे का बजट पेश किया। जिसमें किसी भी तरह का कोई नया टैक्स प्रस्ताव नहीं किया गया है। इसे ही टैक्स फ्री बजट कहा जाता है यानि बजट में कोई टैक्स बढ़ोतरी नहीं की गयी है। जो बीते साल का टैक्स देय था, वही जारी रहेगा।

टैक्स फ्री बजट पेश करने वाला त्रिपुरा भारत का इकलौता राज्य नहीं है। इससे पहले भी हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में टैक्स फ्री बजट पेश किया जा चुका है। चलिए जानते हैं, इन पांच राज्यों ने कब टैक्स फ्री बजट पेश किया था।

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हिमाचल प्रदेश (2023-24)

मार्च 2023 में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपना पहला बजट पेश किया। सुखविंदर सिंह सुक्खू का यह पहला बजट था। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में बीते तीन दशक से टैक्स फ्री बजट पेश किया जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष भी बजट में कोई भी नया कर (टैक्स) नहीं लगाया है। 2023-24 के लिए 53 हजार 413 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था।

अपने बजटीय भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023-24 में राजस्व प्राप्तियां ₹37,999 करोड़ रहने का अनुमान है। जबकि राजस्व व्यय ₹42,704 करोड़ अनुमानित है। इस प्रकार कुल राजस्व घाटा ₹4,704 करोड़ अनुमानित है। बजट में राजकोषीय घाटा ₹9,900 करोड़ अनुमानित है, जोकि राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 4.61 प्रतिशत है।

उत्तर प्रदेश बजट (2023-24)

फरवरी 2023 में योगी सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा बजट पेश किया था। इस कर मुक्त बजट का आकार 6 लाख 90 हजार 242 करोड़ 43 लाख रुपये (₹6,90,242.43 करोड़) है। राज्य सरकार का पिछले वर्ष का मूल बजट ₹6.15 लाख करोड़ और अनुपूरक बजट ₹33,769 करोड़ का था। इस बजट में सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी ज्यादातर योजनाएं हैं।

इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि यह बजट यूपी को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर स्थापित करने के लिए होगा और एक ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लिए नींव साबित होगा। साल 2016-17 में बजट करीब 3 लाख 40 हजार करोड़ के आस-पास था। हमने बजट के दायरे को बढ़ाया है। जनता पर कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं लगाया है।

राजस्थान बजट (2023-24)

10 फरवरी 2023 को राजस्थान के मुख्यमंत्री व वित्त मंत्री अशोक गहलोत ने अपनी सरकार का आखिरी बजट पेश किया था। क्योंकि, इस साल के आखिर में चुनाव होने हैं। ऐसे में सीएम गहलोत ने बजट में इस बात को ध्यान में रखते हुए हर तबके के लिए कुछ न कुछ ऐलान किया। इसमें कई लोक लुभावन घोषणाएं की गयी। साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के बजट 2023-24 में किसी नये टैक्स की घोषणा नहीं की गयी।

इस वजह से राजस्थान बजट 2023-24 के बजट अनुमानों में राजस्व घाटा 24 हजार 895 करोड़ 67 लाख रुपये माना गया है। जबकि राजस्थान बजट 2023-24 का राजकोषीय घाटा 62 हजार 771 करोड़ 92 लाख जो जीएसडीपी का 3.98 प्रतिशत है। अशोक गहलोत फरवरी, 2023 में जो बजट पेश किया था, उसमें कुल राजस्व 2 लाख 58 हजार 883 करोड़ 68 लाख रुपये का था।

पंजाब बजट (2022-23)

पंजाब में सरकार बनाने के बाद मार्च 2022 में भगवंत मान सरकार ने अपना पहला बजट पेश किया था। बजट में चुनाव में किये गये वादों की पूरी छाप थी। इस बजट में वित्तीय स्थिति को बहाल करने, सुशासन के वादों को पूरा करने और स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर बजट पेश किया गया था।

इस बजट में पंजाब सरकार के खर्च का अनुमान ₹1,55,859.78 करोड़, जबकि प्राप्ति ₹1,51,129.29 करोड़ थी। इस पर वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने कहा कि इस साल बगैर कोई टैक्स लगाये आम आदमी पार्टी की सरकार ₹95378 करोड़ का राजस्व बढ़ाएगी।

गोवा बजट (2022-23)

मार्च 2022 में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने अपने राज्य के लिए ₹24,467.40 करोड़ का बजट पेश किया था। इस बजट की सबसे खास बात यह थी कि इसमें किसी अतिरिक्त टैक्स का प्रस्ताव नहीं था। तब सावंत ने कहा था कि 2022-23 के लिए गोवा का सकल राज्य घरेलू उत्पाद ₹91,416.98 करोड़ रहने का अनुमान था, जो 7.07 प्रतिशत की वृद्धि थी।

टैक्स क्या होता है?

टैक्स कई प्रकार के होते हैं। जैसे स्टेट टैक्स (राज्य कर), सेंटर गवर्नमेंट टैक्स (केंद्र सरकार कर), डायरेक्ट टैक्स (प्रत्यक्ष कर), इन-डायरेक्ट टैक्स (अप्रत्यक्ष कर) इत्यादि। भारत में टैक्स को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया हैं। डायरेक्ट टैक्स और इन-डायरेक्ट टैक्स।

टैक्स लैटिन शब्द 'टैक्सो' से आया है। यह एक अनिवार्य शुल्क या वित्तीय शुल्क होता है जो सरकार द्वारा किसी व्यक्ति या संस्था पर राजस्व जुटाने के लिए लगाया जाता है। जमा हुए टैक्स की कुल राशि को सरकार द्वारा विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए उपयोग किया जाता है। भारतीय कानून के मुताबिक जानबूझकर टैक्स भुगतान न करने पर जुर्माना या सजा मिल सकती है।

डायरेक्ट टैक्स

● इसमें टैक्स करदाता (टैक्स देने वाला) द्वारा सीधे सरकार को टैक्स दिया जाता है।

● भारत में इस प्रकार के टैक्स का सबसे आम उदाहरण इनकम टैक्स है।

● सरकार की नजर में डायरेक्ट टैक्स से कुल टैक्स इनकम का अनुमान लगाना आसान होता है, क्योंकि यह करदाताओं की इनकम से सीधा संबंध रखता है।

इन-डायरेक्ट टैक्स

● इस टैक्स को अलग तरीके से जमा किया जाता है और यह टैक्स सामान और सेवाओं के उपयोग पर आधारित होते हैं।

● जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि इन-डायरेक्ट टैक्स का भुगतान सामान/सेवाओं के उपभोक्ता सीधे सरकार को नहीं करते है।

● सरकार सामान/सेवा के विक्रेता (बेचने वाला) से इन-डायरेक्ट टैक्स प्राप्त करती है।

● विक्रेता, बदले में, सामान/सेवा के खरीदार से टैक्स लेता है।

● इन-डायरेक्ट टैक्स के सामान्य उदाहरणों में जीएसटी, वैट, इंफ्रास्ट्रक्चर सेस, रोड टैक्स, मनोरंजन टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स आदि शामिल हैं।

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