Ghar Wapsi: अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और मुस्लिमों की घर वापसी की क्या है सच्चाई?
Ghar Wapsi: अयोध्या में भगवान राम की प्रतिमा स्थापित होने से समस्त भारतवासी प्रफुल्लित हैं। जात-धर्म से ऊपर उठकर सभी ने अपने आप को राम से जुड़ा पाया। इसमें भारत के मुस्लिम भी शामिल हैं।
लेकिन कुछ लोगों को यह पच नहीं रहा कि राम आखिर कैसे हर भारतीय के लिए पूजनीय हो गए हैं, क्यों मुसलमान भी उन्हें अपना पूर्वज बता रहे है।

कुछ पाकिस्तानी मीडिया ने राम मंदिर के निर्माण को मुसलमानों के धर्म परिवर्तन से जोड़ कर पेश किया है। क्या है असलियत, क्या घर वापसी जैसे शब्द धर्म परिवर्तन के लिए गढ़े गए हैं। क्या सनातन धर्म में इस तरह की गतिविधियों की इजाजत है। जानते हैं कुछ लोगों की राय।
विहिप का घर वापसी कार्यक्रम
इधर अयोध्या में रामलला की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, उधर मध्य प्रदेश के अलीराजपुर में एक मुस्लिम परिवार हिंदू धर्म में अपनी वापसी कर रहा था। अयूब उर्फ पीरू भाई ने अपनी पत्नी और दो बच्चों सहित हिंदू धर्म को पुनः अंगीकार करते हुए कहा कि हमारे पूर्वज हिंदू थे और अब वह घर वापसी कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें हिंदू धर्म और इसकी पूजा पद्धति बहुत पसंद है।
विश्व हिंदू परिषद ने इस घर वापसी के लिए अयूब के सम्मान में कार्यक्रम रखा था, जहां उसके पैर धोकर और अंगवस्त्र पहनाए गए। अयूब अब राजकुमार कहलाएगा और उसकी पत्नी करिश्मा कहलाएंगी। यह विहिप का कोई पहला घर वापसी कार्यक्रम नहीं था, इसके पहले भी इस तरह के कई कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसलिए यह कहना कि अयोध्या में राम मंदिर और घर वापसी कोई सोची समझी योजना है, सही नहीं है।
दरअसल पिछले साल मई में ही विश्व हिंदु परिषद ने जबरन धर्मांतरित हिंदुओं की घर वापसी का अभियान शुरू किया था। यह अभियान एक सामाजिक आंदोलन के रूप में शुरू किया गया, जिसमें हिंदुओं में धर्मांतरण रोकने और जबरन धर्मांतरित हिंदुओं को उनके मूल धर्म में वापस लाने के लिए संतों को दलितों और आदिवासियों के घरों में भेज गया।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, घर वापसी और राजनीति
कुछ समय पहले ही अयोध्या में तीन दिवसीय कार्यक्रम के तहत राम कथा कहने मध्य प्रदेश के बागेश्वर धाम पीठ' के प्रमुख शास्त्री धीरेंद्र कृष्ण ने मंच से घोषणा की कि राम की कथा सुनने के बाद, मुस्लिम धर्म का पालन करने वाले दस लोग सनातनी बन गए हैं। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रहने वाले जमील निज़ाम शेख ने दावा किया कि उन्हें किसी ने सनातन में आने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि वह बचपन से ही भगवान राम और कृष्ण की पूजा करते आ रहे थे और उनका परिवार गणेश उत्सव भी मनाता था। यहाँ अयोध्या में 'राम कथा' या भगवान राम के जीवन पर प्रवचन सुनने के बाद उनसे नहीं रहा गया और वे स्वतः घर वापसी करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका बीजेपी से कोई लेना देना नहीं है। इस तरह की खबरें कुछ दिनों से लगातार आ रहीं हैं।
धीरेन्द्र शास्त्री घर वापसी अभियान के बारे में कहते हैं कि उनकी किसी भी धर्म से कोई आपत्ति नहीं है। वे सिर्फ सनातन धर्म के रक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाए रखना चाहते हैं। वह घर वापसी का काम अपनी ख्याति के लिए नहीं कर रहे, बल्कि वह इस काम को हिन्दू धर्म की सेवा के रूप में कर रहे हैं। जो भी यहां आकर घर वापसी करने के लिए कहता है, पहले वह सार्वजनिक रूप से अवश्य पूछते हैं कि किसी ने उसपर कोई दबाव तो नहीं डाला है। वह यह भी कहते हैं कि उनका किसी पार्टी या संगठन से लेना देना नहीं है, वह बागेश्वर धाम के शास्त्री हैं और सिवाय आशीर्वाद के उनसे कोई अपेक्षा न रखे। धीरेन्द्र शास्त्री अभी तक 300 से अधिक लोगों की घर वापसी करा चुके हैं।
क्या घर वापसी भी धर्मांतरण है?
घर वापसी धर्मांतरण नहीं है। कई धर्माचारियों का मानना है कि हिंदू वंश के किसी व्यक्ति का हिंदू धर्म में वापस प्रवेश करना धर्मांतरण बिल्कुल नहीं है। क्योंकि हिंदू धर्म के विभिन्न संप्रदायों में नए अनुयायियों को जोड़ने का इतिहास है। भारतीय संविधान के अंतर्गत व्यक्ति को किसी धर्म का अभ्यास करने या प्रचार करने का अधिकार है।
इस अधिकार का प्रयोग कर ईसाई और मुस्लिम संगठनों ने व्यापक रूप से धर्मांतरण करवाया, जबकि घर वापसी का आह्वान करने वाली विहिप सिर्फ सार्वजनिक मंच पर संपर्क नंबर देती है और कॉल का इंतजार करती है। उनमें से जो लोग घर वापसी चाहते हैं, उनका विधिवत सार्वजनिक रूप से संस्कार के जरिए घर वापसी कराया जाता है।
ज्यादातर वे लोग घर वापसी करते हैं जिनको यह एहसास होता है कि उनके पूर्वजों को बल या धन के द्वारा दूसरे मजहब को अपनाने के लिए मजबूर किया गया था। ये लोग वास्तव में अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहते हैं। इसलिए घर वापसी को धर्मांतरण नहीं कहा जा सकता। आज भी प्रति वर्ष लगभग 50 हजार हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करा दिया जा रहा है, जबकि घर वापसी का अनुपात 100 भारतीयों में से केवल 0.013 ही है।
ईसाई मिशनरी अब भी कराते हैं धर्म परिवर्तन
ईसाई मिशनरी भारतीय हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने का अभियान अब भी चला रहे हैं। पिछले साल ही उत्तराखंड के देहरादून इलाके से कुछ मिशनरी लोगों को बहला फुसलाकर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसके पहले कर्नाटक और झारखंड राज्य में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आईं थीं। ईसाई मिशनरी और मुस्लिम संगठन धर्मांतरण के एजेंडे पर काम करते हैं। वे मुख्य रूप से गरीबों और आदिवासियों को निशाना बनाते हैं।












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