IMF Bailout: क्या है अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का बैलआउट पैकेज, जिसकी पाकिस्तान कर रहा है मांग
आईएमएफ और दुनिया के अन्य संस्थान पाकिस्तान को अब कर्ज देने से हाथ खींच रहे हैं। पाकिस्तान पिछले 3 दशक में आईएमएफ के सामने 23 बार हाथ फैला चुका है।

IMF Bailout: पाकिस्तान पिछले कुछ वक्त से भीषण आर्थिक संकट से गुजर रहा है। इसे लेकर पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) एक बार फिर से अगले सप्ताह ऑनलाइन बातचीत शुरू करने जा रहे हैं। दरअसल, बीते 31 जनवरी से 9 फरवरी 2023 तक नाथन पोर्टर के नेतृत्व में आईएमएफ की एक टीम ने पाकिस्तान में वित्तमंत्री इशाक डार के साथ बैठक की। इस टीम की दो दौर की बातचीत हो चुकी है। यह सारी कवायद आईएमएफ से बेलआउट पैकेज हासिल करने के लिए की जा रही है। हालांकि, बातचीत बिना किसी समझौते के ही खत्म हो गई थी। दरअसल, पाकिस्तान सरकार अपनी जनता पर जो भी खर्च कर रही है उससे आईएमएफ को दिक्कत है। आईएमएफ का कहना है कि पाकिस्तान के वित्तीय घाटे और राजस्व में बड़ा अंतर हैं।
वहीं, बेलआउट के लिये पाकिस्तान सरकार के वादों पर आईएमएफ को भरोसा नहीं है। इस बीच दूसरे देशों की तरफ से पाकिस्तान को कर्ज मिलने की बातें जो पाकिस्तान सरकार द्वारा कही गई हैं, उनकी विश्वसनीयता पर भी आईएमएफ को भरोसा नहीं है। दरअसल साल 2019 में तत्कालीन इमरान खान की सरकार के दौरान आईएमएफ ने पाकिस्तान को बेलआउट पैकेज के तहत 6.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर मदद करने का हस्ताक्षरित वादा किया था। अब इसी वादे के तहत पाकिस्तान आईएमएफ से 1.1 बिलियन डॉलर की एक और किश्त मांग रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष क्या है?
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानि आईएमएफ का गठन साल 1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में किया गया था। 27 दिसंबर 1945 को यह परिचालन में आया और आज यह एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जिसमें 190 देश सदस्य के रूप में शामिल हैं। यह संगठन वैश्विक मौद्रिक सहयोग को बढ़ावा देने, वित्तीय स्थिरता को सुरक्षित करने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार को सुविधाजनक बनाने, उच्च रोजगार और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और दुनिया भर में गरीबी को कम करने के लिए काम कर रहा हैं। आईएमएफ के तीन मुख्य कार्य हैं: आर्थिक विकास, उधार और क्षमता विकास की देखरेख करना।
आईएमएफ का बेलआउट पैकेज क्या होता है?
बेलआउट, संभावित दिवालियापन के खतरे का सामना कर रहे किसी संस्थान सहित देश को वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाने की एक प्रक्रिया है। बेलआउट पैकेज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लेवल पर दो तरह के होते हैं। जब किसी देश में बैकों या अन्य संस्थानों का आर्थिक ढांचा बिगड़ने लगता है तो उस देश की सरकार स्वयं बेलआउट पैकेज जारी कर सकती है। इसके जरिए देश के संस्थानों को मदद दी जाती है ताकि बिगड़ी अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सके। ठीक इसी तरह, जब पूरे देश की ही हालात बिगड़ने लगती है और आर्थिक संकट गहरा जाता है। तब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष उस देश को बेलआउट पैकेज जारी करता है। इस पैकेज के जरिए उस देश के लिए एक राशि जारी की जाती है, ताकि वहां के आर्थिक हालातों को सुधारा जा सके।
इस बेलआउट पैकेज के कई फायदे होते हैं। पहला यह कि किसी भी देश की आर्थिक व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त होने से बचाना और दूसरी यह कि वहां की आर्थिक व्यवस्था को बचाने के लिए जरूरतभर राशि उपलब्ध कराना। इस पैकेज के जरिए अर्थव्यवस्था को वापस पटरी पर लाने की कोशिश की जाती है।
आईएमएफ के पास पैसा कहां से आता है?
आईएमएफ के पास उसके सदस्य देशों द्वारा अपनी पूंजी सदस्यता (कोटा) के रूप में भुगतान करने से पैसा आता है। आईएमएफ के प्रत्येक सदस्य को एक कोटा सौंपा गया है, जो मोटे तौर पर विश्व अर्थव्यवस्था में इसकी सापेक्ष स्थिति पर आधारित होता है। वहीं वित्तीय कठिनाई में पड़ने पर कोई सदस्य देश वार्षिक तौर पर अपने कोटा का 200 प्रतिशत तक और संचित रूप में 600 प्रतिशत का उधार ले सकता है। इसमें सबसे बड़ा कोटा अमेरिका का 17.7 प्रतिशत है जो विभिन्न देशों के संचयी से भी अधिक है। जबकि जी7 ग्रुप 40 प्रतिशत से अधिक कोटा रखता है। हालांकि आईएमएफ में भारत और रूस जैसे देशों के पास केवल 2.75 प्रतिशत का कोटा है। वहीं आईएमएफ के वर्तमान कुल संसाधन लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हैं।
आईएमएफ का कुल कर्जा
दुनियाभर के सैकड़ों देशों पर आईएमएफ का कर्ज है। आईएमएफ कर्ज किसी एक मुद्रा में न देकर डॉलर, पाउंड, येन, युआन और यूरो, इन पांच प्रमुख मुद्राओं को मिलाकर बनाए गए स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में देता है। आईएमएफ के कुल कर्ज की राशि 111,446,716,287 एसडीआर है। आईएमएफ का सर्वाधिक बकाया अर्जेंटीना पर है जोकि 32,240,927,500 एसडीआर है। पाकिस्तान पर भी कुल 5,722,166,668 एसडीआर आईएमएफ का बकाया है। भारत के अन्य पड़ोसी देशों में श्रीलंका पर 787,892,508 एसडीआर, नेपाल पर 253,225,000 एसडीआर, म्यांमार पर 516,800,000 एसडीआर, और बांग्लादेश पर 1,059,353,100 एसडीआर की राशि बकाया है।
भारत पर आईएमएफ का कर्जा
गौरतलब है कि भारत के पास आईएमएफ का फिलहाल कोई कर्जा नहीं है। भारत इस संस्थान का 27 दिसंबर 1945 से सदस्य है। यानि भारत आईएमएफ का संस्थापक सदस्य देश है। अपनी सदस्यता से लेकर 1993 तक भारत ने आईएमएफ से सात बार कर्जा लिया था। इस कर्जे का पूरा भुगतान 31 मई 2000 तक किया जा चुका है। इस प्रकार भारत ने 1993 के बाद आईएमएफ से कोई कर्जा नहीं लिया है और जो बकाया था वह भी साल 2000 में चुका दिया गया था।
SDR क्या होता है
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SDR का पूरा मतलब Special Drawing Rights से होता है, जिसे हिंदी में विशेष आहरण अधिकार कहा जाता है। वास्तव में एसडीआर कोई मुद्रा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने 1969 में इसे अपने सदस्य देशों के लिये अंतरराष्ट्रीय आरक्षित संपत्ति के रूप में बनाया था। एसडीआर का मूल्य, बास्केट ऑफ करेंसी में शामिल मुद्राओं के औसत भार के आधार पर किया जाता है। इस बास्केट में पांच देशों की करेंसी - अमेरिकी डॉलर, यूरोपियन यूनियन का यूरो, चीन की मुद्रा रॅन्मिन्बी युआन, जापानी येन, ब्रिटेन का पाउंड शामिल होती हैं। एसडीआर एक अकाउंटिंग यूनिट है और इससे कोई सामान नहीं खरीदा जा सकता है, बल्कि देश या संस्थान अपने विदेशी मुद्रा भंडार में उपयोग कर सकता है। सोने व मुद्राओं की तरह एसडीआर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूंजी का एक माध्यम है। आईएमएफ से मिले एसडीआर का आदान प्रदान करके विभिन्न देश आपसी व्यापार कर सकते हैं।
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