Union Territories: पुडुचेरी और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने में क्या हैं समस्याएं?

दिल्ली को साल 1956 में और पुडुचेरी को 1963 में केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया। दिल्ली और पुडुचेरी दो ऐसे केंद्र शासित प्रदेश हैं, जिनके पास विधानसभा और चुनी हुई सरकार है।

Union Territories concern of demand of statehood for Delhi and puducherry

Union Territories: हाल ही में पुडुचेरी विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार से पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की है। इस प्रस्ताव को पहले विपक्षी पार्टी डीएमके और एक निर्दलीय विधायक जी. नेहरू ने निजी प्रस्ताव के तौर पर पेश किया था।

सदन में प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी ने कहा कि यह प्रस्ताव अब आधिकारिक प्रस्ताव के तौर पर स्वीकार किया जाता है। जब सभी पार्टियों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, तो विधानसभा के अध्यक्ष आर. सेल्वम ने घोषणा की कि इसे एक आधिकारिक प्रस्ताव के रूप में स्वीकार करते हुए इसे सर्वसम्मति से पारित किया जाता है।

हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब पुडुचेरी विधानसभा ने इस तरह का प्रस्ताव पारित किया हो। इससे पहले पुडुचेरी विधानसभा में 13 बार प्रस्ताव पारित करके केंद्र सरकार से पुडुचेरी को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग की जा चुकी है।

पूर्ण राज्य का दर्जा देने की प्रक्रिया

संविधान के अनुच्छेद 2, 3 और 4 में राज्यों के पुनर्गठन, नाम परिवर्तन और सीमा निर्धारण की बात कही गयी है। इन धाराओं में कहा गया है कि अगर संसद चाहे, तो वह किसी भी राज्य, जिसमें केंद्र शासित प्रदेश भी शामिल हैं, का पुनर्गठन कर सकती है। इसके लिए पूर्ण राज्य के दर्जे के प्रस्ताव को संबंधित राज्य के विधानसभा से पारित करना होता है।

इसके बाद, इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की सहमति ली जाती है। फिर इस पर विचार करने के लिए मंत्री समूह का गठन किया जाता है। मंत्री समूह की सिफारिश पर केंद्र सरकार विधेयक का एक ड्राफ्ट तैयार करती है। इस ड्राफ्ट पर फिर से मंत्रिमंडल की स्वीकृति ली जाती है। इसके बाद, राज्य गठन की सिफारिशों को राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है।

राष्ट्रपति इस ड्राफ्ट को संबंधित विधानसभा में विधायकों की राय जानने के लिए भेजते हैं। इस ड्राफ्ट के वापस केंद्र सरकार के पास आने के पश्चात् राज्य विधानसभा के सदस्यों की राय को समाहित करते हुए गृह मंत्रालय एक नया कैबिनेट नोट तैयार करता है। इसके बाद, राज्य पुनर्गठन विधेयक को अंतिम बार केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है। फिर इसे संसद में पेश किया जाता है। संसद के दोनों सदनों में इसे साधारण बहुमत के साथ पारित करवाना होता है। एक बार फिर से इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद राज्य के गठन का रास्ता साफ हो जाता है।

क्या है राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956?

1950 के दशक में भाषाई आधार पर नये राज्यों के गठन की मांग शुरू हुई। इसी को देखते हुए साल 1953 में जस्टिस फजल अली की अगुवाई में तीन सदस्यीय राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया। आयोग की रिपोर्ट पर राज्य पुनर्गठन कानून 1956 को संसद से पारित किया गया। इस रिपोर्ट को नवंबर 1956 में लागू कर इसी आधार पर 14 राज्य और छह नये केंद्र शासित प्रदेश बनाए गये।

पुडुचेरी को क्यों बनाया गया केंद्र शासित प्रदेश?

दरअसल, विशेष परिस्थितियों में ही केंद्र शासित प्रदेश का गठन किया जाता है। भौगोलिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और जनकल्याण को देखते हुए ही केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाते हैं। पुडुचेरी पर लंबे समय तक फ्रांस का शासन रहा। आखिरकार यह 1 नवंबर 1954 को फ्रांसीसी शासन से मुक्त हुआ। साल 1963 में पेरिस में फ्रांसीसी संसद द्वारा भारत के साथ संधि की पुष्टि के बाद पुडुचेरी आधिकारिक रूप से भारत का अभिन्न अंग बन गया और इसी वर्ष इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।

पुडुचेरी को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के पीछे का कारण यह था कि यहां की संस्कृति फ्रांस से मेल खाती है और इसकी सांस्कृतिक विविधता बनाए रखने के लिए पुडुचेरी को किसी अन्य राज्य के साथ नहीं मिलाया गया।

पुडुचेरी की एक और विशेषता यह है कि इसके चार जिले अलग-अलग राज्यों से घिरे हुए हैं, जिनमें माहे केरल के पास, यानम आंध्र प्रदेश के पास, पुडुचेरी और कराईकल तमिलनाडु के पास स्थित हैं। ऐसे में यह जरूरी था कि इस प्रदेश को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर ही रखा जाए।

दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश के रूप में

पुडुचेरी की तरह ही दिल्ली की भी अपनी विधानसभा, मंत्रिमंडल और मुख्यमंत्री है और इन दोनों प्रदेशों में उपराज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के तालमेल से ही पुडुचेरी और दिल्ली में सरकार चलती है। साल 1956 से 1991 तक दिल्ली मुख्य रूप से केंद्र शासित प्रदेश ही था, लेकिन यहां पर विधानसभा और मंत्रिमंडल अस्तित्व में नहीं था। संविधान में 69वें संशोधन के साथ ही 1991 में दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का दर्जा मिला। तभी से यहां पर विधानसभा और मंत्रिमंडल अस्तित्व में है।

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने में अड़चन

अभी तक दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग राजनैतिक हित को देखते हुए ही की गयी है। जब भी केंद्र और राज्य में अलग-अलग सरकारें होती हैं, तो राज्य सरकार पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग करती है। अब तक कई बार दिल्ली विधानसभा से दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव पारित हो चुका है, लेकिन इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है।

साल 1994 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना ने दिल्ली को पूर्ण राज्य देने की मांग की थी। इसके बाद, साल 1998 में तत्कालीन मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा ने भी दिल्ली को पूर्ण राज्य देने का ड्राफ्ट बनाया था। साल 2003 में तत्कालीन एनडीए सरकार ने इस ड्राफ्ट को संसद में पेश भी किया था। लेकिन इसे स्टैंडिंग कमेटी में भेजना पड़ा। बाद में इस ड्राफ्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने कई बार अपने चुनावी घोषणा पत्र में दिल्ली को पूर्ण राज्य देने के मुद्दे का उल्लेख किया है। बाद में जब आम आदमी पार्टी सत्ता में आई, तो उसने भी अपने घोषणापत्र में इसे स्थान दिया। यहां तक कि साल 2018 में केजरीवाल सरकार ने इसे विधानसभा से पारित भी कराया।

दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलने का सबसे बड़ा कारण यह बताया जाता है कि यह देश की राजधानी है। यहां पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, संसद और दुनियाभर के राजनयिक और उनके दूतावास मौजूद हैं। ऐसे में अगर दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया, तो कानून व्यवस्था और पुलिस का नियंत्रण भी राज्य सरकार के पास होगा और केंद्र सरकार जमीन से जुड़े नीतिगत फैसले भी नहीं ले पाएगी।

राज्य जो पहले थे केंद्र शासित प्रदेश

भारत में ऐसे 7 राज्य हैं जो पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने से पहले केंद्र शासित प्रदेश थे।

1. मिजोरम 1972 से 1987 तक केंद्र शासित प्रदेश था। फिर 1987 के बाद भारत का 23वां राज्य बना।
2. अरुणाचल प्रदेश 1972 से 1987 तक केंद्र शासित प्रदेश था। फिर 1987 के बाद यह भारत का 24वां राज्य बना।
3. गोवा 1961 से 1987 तक केंद्र शासित प्रदेश था। फिर 1987 के बाद भारत का 25वां राज्य बना।
4. मणिपुर पूर्ण राज्य बनने से पहले 1956 से 1972 तक केंद्र शासित प्रदेश था।
5. त्रिपुरा राज्य बनने से पहले 1956 से 1972 तक केंद्र शासित प्रदेश था।
6. हिमाचल प्रदेश 1956 से 1971 तक एक केंद्र शासित प्रदेश था। बाद में इसे राज्य का दर्जा दिया गया था।
7. नागालैंड 1957 से 1963 तक एक केंद्र शासित प्रदेश था। फिर जब यह भारत का पूर्ण राज्य बना।

क्या कभी इसका विपरीत भी हुआ है?

हां, ऐसा एक बार हुआ है जब एक राज्य केंद्रशासित प्रदेश बन गया हो। जम्मू और कश्मीर उसका उदाहरण है। दरअसल, अगस्त 2019 में, संसद ने जम्मू एंड कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पारित किया, जिसके अंतर्गत जम्मू और कश्मीर को दो अलग-अलग जम्मू और कश्मीर और लद्दाख जैसे केंद्रशासित प्रदेशों में बांट दिया गया।

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