Civic Bodies in UP: क्या होते हैं नगर निकाय, जानिए चुनाव, कार्यों और शक्तियों के बारे में
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। यहां प्रशासनिक व्यवस्था का विकेंद्रीकरण शक्तिशाली केंद्र सरकार से लेकर नगर पंचायतों तक किया गया है।

Civic Bodies in UP: बीती 9 अप्रैल को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उत्तर प्रदेश नगर निकायों के चुनावों की घोषणा कर दी गयी। ये चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण का मतदान 4 मई को होगा, जबकि दूसरे चरण का मतदान 11 मई को होगा। मतों की गणना 13 मई को की जाएगी। उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त मनोज कुमार ने बताया कि इस बार प्रदेश में 17 नगर निगमों और 199 नगर पालिकाओं सहित 544 नगर पंचायतों के चुनाव होंगे।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 760 नगर निकायों के 14,684 पदों के लिए मतदान किए जाएंगे। नगर निगम के 17 महापौर और 1420 पार्षदों के चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, नगर पालिका परिषद के 199 अध्यक्षों तथा 5327 सदस्यों और नगर पंचायत के 544 अध्यक्षों सहित 7178 सदस्यों का चुनाव मतपेटियों के जरिए किया जाएगा।
क्या होते हैं नगर निकाय?
साल 1992 में भारतीय संसद द्वारा संविधान में 74वां संशोधन किया गया और इसमें एक नया अधिनियम जोड़ा गया, जिससे नगर पालिकाओं को संवैधानिक दर्जा हासिल हो गया। यह अधिनियम 1 जून 1993 को लागू हुआ। संविधान में नगर निकायों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है, जिन्हें नगर निगम या महापालिका, नगर पालिका और नगर पंचायत कहा जाता है।
नगर निकाय की सबसे बड़ी श्रेणी का नाम नगर निगम है। नगर निगम का गठन उस क्षेत्र में किया जाता है जहां की आबादी पांच लाख से अधिक हो। नगर निगम का प्रमुख मेयर या महापौर होता है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 17 नगर निगम हैं, जिनमें आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, बरेली, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गोरखपुर, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मथुरा-वृन्दावन, मेरठ, मुरादाबाद, प्रयागराज, सहारनपुर, वाराणसी और शाहजहांपुर शामिल हैं।
वहीं नगर पालिका नगर पंचायत से बड़ी और नगर निगम से छोटी श्रेणी है। जिन स्थानों पर एक लाख से पांच लाख तक की आबादी होती है, उन क्षेत्रों में नगर पालिका का गठन किया जाता है। नगर पालिका में नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव होता है।
जहां तक नगर पंचायत का प्रश्न है, यह नगर निकाय की सबसे छोटी श्रेणी है। नगर पंचायत उन क्षेत्रों में स्थापित किए जाते हैं, जो हाल ही में ग्रामीण से शहरी क्षेत्रों में बदले गए हों। इन जगहों पर कम-से-कम 30 हजार और अधिकतम एक लाख की आबादी का होना जरूरी है। नगर पंचायत में नगर पंचायत अध्यक्ष का चुनाव होता है।
चुनावी प्रक्रिया
जिस तरह से ग्रामीण इलाकों में पंचायत का चुनाव होता है, ठीक उसी तरह से शहरी इलाकों में नगर निकाय का चुनाव होता है। हालांकि, कई राज्यों के पंचायत चुनावों में प्रत्याशी किसी राजनीतिक दल द्वारा समर्थित नहीं होते हैं और वे स्वतंत्र चुनाव चिन्ह के जरिए ही चुनाव लड़ते हैं। वहीं, कई राज्य ऐसे भी हैं जहां के प्रत्याशी राजनीतिक दलों द्वारा समर्थित होते हैं।
अगर नगर निगम की बात करें, तो कई राज्यों में पार्षदों का चुनाव जनता द्वारा किया जाता है। चुने गए पार्षद मिलकर मेयर यानी महापौर का चुनाव करते हैं। वहीं कुछ स्थानों पर मेयर का चुनाव सीधा जनता द्वारा किया जाता है। इसी तरह से नगर पालिका और नगर पंचायत में अध्यक्ष और सदस्य का चुनाव होता है। सदस्य को जनता द्वारा चुना जाता है, तो अध्यक्ष को सदस्य चुनते हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों में महापौर, पार्षद, नगर पालिका और नगर पंचायत के अध्यक्षों के साथ-साथ इनके सदस्यों का चुनाव भी सीधे जनता द्वारा किया जाता हैं।
चुनाव लड़ने की योग्यता
नगर निकाय चुनाव लड़ने की एक उम्र सीमा भी होती है। नगर निगम के महापौर, नगर पालिका तथा नगर पंचायत के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी की उम्र 30 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। वहीं, नगर निगम के पार्षदों और नगर पालिका तथा नगर पंचायत के सदस्यों की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष की होनी चाहिए।
नगर निकाय का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी के लिए भारतीय नागरिक होना भी जरूरी है। इसके साथ ही, प्रत्याशी पहले से किसी लाभ के पद पर न हो। अगर कोई प्रत्याशी दिवालिया हो, तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता है। जो व्यक्ति किसी सरकारी पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार या राजद्रोह में संलिप्त पाया गया हो, वह भी इन चुनावों में खड़ा नहीं हो सकता है। प्रत्याशी के लिए यह भी जरूरी है कि वह जिस क्षेत्र से चुनाव में खड़ा हो, वहां की मतदाता सूची में उसका नाम दर्ज होना आवश्यक है।
नगर निकाय की शक्तियां एवं कार्य
भारतीय संविधान की 12वीं अनुसूची में नगर निकायों की शक्तियों, अधिकारों और जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया है। इस सूची को साल 1992 में 74वें संविधान संशोधन के साथ जोड़ा गया था। इसमें नगर निकाय के 18 कामों का उल्लेख किया गया है -
● पार्कों और खेल के मैदानों की व्यवस्था करना,
● भूमि पर अनाधिकृत कब्जे को रोकना और सार्वजनिक भवनों का निर्माण कराना,
● आर्थिक और सामाजिक विकास की योजनाएं बनाना,
● सड़कें और पुल का निर्माण करना,
● घरेलू, औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोग के लिए पानी की आपूर्ति करना,
● सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता का प्रबंधन करना,
● अग्निशमन सेवाओं को उपलब्ध कराना,
● नगर में पेड़ पौधे लगाना और पर्यावरण संरक्षण का उपाय करना,
● विकलांग और मानसिक रूप से कमजोर लोगों के साथ समाज के कमजोर वर्गों के हितों की रक्षा करना,
● गंदी और पिछड़ी बस्तियों के विकास के लिए कार्य करना,
● शहरी गरीबी के उन्मूलन का प्रयास करना,
● नगर के विकास के लिए योजनाएं बनाना,
● सांस्कृतिक, शैक्षिक और सुंदरीकरण को बढ़ावा देना,
● अंत्येष्टि के लिए कब्रिस्तान, श्मशान और विद्युत शवदाह गृह का प्रबंधन करना,
● आवारा पशुओं के लिए रहने की व्यवस्था और पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम करना,
● जन्म और मृत्यु का पंजीकरण करना,
● स्ट्रीट लाइट, पार्किंग, बस स्टॉप सहित सार्वजनिक सुविधाओं को उपलब्ध कराना,
● बूचड़खानों और चमड़े के कारखानों को नियंत्रित करना।
यूपी में 2017 के नगर निकाय चुनावों में राजनीतिक दलों की स्थिति
साल 2017 में उत्तर प्रदेश में 16 महापौर पदों के लिए चुनाव हुए थे। जिनमें से भाजपा ने सर्वाधिक 14 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि दो महापौर बसपा के जीते थे। इसके अलावा, 1300 निगम पार्षदों में से भाजपा के सबसे ज्यादा 596 पार्षद जीते। वहीं सपा के 202 पार्षद, बसपा के 147 पार्षद और कांग्रेस के 110 पार्षद चुनाव जीतने में सफल हुए थे। बाकी सीटें अन्य के खातों में गई थीं।
वहीं, 198 सीटों पर नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव हुए थे। जिनमें से भाजपा ने 70, सपा ने 45, बसपा ने 29, कांग्रेस ने नौ और बाकी सीटें अन्य के खाते में गई थीं। नगर पालिका परिषद के सदस्यों के चुनाव में भाजपा की संख्या 923, सपा की 477, बसपा की 262, कांग्रेस की 158 और बाकी सीटें अन्य को मिली थी।
Recommended Video

पंचायत अध्यक्ष की बात करें, तो भाजपा के सबसे ज्यादा 100 अध्यक्ष चुनाव जीते थे। जबकि समाजवादी पार्टी के 83, बसपा के 45 और कांग्रेस के 17 अध्यक्ष चुनाव जीते थे। अगर नगर पंचायत सदस्यों की बात करें तो, भाजपा के 664 नगर पंचायत सदस्य चुनाव जीते थे। सपा के 453, बसपा के 218 और कांग्रेस के 126 सदस्य चुनाव जीते थे।
यह भी पढ़ें: UP Nikay Chunav: तीन दशकों से रहा है Agra Mayor Seat पर बीजेपी का कब्जा, क्या इस बार बदलेगा इतिहास












Click it and Unblock the Notifications