कहीं आपके डिप्रेशन का कारण आपकी मां तो नहीं???
सिडनी। आजकल युवावस्था में लोगों के अंदर बहुत ज्यादा डिप्रेशन की बीमारी देखी जा रही है, खासकर के महिलाओं के अंदर यह रोग कुछ ज्यादा ही पनप रहा है। अवसाद ग्रसित महिलाओं की आम तौर पर उम्र 30-35 साल के बीच में होती है जिसके बारे में नए शोध ने एक हैरत अंगेज बात लोगों के सामने रखी है।
यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के शोध में कहा गया है कि युवावस्था में लोगों का खासकर के लड़कियों के अवसाद ग्रसित होने के पीछे उनकी मां है।
बच्चे पर होता है मां के स्वभाव का असर
वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की वैज्ञानिक और मुख्य लेखिका जेसिका टीयर्न ने कहा है कि युवा महिलाओं का अवसाद या तनाव से ग्रसित होना उनके जन्म के समय उनकी मां की आयु 30 या उससे अधिक होने पर निर्भर करता है इसलिए इस नकारात्मक चीजों के लिए मां जिम्मेदार हैं।
अक्सर जब महिलाएं तीस के बाद मां बनती हैं तो काफी मेंटल ट्रामा से गुजरती हैं जिसका असर उनके अजन्में बच्चे पर पड़ता है। इस शोध के लिए प्रेग्नेंसी कोहॉर्ट अध्ययन के आकड़ों का प्रयोग किया गया है।
साइकोलॉजिकल और डेमोग्राफिक जानकारी
इस शोध के लिए 1989 से 1991 के बीच गर्भवती महिलाओं को शामिल किया गया था, जिन्हें साइकोलॉजिकल और डेमोग्राफिक जानकारी भी दी गई थी। इसके परिणामस्वरूप अगले 23 सालों में विभिन्न आयु के दौरान उनकी बेटियों का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया जिसमें 1,200 बेटियों ऐसी पायी गईं जो कि 20 साल तक की उम्र में अवसाद ग्रसित थीं।
यह अध्ययन पत्रिका 'अबनार्मल साइकोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है जिसका मकसद लोगों को यह बताना है कि प्रेग्नेंट लेडी अपना पूरा ख्याल रखें नहीं तो उनकी गलती का खामियाजा उनके बच्चों को जीवनभर भुगतना पड़ता है। महिलाएं सही उम्र और सही वातावरण में बच्चे को जन्म दें, उनका केवल शारीरिक तौर पर हेल्दी रहना ही मायने नहीं रखता बल्कि उन्हें मेंटली भी काफी पीसफूल और फिट होना चाहिए।













Click it and Unblock the Notifications