Newsclick UAPA: न्यूज़क्लिक पर यूएपीए, चीन के पैसे से देश में अस्थिरता का मामला

दिल्ली पुलिस न्यूज़पोर्टल न्यूज़क्लिक के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967, यूएपीए के तहत चार्जशीट पेश कर रही है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इसकी जांच कर रही है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है।

इस केस में न्यूज़ पोर्टल न्यूज़क्लिक पर चीन से भारी धन लेकर देश में अस्थिरता फैलाने वाली खबरों को प्रकाशित और प्रसारित करने का आरोप है। इसके संचालक-संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ को मुख्य आरोपी बनाया गया है और उनके सहयोगी रहे अमित चक्रवर्ती सरकारी गवाह बन गए हैं। इस मामलें में दोनों को 3 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर आईपीसी की धारा 153ए और 120बी के साथ-साथ यूएपीए की धारा 13, 16, 17, 18 और 22 के तहत कारवाई की गई है।

UAPA on Newsclick case of instability in the country due to China s money

क्या है पूरा मामला
दिल्ली पुलिस की एफआईआर के अनुसार न्यूज क्लिक ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने, भारत के खिलाफ समाज में असंतोष पैदा करने और देश की एकता को खतरे में डालने की साजिश रची और भारत के साथ शत्रुतापूर्ण व्यवहार करने वाली विदेशी संस्थाओं से अवैध रूप से करोड़ों की विदेशी धनराशि हासिल की।

न्यूज़क्लिक के संस्थापक और प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ ने पीपुल्स डिस्पैच पोर्टल, जिसका स्वामित्व और रखरखाव एम/एस पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के पास है, का इस्तेमाल पेड न्यूज के माध्यम से जानबूझकर झूठी बातें फैलाने के लिए किया और विदेशी फंड के जरिए करोड़ों रुपये प्राप्त किए।

दिल्ली पुलिस ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर यह मामला दर्ज किया था और इसकी जांच शुरू की थी। दिल्ली पुलिस की जांच में यह भी पाया गया कि अमेरिकी अरबपति नेविल रॉय सिंघम लगातार न्यूज़क्लिक को फंडिंग कर रहे थे।

न्यूज़क्लिक को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट
अमेरिका के प्रमुख अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिका में जन्मे नेविल रॉय और न्यूजक्लिक के बीच के संबंधों पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसके अनुसार नेविल रॉय सिंघम, जो कि वामपंथी अकादमिक आर्चीबाल्ड सिंघम के पुत्र हैं, ने न्यूजक्लिक को भरपूर आर्थिक मदद की थी।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने यह भी खुलासा किया कि कोडपिंक नाम के चीन के एक हैन्डल का नाम भी सिंघम के फंडिंग नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। वह चीन के शंघाई में टाइम्स स्क्वायर की 18वीं मंजिल से अपना आपरेशन चलाता है। पत्र ने यह भी दावा किया था कि उनका नेटवर्क यूट्यूब शो का निर्माण भी करता है। नेविल रॉय सिंघम वामपंथी हितों के रूप में काम करता है और उस पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की प्रचार शाखा के साथ सीधे संपर्क रखने का भी आरोप है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने भी यह कहा है कि कांग्रेस, चीन और न्यूज़क्लिक के बीच भारत विरोधी अभियान का नेटवर्क चल रहा था और ये एक वेबसाइट के माध्यम से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे थे।

न्यूज़क्लिक मामले में एक और नाम चर्चा में है और वह है गौतम नवलखा। दिल्ली पुलिस के अनुसार पत्रकार गौतम नवलखा भी न्यूज़क्लिक में शेयरधारक हैं। नवलखा पर भारत विरोधी गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होने का आरोप है। वह प्रतिबंधित माओवादी संगठनों का भी खुला समर्थन करता है।

किन लोगों पर लगता है यूएपीए
2019 के यूएपीए अधिनियम (1967 अधिनियम में संशोधन) के तहत केंद्र पास विशिष्ट जानकारी के आधार पर उस संगठन या व्यक्ति को आतंकवादी के रूप में नामित करने का अधिकार है, जो देश की एकता, अखंडता के प्रति खतरे का कारण बन सकता हो या देश में अस्थिरता, समाज में विघटन और दंगे आदि फैलाने की गतिविधियों में शामिल हों। हालांकि इस कानून की कठोर प्रकृति को देखते हुए इसके दुरुपयोग की भी आशंका व्यक्त की जाती रही है।

यूएपीए मामले के आरोपी को 15 दिनों की हिरासत रिमांड को बढ़ाकर 30 दिनों तक कर दिया गया है, जिसमें पुलिस हिरासत भी शामिल है। इसके प्रावधान में पुलिस को जांच के दौरान किसी भी समय हिरासत की मांग करने की अनुमति है। इस कानून में न्यायाधीश सीआरपीसी के तहत 60 से 90 दिनों के बजाय, जांच के दौरान 180 दिनों तक हिरासत की अनुमति भी दे सकते हैं।

जांच के लिए समय-सीमा को दोगुना करने से पुलिस जेल में बंद व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाए बिना लंबे समय तक कैद में रख सकती है। पुलिस अपनी गिरफ्तारी शक्तियों का उपयोग आवश्यकता अनुसार कर सकती है। यूएपीए के तहत कथित आतंकवादी कृत्यों के लिए अग्रिम जमानत की अनुमति नहीं है।

यूएपीए के मामलों में लगातार वृद्धि
एनसीआरबी की 2022 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2021 के मुकाबले यूएपीए मामलों में 17.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। सबसे अधिक केस केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में दर्ज किए गए। 2022 में यहाँ सबसे अधिक 371 मामले दर्ज किए गए। मणिपुर में भी 167 मामलों को दर्ज किया गया। असम और उत्तर प्रदेश में भी क्रमशः 133 और 101 मामले दर्ज किए गए।

यूएपीए के तहत कई अंतरराष्ट्रीय स्तर के खूंखार आतंकवादियों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किए गए हैं। उनमें शामिल हैं पाकिस्तान के आतंकवादी मौलाना मसूद अज़हर, हाफ़िज़ मुहम्मद सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, दाऊद इब्राहिम कासकर। इसके अलावा वधावा सिंह बब्बर, लखबीर सिंह, रणजीत सिंह, परमजीत सिंह पंजवार, भूपिंदर सिंह भिंडा, गुरमीत सिंह बग्ग और गुरपतवंत सिंह पन्नून जैसे खालिस्तानी आतंकवादियों के भी नाम बी यूएपीए के तहत केस दर्ज हैं।

कश्मीरी आतंकवादियों में साजिद मीर, यूसुफ मुजम्मिल, अब्दुर रहमान मक्की, शाहिद महमूद फरहतुल्लाह गोरी, अब्दुल रऊफ असगर, इब्राहिम अतहर, यूसुफ़ अज़हर, शाहिद लतीफ़ और सैयद मोहम्मद यूसुफ शाह के भी नाम यूएपीए के तहत दर्ज मामलों में शामिल हैं।

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