Myositis: मायोसाइटिस को लेकर बढ़ रही है सर्चिंग, जानिये बीमारी के लक्षण और बचाव के उपाय
इन दिनों भारत सहित दुनियाभर के लोगों द्वारा गूगल पर सबसे ज्यादा मायोसाइटिस बीमारी को लेकर सर्चिंग की जा रही है। आखिर क्या है यह बीमारी?

Myositis: एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर के लोगों ने मायोसाइटिस बीमारी के बारे में जानने के लिए सबसे ज्यादा सर्च किया है। इस बीमारी को लेकर लोगों में कई सवाल है कि आखिर यह बीमारी क्या है? इंसानों के लिए यह कितनी खतरनाक साबित हो सकती है और इसके लक्षण क्या हैं? गौरतलब है कि इंडियन जर्नल ऑफ रूमेटोलॉजी के मुताबिक दुनिया में एक लाख में से महज चार से बीस लोगों में यह दिक्कत सामने आती है।
कैसे ट्रेंड में आई मायोसाइटिस
मायोसाइटिस बीमारी भारत में सबसे ज्यादा तब ट्रेंडिंग में आई जब साउथ एक्ट्रेस सामंथा रूथ प्रभु ने अपनी इन्स्टाग्राम पोस्ट के जरिए अपने फैंस को इस बीमारी के बारे में जानकारी दी। अपनी पोस्ट में उन्होंने बताया कि वह मायोसाइटिस नाम की बीमारी से जूझ रही है। इसके कारण वह आजकल काफी दर्द में है। लेकिन उन्हें अपने आत्मविश्वास और डॉक्टर्स पर भरोसा है कि वह जल्द ही ठीक हो जाएंगी। बीमारी को लेकर ऐसी पोस्ट पढ़ने के बाद लोगों ने गूगल सर्च करना शुरू कर दिया। इसके बाद से ही यह रोग गूगल पर ट्रेंड कर रहा है।
क्या होती है मायोसाइटिस बीमारी
मायोसाइटिस का अर्थ मसल्स में सूजन और दर्द से होता है। मायोसाइटिस का पूरा नाम इडियोपैथिक इंफ्लेमेटरी मायोसाइटिस होता है। ऐसा बताया गया है कि यह बीमारियों का समूह होता है। जिसमें मांसपेशियों के अलावा त्वचा और फेफड़ों में भी सूजन हो जाती है। इन समस्याओं से जूझ रहे लोगों को कनेक्टिंग टिशू डिजीज, ल्यूपस, सिस्टमेटिक स्क्लेरोसिस और ऑटोइम्युन नेकोटाइजिंग मायोपैथी हो सकती है। हालांकि, बीमारी डायग्नोस्ट होने पर धीरे-धीरे रिकवरी भी हो जाती है। ऐसे में इस बीमारी से डरने की नहीं सतर्क रहने की जरूरत है।
मायोसाइटिस के लक्षण
मायोसाइटिस बीमारी के लक्षण बहुत सामान्य हैं। कुछ खास टेस्ट के जरिए ही इस बीमारी का पता चल पाता है। लेकिन इस बीमारी के मरीजों में कुछ लक्षण देखने को मिले हैं। इनमें त्वचा पर चकत्ते पड़ना, मसल्स का कमजोर होना, उनमें दर्द और सूजन रहना, हर समय थकान रहना, उठने बैठने में दिक्कत होना, सीढ़ियां चढते समय सांस फूलना, हाथों की त्वचा मोटी पड़ जाना, हाथों की पकड़ का कमजोर होना, खाना निगलने में समस्या होना, मरीज के कंधें, पांव, हिप्स और स्पाइनल मसल्स में दिक्कतें होना जैसे लक्षण इसमें दिखाई पड़ते हैं।
मायोसाइटिस के कारण
मायोसाइटिस बीमारी के होने की कोई एक वजह सामने नहीं आई है। यह कई तरह से हो सकती है। डॉक्टर्स के मुताबिक चोट, दवाएं, इंफेक्शन या ऑटोइम्यून डिजीज मायोसाइटिस का कारण हो सकती हैं। मसल्स की चोट का ज्यादा गंभीर रूप (रबडोमायोलिसिस) भी मायोसाइटिस से ही जुड़ा है। यह एक ऐसी अवस्था है। जहां आपकी मसल्स में चोट लगने से वह जल्दी टूट जाती हैं।
आमतौर पर यदि आपको कोई इंफेक्शन हो जाता है, तो आपका इम्यून सिस्टम उस बैक्टीरिया अथवा वायरस पर हमला करता है, जो आपको बीमार कर रहा है। ऑटोइम्यून बीमारियों में आपका इम्यून सिस्टम भ्रमित हो जाता है और वह वायरस के बजाय आपके शरीर पर हमला करने लगता है। मायोसाइटिस के मामले में आपका इम्यून सिस्टम आपकी मसल्स पर हमला करता है। ऑटोइम्यून मायोसाइटिस के तीन मुख्य प्रकार हैं। डर्माटोमायोसाइटिस, पॉलीमायोसाइटिस और इंक्लूजन बॉडी मायोसाइटिस।
सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस जैसे अन्य ऑटोइम्यून रोग भी मायोसाइटिस जैसे लक्षण पैदा कर सकते हैं। इसी तरह विभिन्न प्रकार की दवाएं मायोसाइटिस का कारण बन सकती हैं। सबसे आम दवाओं में से एक जो मायोसाइटिस का कारण बन सकती है, वह स्टैटिन है। स्टैटिन ऐसी दवा है जिसका उपयोग हाई कोलेस्ट्रॉल को कम करने में किया जाता है।
स्टैटिन थेरेपी का सबसे आम साइड इफेक्ट मसल्स में दर्द है। लेकिन स्टेटिन थेरेपी से मायोसाइटिस होने की संभावना कम है। मायोसाइटिस का सबसे आम संक्रामक कारण वायरल इंफेक्शन है जैसे कॉमन कोल्ड। वायरस जैसे कि COVID-19 को भी मायोसाइटिस का एक कारण दिखाया गया है।
कैसे करें मायोसाइटिस का उपचार
रिपोर्ट्स के मुताबिक मायोसाइटिस का विशेष इलाज अभी तक नहीं मिला है। हालांकि इसके लक्षणों की गंभीरता के मुताबिक कुछ दर्द निवारक और सूजन रोधी दवाईयां मरीजों को दी जाती हैं।
अगर आपको ऊपर दिए गए कुछ लक्षण प्रभावित कर रहे हैं तो आपको तुरंत एक्सपर्ट डॉक्टर की सलाह लेकर दवाईयों का सेवन शुरू करना चाहिए। खुद से उसका इलाज करना भारी पड़ सकता है। ऐसे में इस बीमारी से स्टेरॉइड्स और इमूनोसप्रेसिव दवाइयों के जरिए मरीज को राहत दी जाती है। साथ ही फिजिकल थेरेपी, एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग और योगा के जरिए भी इलाज में मदद मिलती है।
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